- रांची से बोकारो जा रहा था 1100 पेटी शराब से भरा ट्रक, रामगढ़ और हजारीबाग के टोल प्लाजा पार करने के बाद गायब हुआ वाहन
- पुराने कुख्यात शराब माफियाओं की भूमिका की भी हो जांच, रामगढ़ में पहले शराब तस्करी के मामलों में जेल जा चुके लोगों के नेटवर्क को खंगालने की जरूरत
- रामगढ़ और हजारीबाग के पुराने शराब तस्करी नेटवर्क की निष्पक्ष जांच इस पूरे मामले के खुलासे में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है
रामगढ़: झारखंड में अवैध शराब के कारोबार और शराब माफियाओं के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राजधानी रांची के तुपुदाना औद्योगिक क्षेत्र स्थित अजंता बॉटलर्स एंड ब्लेंडर्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री से सरकारी गोदाम के लिए निकला करीब 80 लाख से एक करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी शराब से लदा ट्रक रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गया है। ट्रक में रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स नंबर-1 ब्रांड की कुल 1100 पेटी शराब लदी थी। हैरानी की बात यह है कि ट्रक ने रामगढ़ और हजारीबाग के टोल प्लाजा पार किए, लेकिन इसके बाद न तो वाहन का कोई सुराग मिला और न ही चालक का। चालक का मोबाइल फोन भी बंद बताया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रक संख्या JH01CA-8807 को रांची के तुपुदाना स्थित शराब फैक्ट्री से बोकारो स्थित झारखंड स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के सरकारी गोदाम में शराब पहुंचाने के लिए रवाना किया गया था। निर्धारित मार्ग पर चलते हुए ट्रक ने 29 और 30 अक्टूबर की मध्यरात्रि करीब 1:30 बजे रामगढ़ टोल प्लाजा पार किया। इसके बाद तड़के लगभग 3:30 बजे हजारीबाग के नगवां टोल प्लाजा से भी वाहन के गुजरने की जानकारी सामने आई। लेकिन इसके बाद ट्रक कहां गया, शराब कहां उतारी गई और चालक किस दिशा में गया, इन सवालों का जवाब अब तक सामने नहीं आया है।
रामगढ़ के पुराने शराब माफियाओं का नेटवर्क भी जांच के दायरे में आए!
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू रामगढ़ और हजारीबाग के पुराने शराब तस्करी नेटवर्क की संभावित भूमिका को लेकर है। इन दोनों जिलों में पूर्व में शराब के अवैध कारोबार और तस्करी से जुड़े कई मामले सामने आते रहे हैं। खासकर रामगढ़ जिले में पूर्व में शराब तस्करी के मामलों में गिरफ्तार होकर जेल जा चुके लोगों और उनसे जुड़े पुराने नेटवर्क की गतिविधियों की भी पुलिस को पड़ताल करनी चाहिए।
क्या करोड़ों रुपये की शराब से लदे ट्रक को रास्ते में ही किसी संगठित नेटवर्क ने गायब कर दिया? क्या ट्रक के रूट, समय और शराब की खेप की जानकारी पहले से किसी को थी? क्या इस पूरे घटनाक्रम में पुराने शराब तस्करों के नेटवर्क की कोई भूमिका है? ये ऐसे सवाल हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
रामगढ़ में पूर्व में शराब के अवैध कारोबार में संलिप्त रहे और जेल जा चुके लोगों की पुरानी गतिविधियों, आपसी संपर्कों तथा संभावित नेटवर्क की जांच भी इस मामले में अहम कड़ी साबित हो सकती है। हालांकि, फिलहाल किसी व्यक्ति या गिरोह की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस को इस संभावित पहलू को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
रामगढ़ से हजारीबाग तक ट्रक के सफर की कड़ी जोड़ना जरूरी
ट्रक के रामगढ़ और हजारीबाग के टोल प्लाजा पार करने का रिकॉर्ड जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस को टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज, वाहन की आवाजाही के समय, जीपीएस लोकेशन, ट्रांसपोर्टर के रिकॉर्ड और चालक के मोबाइल की तकनीकी जांच के जरिए ट्रक की अंतिम गतिविधियों का पता लगाना चाहिए। साथ ही यह भी जांच जरूरी है कि ट्रक निर्धारित मार्ग से कहीं दूसरी दिशा में तो नहीं मुड़ा था।
यदि ट्रक को योजनाबद्ध तरीके से गायब किया गया है, तो इसमें वाहन की गतिविधियों और शराब की खेप की जानकारी रखने वाले लोगों की भूमिका भी जांच का विषय बन सकती है।
तुपुदाना ओपी में प्राथमिकी, पुलिस जांच में जुटी
बताया गया है कि ट्रांसपोर्टर की ओर से तुपुदाना ओपी में ट्रक और शराब की खेप गायब होने को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब देखना होगा कि जांच की दिशा केवल ट्रक और चालक की तलाश तक सीमित रहती है या शराब तस्करी के पुराने नेटवर्क और संभावित संगठित गिरोहों तक भी पहुंचती है।
फिलहाल करीब एक करोड़ रुपये की शराब से लदे ट्रक का रहस्यमय तरीके से गायब होना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। इस मामले का खुलासा केवल गायब वाहन की बरामदगी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शराब की खेप को गायब करने के पीछे यदि कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है तो उसकी पूरी कड़ी उजागर होनी चाहिए। **रामगढ़ और हजारीबाग के पुराने शराब तस्करी नेटवर्क की निष्पक्ष जांच इस पूरे मामले के खुलासे में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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