- गौतम बुद्ध सामाजिक चेतना संस्थान ट्रस्ट ने मनाया 52वां शहादत दिवस, पूर्व शिक्षा मंत्री वीरेंद्र सिंह कुशवाहा बोले—जगदेव बाबू की 90 प्रतिशत उपेक्षितों के हक की लड़ाई अधूरी
अशोक वर्मा
छौड़ादानो : गौतम बुद्ध सामाजिक चेतना संस्थान ट्रस्ट के तत्वावधान में शनिवार को संत कबीर नगर, नरउल में अमर शहीद जगदेव बाबू का 52वां शहादत दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। बिहार सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं ट्रस्ट के संस्थापक वीरेंद्र सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन अवकाश प्राप्त न्यायाधीश दामोदर बाबू ने किया। इस अवसर पर जगदेव बाबू सहित विभिन्न महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
उद्घाटनकर्ता एवं मुख्य वक्ता अवकाश प्राप्त न्यायाधीश दामोदर बाबू ने कहा कि समाज की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसी व्यक्ति पर दमन, शोषण और अत्याचार की गुंजाइश न हो। भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान रूप से जीने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू समतामूलक समाज के प्रबल समर्थक थे। समाजवादी विचारधारा से प्रभावित जगदेव बाबू पर डॉ. राममनोहर लोहिया का भी गहरा प्रभाव था।
उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू ने उस दौर में सामाजिक समरसता और व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई छेड़ी, जब समाज अनेक प्रकार की कुरीतियों और असमानताओं से जूझ रहा था। वे लगातार व्यवस्था परिवर्तन के लिए संघर्ष करते रहे और अंततः 5 सितंबर 1974 को व्यवस्था की गोली के शिकार होकर सभा के दौरान ही शहीद हो गए।
जगदेव बाबू के सपनों का समाज अब भी अधूरा
कार्यक्रम के आयोजक एवं पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि “छौड़ादानो मेरी कर्मभूमि है।” उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू ने जिस शोषणमुक्त समाज की परिकल्पना की थी, वह आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो सकी है।
आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जो लोग आरक्षण समाप्त करने की आवाज उठा रहे हैं, उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या आज भी देश की बड़ी आबादी को सामाजिक और आर्थिक सहारे की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनेक लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाया है, लेकिन अभी भी बड़ी आबादी को अवसर और संरक्षण की जरूरत है। जगदेव बाबू इसी 90 प्रतिशत उपेक्षित और कमजोर तबके के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए शहीद हुए थे।
उन्होंने कहा कि साधारण परिवार से आने वाले जगदेव बाबू शिक्षा के महत्व को भली-भांति समझते थे और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के “शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो” के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे। उनका सपना था कि गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के घरों में खुशहाली आए और समाज का प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित बने।
80 साल बाद भी शोषण के स्वरूप बदले, समस्या नहीं
कुशवाहा ने कहा कि आजादी के आठ दशक बाद भी देश में शोषण, दमन और उत्पीड़न पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। केवल इसके स्वरूप में बदलाव आया है। सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई को आगे बढ़ाना ही जगदेव बाबू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
नेपाल से आए पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्रियों सहित विभिन्न वक्ताओं ने भी जगदेव बाबू के संघर्ष और विचारों पर प्रकाश डाला।
स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक वर्मा ने कहा कि जगदेव बाबू ने हर तरह के शोषण और उपेक्षा का विरोध किया तथा पिछड़े और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सत्ता में आने वाली सरकारों से एक बड़ी भूल हुई कि स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सेनानी परिवारों की अपेक्षित सुधि नहीं ली गई। सेनानी परिवारों को राष्ट्रीय परिवार का दर्जा मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अब भी सरकार यदि सेनानी परिवारों की समस्याओं का समाधान करे तो उनके साथ न्याय हो सकता है और वर्षों की उपेक्षा की भरपाई की जा सकती है।
पत्रकार इंतजारुल ने कहा कि भारत विभिन्न रंगों और विविधताओं से भरा फूलों का गुलदस्ता है। संविधान ने सभी जाति, वर्ग और धर्म के लोगों को समान अधिकार दिए हैं। जगदेव बाबू ने इसी अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ी थी। उनके त्याग और बलिदान का बिहार हमेशा ऋणी रहेगा।
समारोह को मदन पटेल, शैलेश कुशवाहा, अक्षय कुशवाहा, रामचंद्र, नेपाल के पूर्व सांसद, भिखारी पासवान, अनिल जोशी, मनोहर साह, ढाका, रामबाबू, कल्याण नेपाल, शंभू, राधेश्याम, रामबाबू प्रसाद, कौशल यादव, जंग बहादुर पूर्व मुखिया सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
कार्यक्रम के अंत में पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह कुशवाहा ने समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं पत्रकारों को मोमेंटो और शॉल देकर सम्मानित किया। समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
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