फाइलेरिया उन्मूलन: जिले में शीघ्र होगा नाइट ब्लड सर्वे

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  • रात 8 से 12 बजे के बीच लिया जाएगा नमूना, हर साइट से 300 ब्लड सैंपल होगा संग्रह 
  • माइक्रो फाइलेरिया दर 1 प्रतिशत या अधिक होने पर चलेगा सर्वजन दवा सेवन अभियान
बेतिया : जिले में फाइलेरिया के संभावित मरीजों की पहचान करने को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है। सभी 18 प्रखंडों के चिह्नित साइटों का डाटा तैयार किया जा रहा है, नाइट ब्लड सर्वे अभियान को संचालित करने के पूर्व जिला स्तर पर मेडिकल कॉलेज बेतिया में लैब टेक्निशियन का प्रशिक्षण कराया जा चुका है। इस सम्बन्ध में जिले के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रमेश चंद्रा ने बताया कि चयनित प्रखंडों में एक स्थाई एवं एक अस्थाई साइट का चयन करते हुये प्रत्येक साइट से 300 स्लाइड का संग्रहण करना है। नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम के सफल संचालन एवं क्रियान्वयन हेतु प्रत्येक साइट पर अलग अलग दलों का गठन किया जाना है। उन्होंने बताया कि जाँच स्थल पर बीसीएम/बीएचएम, सीएचओ/जीएनएम, भीबीडीएस, कैंप इंचार्ज एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहेंगे। साथ ही संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता/आँगनवाड़ी, सेविका मोबिलाइजर के रूप में कार्य करेंगी। जल्द ही जिले में नाईट ब्लड सर्वे कार्यक्रम की शुरूआत होगी।
रात के 08 से 12 बजे तक लिए जाते हैं रक्त के नमूने: 
जिले के भीबीडीएस प्रकाश कुमार ने बताया कि इस अभियान में रक्त के नमूने रात 8 से 12 बजे तक लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि रात में सैंपल लेने का मुख्य कारण है कि इस समय शरीर में फाइलेरिया के परजीवी ज्यादा एक्टिव रहते हैं। ब्लड सैंपल कलेक्शन के बाद 24 घंटे के अन्दर स्टैनिंग की प्रक्रिया को करा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जाँच के दौरान माइक्रो फाइलेरिया दर 1 प्रतिशत या अधिक होने पर सर्वजन दवा सेवन अभियान की शुरुआत की जाएगी। जिसमें 2 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को अल्बेंडाजोल एवं डीईसी की गोली आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में खिलाई जाएगी।
फाइलेरिया के लक्षण:
. कई दिन तक रुक-रुक कर बुखार आना।
. शरीर में दर्द एवं लिम्फ नोड (लसिका ग्रंथियों) में सूजन।
. हाथ, पैरों में सूजन (हाथी पांव) एवं पुरुषों के अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसिल)।
. महिलाओं के ब्रेस्ट में सूजन, पहले दिन में पैरों में सूजन रहती है और रात में आराम करने पर कम हो जाती है।
. संक्रमित व्यक्ति में बीमारी के लक्षण पांच से 15 साल तक में दिख सकते हैं।
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