अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में एलपीजी की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है, जिसे रोकने के लिए सरकार ने बुकिंग के नियमों में फिर से बदलाव किया है।
अब ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर लेने के बाद अगला सिलेंडर 45 दिन बाद बुक किया जा सकेगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि यह फैसला सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज करने और बेवजह होने वाली पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए किया है।
वही आपको बता दे कि 6 दिनों में सिलेंडर बुकिंग के नियम में तीन बार बदलाव किया गया है।
6 मार्च को घरेलू एलपीजी बुकिंग के लिए लॉक-इन पीरियड 21 दिन किया गया। इससे पहले बुकिंग को लेकर ऐसा कोई नियम नहीं था।
9 मार्च को अचानक डिमांड बढ़ने की वजह से तेल कंपनियों ने शहरों में लॉक-इन पीरियड बढ़ाकर 25 दिन किया।
वही 12 मार्च को ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर बुक करने का गैप 20 दिन से बढ़ाकर 45 दिन किया गया, ताकि सिलेंडर की सप्लाई मैनेज की जा सके।
गांवों में औसतन एक परिवार सालभर में करीब 5 सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है। ऐसे में जल्दी दोबारा बुकिंग की जरूरत नहीं पड़ती थी। हाल ही में देखा गया कि लोग अफवाहों की वजह से जरूरत न होने पर भी जल्दी-जल्दी सिलेंडर बुक करके स्टॉक कर रहे थे।
मंत्रालय की ओर से बताया गया कि जो लोग पहले औसतन 55 दिनों में सिलेंडर बुक कराते थे, उन्होंने अचानक 15-15 दिनों के अंतर पर बुकिंग शुरू कर दी थी। इस तरह की एडवांस और जल्दबाजी में की जा रही बुकिंग से सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा था।
वही एलपीजी की किल्लत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एलपीजी को लेकर कुछ लोग जानबूझकर डर फैला रहे हैं और इससे फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपना एजेंडा चलाना चाहते हैं, लेकिन संकट के समय इस तरह का माहौल देश के लिए नुकसानदायक होता है।
प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि एलपीजी की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
आगे उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात चुनौतीपूर्ण हैं और युद्ध की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा संकट की स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में देश को शांति और धैर्य के साथ परिस्थितियों का सामना करना होगा। संकट के समय हर किसी की जिम्मेदारी होती है। इसमें चाहे वह राजनीतिक दल हों, मीडिया हो, सामाजिक संस्थाएं हों या फिर गांव और शहर के लोग।
प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब पूरा देश एकजुट होकर काम करता है तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आसान हो जाती है। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने एक और चुनौती है और इसे भी हमें मिलकर ही पार करना होगा।
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