कालाजार उन्मूलन में सीतामढ़ी फिर बना प्रदेश का ‘मॉडल जिला’

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  • कालाजार मुक्ति के दस्तावेजीकरण में जिला बना रोल मॉडल
  • कालाजार उन्मूलन में सीतामढ़ी के मॉडल को अपनाएंगे अन्य जिले
  • डॉ. राजेश पाण्डेय ने सराहा सीतामढ़ी का प्रबंधन, बोले- यहाँ के दस्तावेज सबसे सुव्यवस्थित
सीतामढ़ी: कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम में सीतामढी फिर बना माॅडल जिला। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य समन्वयक डॉ राजेश पाण्डेय ने ‘राजेन्द्र मेमोरियल रिसर्च आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के सभागार मे अपने व्याख्यान के दौरान दी। उन्होंने दृश्य-श्रव्य माध्यम से कालाजार उन्मूलन पश्चात डोजियर की तैयारी को लेकर आयोजित सभा मे हाल ही मे विश्व स्वास्थ्य संगठन के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ पल्लिका सिंह द्वारा बिहार के विभिन्न जिलों के भ्रमण पश्चात सौंपे गये प्रतिवेदन को दिखाते हुए कहा कि डोजियर की तैयारी सीतामढ़ी मे लगभग पूरी हो गई है और वहाँ सभी दस्तावेज सुसज्जित और सुव्यवस्थित हैं। अन्य जिलों को भी इससे बहुत मदद मिलेगी और इससे बिहार का पूरा डोजियर बनाने मे कामयाबी मिलेगी।
विदित हो कि कालाजार उन्मूलन के क्षेत्र में सीतामढ़ी सदैव अग्रणी रहा है और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तत्कालीन अपर निदेशक डॉ जी एस सोनल की अनुशंसा पश्चात वर्ष 2013 से ही कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु माॅडल जिला रहा है और डॉ रवीन्द्र कुमार यादव के नेतृत्व मे किए गये नवाचारी प्रयोगों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर सराहा गया है। सीतामढ़ी ने जो एक समय कालाजार से अति प्रभावित था, वर्ष 2018 मे कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है और लगातार उन्मूलन की स्थिति को बनाये रखते हुए निरंतर मरीज की संख्या मे कमी लाने में सफल रहा है।
1299 से 4 मरीजों तक का सफर:
​सीतामढ़ी का कालाजार के विरुद्ध संघर्ष काफी लंबा और सफल रहा है। आंकड़ों के अनुसार ​वर्ष 2011 में जिले में कालाजार के कुल 1299 मरीज थे। वर्ष 2025 में निरंतर प्रयासों के चलते मरीजों की संख्या घटकर मात्र 4 रह गई है। ​सीतामढ़ी की इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत और नवाचार शामिल है। डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव के नेतृत्व में यहाँ किए गए प्रयोगों को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है।
जिले में हर्ष का माहौल:
​उन्मूलन के दस्तावेजीकरण में सीतामढ़ी को पुनः मॉडल जिला घोषित किए जाने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और जिले के निवासियों में खुशी की लहर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तत्परता से कार्य जारी रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब बिहार पूरी तरह से कालाजार मुक्त घोषित कर दिया जाएगा।
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