झारखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और गहन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान एक ऐसा सनसनीखेज मामला पकड़ा गया है, जिसने राज्य की खुफिया एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान से ताल्लुक रखने वाले कुछ विदेशी नागरिक अवैध तरीके से झारखंड की धरती पर न केवल लंबे समय से रह रहे थे, बल्कि उन्होंने यहां के स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की आंखों में धूल झोंककर अपने फर्जी दस्तावेज बनवाकर मतदाता पहचान पत्र यानी वोटर आईडी कार्ड भी हासिल कर लिए थे। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संप्रभुता पर सीधे तौर पर सेंध लगाने वाले इस गंभीर मामले ने एक बार फिर से अवैध घुसपैठ और बॉर्डर सिक्योरिटी के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर बनने वाले आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे अहम दस्तावेजों की सत्यता पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
कैसे खुला फर्जी मतदाताओं का यह काला राज और कौन हैं आसिल, असलम और इब्राहिम
प्रशासनिक सूत्रों और विशेष जांच टीमों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, यह पूरा भंडाफोड़ तब हुआ जब चुनाव आयोग के निर्देशानुसार क्षेत्र में घर-घर जाकर दस्तावेजों का मिलान और सत्यापन किया जा रहा था। इस दौरान अधिकारियों के हाथ कुछ ऐसे संदिग्ध दस्तावेज लगे जिनकी पृष्ठभूमि और पारिवारिक इतिहास की जब गहनता से छानबीन की गई तो यह स्पष्ट हो गया कि वे लोग मूल रूप से भारतीय नागरिक हैं ही नहीं। इस फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपियों के रूप में आसिल, असलम और इब्राहिम जैसे नामों का खुलासा हुआ है, जो कागजों में तो खुद को स्थानीय निवासी बताकर हर सरकारी योजना का लाभ ले रहे थे और चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की जुगत में थे, लेकिन असलियत में उनका ताल्लुक अफगानिस्तान से निकला है। इतनी बड़ी तादाद में विदेशी नागरिकों द्वारा देश के सबसे गोपनीय और पवित्र अधिकार यानी वोटिंग राइट्स में सेंध लगाने की यह घटना इस बात की गवाही देती है कि किस तरह बिचौलियों और भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत से देश की सुरक्षा के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई, सिंडिकेट की हो रही तलाश
जैसे ही डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान इन अफगानी नागरिकों के मतदाता सूची में शामिल होने का यह काला सच उजागर हुआ, जिला प्रशासन और राज्य की खुफिया एजेंसियों यानी सीआईडी में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तीनों आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी गई और उनसे जुड़े तमाम दस्तावेजों, पासपोर्ट, बैंक खातों तथा अन्य पहचान पत्रों को अपने कब्जे में लेकर गहनता से पूछताछ शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि इन विदेशी नागरिकों ने स्थानीय स्तर पर कुछ ऐसे दलालों और भ्रष्ट कर्मचारियों की मदद ली थी, जिन्होंने बिना किसी भौतिक सत्यापन के केवल पैसों के लालच में इनके फर्जी निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवा दिए थे, जिसके आधार पर इन्होंने आसानी से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवा लिया। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की भी बहुत बारीकी से पड़ताल कर रही हैं कि इस सिंडिकेट के तार झारखंड के बाहर देश के अन्य हिस्सों या नेपाल और बांग्लादेश सीमा से जुड़े हुए तो नहीं हैं, क्योंकि इस प्रकार की सुनियोजित घुसपैठ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी और भविष्य की सख्त प्रशासनिक नीतियां
झारखंड में अफगानी नागरिकों के मतदाता बनने का यह सनसनीखेज मामला देश भर के तमाम राज्यों के प्रशासनिक महकमों के लिए एक बहुत बड़ी आंखें खोलने वाली चेतावनी है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। देश की चुनावी प्रणाली की पवित्रता को बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान प्रत्येक नागरिक के दस्तावेजों की बायोमेट्रिक और तकनीकी स्तर पर सूक्ष्म जांच की जाए ताकि भविष्य में कोई भी बाहरी या अवैध घुसपैठिया इस प्रकार के लोकतंत्र के पावन मंदिर में प्रवेश न पा सके। राज्य सरकार और चुनाव आयोग इस घटना के बाद से और अधिक सख्त हो गए हैं और उन तमाम अधिकारियों तथा कर्मचारियों की पहचान की जा रही है जिनकी लापरवाही या संलिप्तता के कारण यह फर्जीवाड़ा इतने लंबे समय तक फलता-फूलता रहा। दोषियों के खिलाफ देशद्रोह और फर्जी दस्तावेजों के निर्माण से संबंधित धाराओं के तहत कठोरतम कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में कोई भी देश विरोधी तत्व भारत की चुनावी व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस न कर सके।
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