मुजफ्फरपुर। मुरौल प्रखंड के बखरी में फाइलेरिया मरीजों के बेहतर प्रबंधन और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से ‘रोगी हितधारक मंच’ के सदस्यों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में 25 सदस्यों ने भाग लिया, जिन्हें फाइलेरिया के लक्षणों की पहचान और मरीजों की देखरेख के लिए प्रशिक्षित किया गया।
विशेषज्ञों ने दिए टिप्स:
प्रशिक्षण के दौरान डब्ल्यूएचओ की जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. माधुरी देवराजू ने सदस्यों को एमएमडीपी (मोर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन) के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे मंच के सदस्य अपने क्षेत्र में फाइलेरिया प्रभावित लोगों को चिन्हित कर उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचाने में मदद कर सकते हैं।
प्रमाण-पत्र और पेंशन की सुविधा:
स्वास्थ्य टीम की सक्रियता से अब तक 12 फाइलेरिया मरीजों का दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बन चुका है। इनमें से 2 मरीजों को सफलतापूर्वक पेंशन का लाभ मिलना भी शुरू हो गया है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अभी कई अन्य मरीजों की सूची तैयार की जा रही है ताकि उन्हें भी सरकारी सहायता का लाभ जल्द से जल्द मिल सके।
टीम वर्क का दिख रहा असर:
इस पूरी मुहिम को धरातल पर उतारने में सीएचओ नवनीत कुमार, डब्ल्यूएचओ की टीम, एएनएम, आशा और जीविका की एलएफ के साथ-साथ ‘रोगी हितधारक मंच’ के सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। कार्यक्रम के दौरान सीएचओ नवनीत कुमार ने कहा कि फाइलेरिया मरीजों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल से मरीजों के बीच विश्वास बढ़ा है और उन्हें अब उचित चिकित्सा परामर्श आसानी से मिल पा रहा है।
34