वाह रे शिक्षा विभाग : 60 लाख की अवैध निकासी- ACS सी.के. अनिल की सख्ती के बीच बड़े अफसरों को बचाने की सुगबुगाहट, आरडीडीई के ‘गोल-मटोल’ जवाब से उठे गंभीर सवाल

Live News 24x7
7 Min Read

Live News 24×7 के लिए मोतिहारी से कैलाश गुप्ता.

मोतिहारी : पूर्वी चंपारण शिक्षा विभाग की जिला कार्यालय में सामने आए 60 लाख रुपये से अधिक के बहुचर्चित अवैध निकासी ने प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। शिक्षा विभाग के नए अपर मुख्य सचिव (ACS) सी.के. अनिल के सख्त रुख के बाद मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है, लेकिन इस प्रकरण में उच्चाधिकारियों की संदिग्ध चुप्पी और गोल-मटोल जवाब ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

1. क्या है पूरा घोटाला और कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?

अवैध निकासी की अवधि: जून 2024 से सितंबर 2026 के बीच HRMS (Human Resource Management System) पोर्टल के साथ सोची-समझी साजिश के तहत छेड़छाड़ की गई।

2. फर्जीवाड़े का तरीका :

सरकारी खजाने से कुल ₹60,57,158 की भारी-भरकम राशि एक शिक्षक और एक ऑपरेटर के द्वारा चुपचाप अपने तथा अपने परिवार के सदस्यों (पत्नी व माता आदि) के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई।

3. एफआईआर और इनाम :

नगर थाने में कांड संख्या 1054/26 दर्ज कर मदरसा शिक्षक मो. इमादुद्दीन शाबिर उर्फ बेताब और HRMS ऑपरेटर अमन कुमार को नामजद किया गया है। दोनों फरार आरोपियों पर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

4. आरडीडीई (RDDE) के ‘टाल-मटोल’ जवाब से गहरी हुई शंका :

इस वित्तीय अनियमितता को लेकर जब क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RDDE), तिरहुत प्रमंडल, समर बहादुर सिंह से पक्ष जाना गया, तो उनका रुख स्पष्ट और पारदर्शी होने के बजाय पूरी तरह टाल-मटोल नजर आया। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े और गंभीर वित्तीय गबन पर वरिष्ठ अधिकारियों का ऐसा टाल-मटोल वाला रवैया इस बात को बल देता है कि निचले स्तर के कर्मचारियों को आगे कर बड़े चेहरों को बचाने का खेल खेला जा रहा है।

5. ‘मेकर, चेकर और अप्रूवर’ की चेन और बड़े अफसरों की संलिप्तता :

सरकारी राशि निकासी की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया में केवल ‘मेकर’ (लिपिक/ऑपरेटर) ही सब कुछ नहीं करता है, बल्कि भुगतान के लिए ‘मेकर, चेकर और अप्रूवर’ की त्रि-स्तरीय व्यवस्था होती है। हर फाइल और बिल इन तीनों चरणों से गुजरने के बाद ही पास होती है, जिसमें डीपीओ (स्थापना) जैसे सक्षम अधिकारी की संस्तुति शामिल होती है।
जब यह अवैध खेल जून 2024 में शुरू हुआ था, तब तत्कालीन डीपीओ (स्थापना) के पद पर साहेब आलम तैनात थे (जो फिलहाल अररिया के जिला शिक्षा पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित हैं)। सवाल यह है कि दो साल से अधिक समय तक बिना ‘मेकर, चेकर और अप्रूवर’ के स्तर पर मिलीभगत या घोर लापरवाही के क्या इतने बड़े पैमाने पर सरकारी धन की अवैध निकासी संभव थी?

6. ACS सी.के. अनिल की सख्त कार्यशैली पर टिकी उम्मीदें :

अपनी बेबाक और कड़क प्रशासनिक छवि के लिए चर्चित ACS सी.के. अनिल के खुद एक्शन मोड में आने से भ्रष्ट तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है। अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह जांच केवल कुछ कंप्यूटर ऑपरेटरों और शिक्षकों की गिरफ्तारी तक सिमट कर रह जाएगी, या इस वित्तीय भ्रष्टाचार को परोक्ष या अपरोक्ष रूप से संरक्षण देने वाले बड़े ओहदेदारों पर भी कानून का शिकंजा कसेगा?

7. भागलपुर के DPO को हो चुकी है जेल :

ऐसे ही एक मामला गत दिनों भागलपुर जिले में हुई थी जिसमें जहाँ जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शशि चन्दन चौधरी को HRMS के माध्यम से फर्जी तरीके से एक फर्जी शिक्षक को वेतन भुगतान करने के परिप्रेक्ष्य में जिले के जोगसर थाना कांड संख्या 198/26 दिनांक 8.10. 26 में दर्ज प्राथमिकी के अलोक में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी चदन कुमार को निलंबित कर दिया गया है.

8. मोतिहारी में किस कर्मी-अधिकारी के आईडी से हुई निकासी?

क्या जिला शिक्षा पदाधिकारी ने दो छोटे कर्मियों पर केस दर्ज करा कर बचने की कोशिश की है. लेकिन सवाल यह है कि कंप्यूटर ऑपरेटर और शिक्षक किसके आईडी के माध्यम से निकासी कर रहा था. शिक्षक इमादुद्दीन शाबिर उर्फ बेताब एवं उसकी पत्नी और कंप्यूटर ऑपरेटर अमन कुमार एवं उसकी मां का वेतन आईडी किसके आदेश से बना? उस समय (2024) में कौन कर्मी मेकर-चेकर और कौन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एप्रुवर थे? तब से लेकर अब तक जितने मेकर-चेकर और अप्रुवर बने, वो पूर्णरूपेण शक के दायरे में हैं.

9. तत्कालीन डीपीओ साहेब आलम की भूमिका संदिग्ध :

बताया जाता है कि HRMS के तहत वेतन निकासी की जो व्यवस्था है, उसमें सरकारी कर्मी (लिपिक) मेकर की भूमिका में होता है. निकासी की अनुमति एप्रुवर देते हैं. यानि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना एप्रुवर की भूमिका में होते हैं. जून 2024 से अवैध तरीके से वेतन निकासी का खेल शुरू हुआ है. उस समय डीपीओ स्थापना के पद पर साहेब आलम पदस्थापित थे. बताया जाता है कि साहेब आलम की आरोपी मदरसा शिक्षक इमादुद्दीन शाबिर उर्फ बेताब जिस पर अवैध निकासी के आरोप हैं, उससे गहरा संबंध था.

उनके कार्यकाल में ही इमादुद्दीन शाबिर की जिला शिक्षा कार्यालय में प्रतिनियुक्ति हुई थी. तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना साहेब आलम जो वर्तमान में जिला शिक्षा पदाधिकारी अररिया के पद पर पदस्थापित हैं तथा इनके बाद से अबतक कुल दो और अधिकारी प्रभार में रह चुके है जिसमें अखिल वैभव तथा गोपाल कृष्ण का नाम शामिल है.

वहीं वर्तमान में ब्रजेश कुमार पदस्थापित है. अब देखना यह है कि जिम्मदार अधिकारीयों व कर्मियों पर कार्रवाई होती है या जाँच की खानापूर्ति कर ही मामले को दबा दिया जाता है.

418
Share This Article
Leave a review

Leave a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *