गया जी। भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान एवं शिक्षित बचपन अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गया के तत्वावधान में महावीर मध्य विद्यालय, गया जी में बाल अधिकार, सुरक्षित बचपन एवं बच्चों की सुरक्षा को लेकरएकमहत्वपूर्ण विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यालय के छात्र-छात्राओं को उनके मौलिक अधिकारों, कानूनी संरक्षण, बाल सुरक्षा तथा किसी भी प्रकार के शोषण एवं उत्पीड़न से बचाव के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों अपर जिलासत्र न्यायाधीश सह पास्कोश्रीं देव प्रिया कुमार अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद सहित उपस्थित मंचासीन ने दीप प्रज्वलित कर शुभारम किया गया। इसके पश्चातविद्यालयकेप्रधानाध्याक एवं विद्यालय परिवार की ओर से उपस्थित अतिथियों का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण एवं जागरूकतापूर्ण वातावरण देखने को मिलाछात्र-छात्राओं ने भी इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर सहभागिता की। कार्यक्रम में उपस्थित न्याय धीश महोदय श्री देव प्रिया कुमार जी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे देश के भविष्य हैं और उनके सुरक्षित, शिक्षित एवं स्वस्थ वातावरण में विकास की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है। बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे किसी भी प्रकार के अन्याय, शोषण अथवा उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज उठा सकें। बच्चों को बाल अधिकारों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य एवं बेहतर वातावरण में जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव, हिंसा, शोषण अथवा दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि यदि उनके साथ या उनके आसपास किसी अन्य बच्चे के साथ गलत व्यवहार होता है, तो उसे छिपाने के बजाय अपने माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। जागरूकता और समय पर उचित कदम उठाना बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।कार्यक्रम में उपस्थित अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने बच्चों को विशेष रूप से लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) के विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों को लैंगिक अपराधों, यौन उत्पीड़न, अश्लील गतिविधियों में शामिल करने तथा उनके शोषण से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस कानून के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को संरक्षण प्रदान किया गया विद्यार्थियों को सरल एवं सहज भाषा में समझाया कि किसी भी व्यक्ति को बच्चों के साथ गलत तरीके से छूने, अनुचित व्यवहार करने, डराने-धमकाने अथवा किसी प्रकार का यौन शोषण करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें असहज महसूस कराता है, गलत तरीके से छूता है, किसी अनुचित गतिविधि में शामिल करने का प्रयास करता है अथवा किसी बात को गुप्त रखने के लिए दबाव बनाता है, तो बच्चों को बिना डरे इसका विरोध करना चाहिए और तत्काल अपने अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। बच्चों को यह समझना होगा कि उनके शरीर, सम्मान एवं निजता का अधिकार महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार के अपराध की स्थिति में चुप रहना समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए बच्चों को निडर होकर अपनी बात रखनी चाहिए। पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत पीड़ित बच्चों की पहचान एवं गरिमा की सुरक्षा के लिए भी विशेष कानूनी प्रावधान किए गए हैं।बाल सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 तथा आपातकालीन सहायता के लिए 112 की जानकारी भी बच्चों के लिए उपयोगी है।कार्यक्रम के अंत मेंरोहित कुमार उमेश राम हारून रसीद विद्यालयकेप्रधानाध्यापक डॉ बिपिन कुमार अमरेंद्र कुमार सिवाशीष बनर्जी मनोज कुमार राजेश कुमार श्रीवास्तव कुमारी अनिता सिन्हा सुनीता कुमारी शाहिना परवीन नूरजहां नगमा बेगम निगार फातिमा परिवार की ओर से उपस्थित सभी न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया
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