क्या छूने से भी फैलता है टीबी? फेफड़ों को छलनी करने वाली इस बीमारी को लेकर न पालें भ्रम

Live News 24x7
4 Min Read

विश्व क्षय रोग दिवस (World TB Day) के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने टीबी को लेकर समाज में फैली गहरी भ्रांतियों पर चिंता जताई है। अक्सर देखा जाता है कि घर में किसी सदस्य को टीबी होने पर लोग उसे अछूत समझने लगते हैं या उससे हाथ मिलाने और छूने से भी डरते हैं। लेकिन क्या वाकई टीबी छूने से फैलता है? चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, इस तरह का डर न केवल गलत है बल्कि मरीज के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। आइए, हेल्थ एक्सपर्ट्स से जानते हैं टीबी के फैलने का असली तरीका और इससे जुड़ी वे सावधानियां जो आपको और आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती हैं।

छूने से नहीं, ‘हवा’ से फैलता है संक्रमण

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि टीबी (Tuberculosis) एक संक्रामक रोग जरूर है, लेकिन यह छूने, हाथ मिलाने, साथ बैठने या कपड़े साझा करने से बिल्कुल नहीं फैलता। टीबी मुख्य रूप से एक ‘एयरबोर्न’ (Airborne) यानी हवा के जरिए फैलने वाली बीमारी है। जब फेफड़ों की टीबी से पीड़ित मरीज खांसता, छींकता या जोर से बोलता है, तो उसके मुंह और नाक से सूक्ष्म बूंदें (Droplets) निकलकर हवा में तैरने लगती हैं। यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति उसी हवा में सांस लेता है, तो टीबी के बैक्टीरिया उसके फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं।

किन अंगों को प्रभावित करता है टीबी?

टीबी का सबसे सामान्य रूप ‘पल्मोनरी टीबी’ (Pulmonary TB) है, जो सीधे फेफड़ों पर हमला करता है। हालांकि, टीबी शरीर के अन्य अंगों जैसे हड्डियों, लिम्फ नोड्स, मस्तिष्क और किडनी में भी हो सकता है। राहत की बात यह है कि फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों वाली टीबी (Extra-pulmonary TB) आमतौर पर संक्रामक नहीं होती, यानी वह एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलती।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

टीबी की पहचान समय पर होना बेहद जरूरी है। यदि आपको या आपके किसी करीबी को नीचे दिए गए लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

तीन हफ्ते या उससे अधिक समय तक लगातार खांसी रहना।

बलगम के साथ खून आना।

शाम के समय हल्का बुखार आना और रात में पसीना आना।

बिना किसी कारण के तेजी से वजन कम होना।

सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ।

टीबी मरीज के साथ कैसे बरतें सावधानी?

मरीज को अलग-थलग करने के बजाय, वैज्ञानिक तरीके से सावधानी बरतें:

मास्क का प्रयोग: मरीज को खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल या मास्क रखने को कहें।

वेंटिलेशन: मरीज के कमरे में खिड़कियाँ खुली रखें ताकि ताजी हवा और धूप आती रहे। धूप टीबी के बैक्टीरिया को मारने में सहायक होती है।

इलाज की निरंतरता: टीबी का इलाज (DOTS) बीच में न छोड़ें। इलाज शुरू होने के 2-3 हफ्ते बाद मरीज से संक्रमण फैलने का खतरा काफी कम हो जाता है।

खान-पान: मरीज को प्रोटीन युक्त आहार दें ताकि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ सके।

भ्रम दूर करें, मरीज का साथ दें

टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। सही समय पर दवा और सही पोषण से इसे पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। समाज में टीबी के मरीजों के प्रति भेदभाव खत्म करना अनिवार्य है। मरीज को परिवार के प्यार और सहयोग की जरूरत होती है, न कि सामाजिक बहिष्कार की। याद रखें, टीबी का बैक्टीरिया कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को जल्दी निशाना बनाता है, इसलिए खुद को स्वस्थ रखें और डरे नहीं।

1
Share This Article
Leave a review

Leave a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *