अरुणाचल सीमा पर चीन की नई चाल 450 से ज्यादा शियोकांग गांव बसाए, क्या सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर है ड्रैगन की नजर

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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया रिपोर्ट्स और भारतीय सेना के अधिकारियों के बयानों से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास 450 से ज्यादा ‘शियोकांग’ (Xiaokang) यानी मॉडल गांव बसा लिए हैं। यह सिर्फ रिहाइशी इलाके नहीं हैं, बल्कि रणनीतिक रूप से भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

क्या हैं ये ‘शियोकांग’ गांव और भारत के लिए क्यों हैं चिंता का विषय?

चीन पिछले कुछ सालों से अपनी सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के नाम पर इन गांवों का निर्माण कर रहा है। ‘शियोकांग’ का अर्थ होता है ‘खुशहाल गांव’। कहने को तो यहां नागरिक रहते हैं, लेकिन सैन्य जानकारों का मानना है कि इन गांवों का इस्तेमाल दोहरे मकसद के लिए किया जा सकता है।

दोहरी सैन्य चौकियां: इन गांवों में पक्की सड़कें, बिजली और इंटरनेट जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं। युद्ध जैसी स्थिति में ये गांव चीनी सेना के लिए लॉजिस्टिक हब या फॉरवर्ड बेस का काम कर सकते हैं।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर खतरा: सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि चीन की ये बस्तियां भारत के ‘चिकन नेक’ यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के काफी करीब हैं। यह वही पतला रास्ता है जो उत्तर-पूर्वी राज्यों (Seven Sisters) को बाकी भारत से जोड़ता है।

भारतीय सेना की तैयारी: ‘ब्रह्मास्त्र’ से देंगे जवाब

भारतीय सेना की चिनार कोर के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इस स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना चीन की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रही है।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: चीन के जवाब में भारत ने भी अपना ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ शुरू किया है। इसके तहत सीमावर्ती भारतीय गांवों में बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है ताकि वहां से पलायन रुके और स्थानीय लोग सीमा की सुरक्षा में ‘प्रथम रक्षक’ की भूमिका निभा सकें।

आधुनिक हथियारों की तैनाती: LAC पर भारत ने अपनी आर्टिलरी और सर्विलांस सिस्टम को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर लिया है। सड़कों और टनल का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है ताकि जरूरत पड़ने पर सैनिकों को तेजी से मूव किया जा सके।

चिकन नेक पर क्यों टिकी है चीन की निगाहें?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए सामरिक रूप से सबसे संवेदनशील हिस्सा है। अगर चीन इस हिस्से में कोई हलचल करता है, तो भारत का संपर्क अपने पूर्वोत्तर राज्यों से कट सकता है। यही वजह है कि डोकलाम विवाद के बाद से भारत ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और खुफिया तंत्र को कई गुना बढ़ा दिया है।

चीन की इस ‘गांव बसाओ’ नीति को वैश्विक स्तर पर उसकी विस्तारवादी सोच का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, भारतीय सेना की सतर्कता और सरकार के सीमा बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स ने चीन को कड़ा संदेश दिया है कि भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।

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