चुटूपालू घाटी बनी मौत का कॉरिडोर! हादसों की लंबी फेहरिस्त के बाद भी NHAI  व प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

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  • ब्रेक फेल होते ही मौत बनकर दौड़ रहे भारी वाहन, कभी ट्रेलर तो कभी कंटेनर  मचा रहे तबाही
  • अब रेलवे कर्मी की मौत और डीएसपी के परिजन के घायल होने के बाद उठे गंभीर सवाल
2026 में सामने आए प्रमुख हादसे
13 फरवरी: ब्रेक फेल कंटेनर की ट्रेलर से टक्कर, आग लगने से चालक की मौत। 
24 मार्च: ट्रेलर की टक्कर में चालक गंभीर रूप से घायल। 
1 जुलाई: अनियंत्रित भारी वाहन की चपेट में कई वाहन। 
6 जुलाई: ब्रेक फेल ट्रेलर ने 11 वाहनों को टक्कर मारी, 20 से अधिक घायल। 
13 जुलाई: दो अलग-अलग ट्रेलर हादसे
26 अगस्त: ब्रेक फेल ट्रेलर ने दो बाइक समेत चार वाहनों को चपेट में लिया, एक की मौत। 
4 सितंबर: ब्रेक फेल ट्रेलर ने कई वाहनों को टक्कर मारी, रेलवे कर्मचारी की मौत। 
6 सितंबर: कंटेनर की कार से टक्कर में महिला की मौत, पांच घायल
रामगढ़:रांची-रामगढ़ फोरलेन की चुटूपालू घाटी एक बार फिर लगातार हो रहे सड़क हादसों को लेकर सुर्खियों में है। तेज ढलान, भारी वाहनों की आवाजाही, ब्रेक फेल होने की घटनाएं और दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हालत यह है कि पिछले कुछ महीनों में घाटी में एक के बाद एक बड़े हादसे सामने आए हैं। कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि हादसों के बाद कुछ दिनों तक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सक्रियता दिखाई देती है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पुराने ढर्रे पर लौटती नजर आती है। अगस्त में जिला प्रशासन और NHAI की ओर से घाटी में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कदम उठाए गए थे। 40 किमी प्रति घंटे की गति सीमा, स्पीड मॉनिटरिंग कैमरे और ब्रेथ एनालाइजर जांच जैसी व्यवस्था शुरू किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इसके बावजूद सितंबर की शुरुआत में लगातार हादसों ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सितंबर की शुरुआत में 12 घंटे के भीतर तीन हादसे, एक महिला की मौत
चुटूपालू घाटी में सितंबर की शुरुआत ही बेहद दर्दनाक रही। 4 सितंबर की शाम एक बेकाबू ट्रेलर का ब्रेक फेल होने के बाद उसने कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। जानकारी के अनुसार ट्रेलर ने तीन कारों और एक ट्रक को टक्कर मारी तथा एक बाइक भी इसकी चपेट में आ गई। हादसे में रेलवे कर्मचारी जगदेव तिर्की की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।
इसके बाद 6 सितंबर को घाटी में एक और भयावह हादसा हुआ। ब्रेक फेल होने के बाद अनियंत्रित कंटेनर ने कार को टक्कर मार दी। हादसे में सारा तबस्सुम की मौत हो गई, जबकि कार में सवार पांच अन्य लोग घायल हो गए। घायलों में रामगढ़ मुख्यालय डीएसपी अकरम रजा के परिवार के सदस्य भी शामिल बताए गए हैं।
 रिपोर्ट के अनुसार शनिवार रात से रविवार सुबह तक करीब 12 घंटे के भीतर घाटी में तीन सड़क हादसे हुए, जिनमें एक महिला की मौत हुई और पांच लोग घायल हुए।
26 अगस्त: ब्रेक फेल ट्रेलर ने चार वाहनों को रौंदा, बाइक सवार की मौत
26 अगस्त को भी चुटूपालू घाटी में ब्रेक फेल होने के बाद एक ट्रेलर बेकाबू हो गया। ट्रेलर डिवाइडर से टकराने के बाद सड़क के दूसरे हिस्से में पहुंच गया और उसकी चपेट में दो बाइक, एक स्कॉर्पियो और एक बोलेरो आ गए। हादसे में एक बाइक सवार की मौके पर मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हादसे के बाद घाटी में करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया था।
जुलाई में एक के बाद एक हादसे, 11 वाहनों को मारी टक्कर
जुलाई में भी चुटूपालू घाटी में हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 6 जुलाई को ब्रेक फेल होने के बाद एक ट्रेलर करीब एक किलोमीटर तक बेकाबू होकर दौड़ा और 11 वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में 20 से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी।
1 जुलाई को भी भारी सामान से लदा ट्रेलर अनियंत्रित होकर पलट गया था और कई वाहन उसकी चपेट में आ गए थे। इस घटना ने घाटी में भारी वाहनों की सुरक्षित आवाजाही और ढलान पर नियंत्रण व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।
जुलाई में 13 तारीख को भी दो अलग-अलग घटनाओं में एस्बेस्टस शीट और कोयला लदे ट्रेलरों के दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी सामने आई। यानी पूरे महीने घाटी में भारी वाहनों के अनियंत्रित होने की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं।
फरवरी में कंटेनर में लगी आग, चालक की जिंदा जलकर मौत
13 फरवरी 2026 को चुटूपालू घाटी में एक कंटेनर का ब्रेक फेल होने के बाद वह आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गया। टक्कर के बाद कंटेनर में आग लग गई और चालक की जिंदा जलकर मौत हो गई। हादसे के बाद घाटी में लंबा जाम भी लगा था।
मार्च में भी घाटी में ट्रेलर की टक्कर से चालक के गंभीर रूप से घायल होने की घटना सामने आई। एक ट्रेलर ने दूसरे ट्रेलर को पीछे से टक्कर मारी थी, जिसके बाद चालक केबिन में फंस गया था।
हादसे सिर्फ ड्राइवर की गलती नहीं, सड़क की बनावट भी कटघरे में
चुटूपालू घाटी की सबसे बड़ी चुनौती यहां की तेज ढलान बताई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारी वाहन जब सामान से लदे हुए ढलान से नीचे उतरते हैं तो लगातार ब्रेक लगाने से ब्रेक पैड और ड्रम गर्म हो सकते हैं, जिससे ब्रेक फेल होने की आशंका बढ़ जाती है।
यही वजह है कि घाटी में लगातार होने वाले हादसों के बीच अब केवल वाहन चालकों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराने के बजाय सड़क की डिजाइन, ढलान, सुरक्षा अवरोध, साइनेज, आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था और भारी वाहनों के नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से सवाल उठ रहे हैं।
NHAI पर सवाल: पहले से चिन्हित ब्लैक स्पॉट पर कितने इंतजाम?
अतीत में जिला प्रशासन की ओर से घाटी के दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में साइन बोर्ड, स्पीड बोर्ड, लाइट, CCTV कैमरे और ब्रेक फेल होने की स्थिति में सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। जनवरी 2025 में भी जिला उपायुक्त के निरीक्षण के दौरान गंडके मोड़ को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित करते हुए सुरक्षा उपायों और पर्याप्त साइनेज लगाने के निर्देश दिए गए थे।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि यदि दुर्घटना संभावित स्थान वर्षों से चिन्हित हैं तो वहां स्थायी और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बन सकी?
शिकायत में NHAI मैनेजर और संबंधित कर्मियों पर लापरवाही का आरोप
4 सितंबर के हादसे में रेलवे कर्मी की मौत के बाद मृतक की पत्नी जयवंती तिवारी ने रामगढ़ थाना में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में NHAI के मैनेजर एवं संबंधित कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि चुटूपालू घाटी में लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं और इन हादसों में लोगों की जान जा रही है। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा से जुड़े इंतजामों और दुर्घटना संभावित स्थानों को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हालांकि NHAI अधिकारियों पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
40 की स्पीड लिमिट और कैमरे के बावजूद हादसे क्यों नहीं रुक रहे?
अगस्त में प्रशासन, पुलिस और NHAI की टीम ने चुटूपालू से पटेल चौक तक करीब 12 किलोमीटर क्षेत्र का निरीक्षण किया था। इसके बाद घाटी में 40 किमी प्रति घंटे की गति सीमा लागू करने और दो स्पीड मॉनिटरिंग कैमरे लगाने की जानकारी सामने आई। ओवरस्पीड वाहनों पर ऑटोमेटिक चालान तथा शराब पीकर वाहन चलाने वालों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच की व्यवस्था भी शुरू की गई।
इसके बावजूद सितंबर में लगातार हादसे सामने आने से सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या केवल स्पीड कैमरा और चालान से चुटूपालू घाटी को सुरक्षित बनाया जा सकता है?
क्या घाटी में भारी वाहनों के ब्रेक सिस्टम की नियमित जांच हो रही है?
क्या ढलान वाले हिस्से में पर्याप्त आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था है?
क्या सभी ब्लैक स्पॉट पर पर्याप्त साइनेज और चेतावनी बोर्ड लगे हैं?
क्या रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था है?
और सबसे बड़ा सवाल—ब्रेक फेल होने वाले भारी वाहनों को नियंत्रित करने के लिए स्थायी व्यवस्था कहां है?
अब वैकल्पिक फोरलेन सड़क की तैयारी, लेकिन कब तक?
लगातार हादसों के बीच NHAI ने चुटूपालू घाटी में नई वैकल्पिक फोरलेन सड़क बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के तहत खतरनाक ढलान वाले हिस्से के बगल में पहाड़ काटकर नया एलाइनमेंट तैयार करने की योजना बताई गई है। इसके लिए सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है।
यानी NHAI भी इस बात को स्वीकार करता दिखाई दे रहा है कि मौजूदा सड़क की संरचना और ढलान को लेकर स्थायी समाधान की जरूरत है। सवाल यह है कि जब तक नई सड़क तैयार नहीं होती, तब तक मौजूदा सड़क पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
सबसे बड़ा सवाल: हादसे के बाद जागना या हादसे से पहले सुरक्षा?
चुटूपालू घाटी में दुर्घटनाओं का पैटर्न अब किसी एक दिन या किसी एक वाहन तक सीमित नहीं रह गया है। कभी कंटेनर का ब्रेक फेल होता है, कभी ट्रेलर बेकाबू होता है और कभी भारी वाहन कई गाड़ियों को रौंदते हुए आगे बढ़ जाता है।
ऐसे में जरूरत केवल हादसे के बाद क्रेन भेजकर वाहन हटाने और यातायात बहाल करने की नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले उसे रोकने वाली व्यवस्था विकसित करने की है।
चुटूपालू घाटी में लगातार हो रही मौतें अब सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा नहीं रह गई हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन चुकी हैं। NHAI, जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस—सभी को मिलकर यह जवाब देना होगा कि इतने हादसों के बाद भी आखिर कौन-सी कमी बाकी है, जिसे दूर किए बिना इस मौत के कॉरिडोर पर हादसों का सिलसिला रुक नहीं रहा।
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