फाइलेरिया मुक्ति की ओर बढ़ता बिहार: संक्रमण दर में गिरावट और जन भागीदारी से मिली बड़ी सफलता

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  • 2026 में फाइलेरिया की दर 1.24 प्रतिशत पर पहुंची
  • मिस्ड एरिया के ग्राफ में भी आयी गिरावट 
पटना। बिहार में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत पिछले चार वर्षों के आंकड़े एक सकारात्मक बदलाव की कहानी बयां करते हैं। साल 2023 में राज्य की माइक्रो फाइलेरिया दर 1.56% थी, जो साल 2024 में घटकर 1.52%, 2025 में 1.48% और अब साल 2026 में 1.24% पर आ गई है। इसी अवधि के दौरान एमडीए  की रिपोर्टेड कवरेज में भी लगातार सुधार देखा गया है, जो 2023 के 76% से बढ़कर 2025 में 83% तक पहुँच गई है। साथ ही, अभियान से छूटे हुए क्षेत्रों यानी ‘मिस्ड एरिया’ के ग्राफ में भी बड़ी गिरावट आई है; यह 2023 के 14% से घटकर अब मात्र 9.8% रह गया है, जो यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अब अधिक प्रभावी हुई है।
सफलता के पीछे की कार्यप्रणाली और बेहतर प्रथाएं
अभियान की सफलता के लिए ‘सुकृत्या’ ऐप के माध्यम से दैनिक कवरेज रिपोर्टिंग की गई ताकि वास्तविक समय में प्रगति का पता चल सके। माइक्रोप्लानिंग के तहत 3 दिनों की बूथ गतिविधि और उसके बाद 14 दिनों तक घर-घर जाकर दवा खिलाने का सघन अभियान चलाया गया। कठिन भौगोलिक क्षेत्रों और विशेष समूहों जैसे ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों, जेल के कैदियों, सीआरपीएफ कैंपों और घुमंतू समुदायों के लिए विशेष मोबाइल टीमों का गठन किया गया ताकि कोई भी दवा के सेवन से वंचित न रहे। इसके अलावा, जीविका दीदियों, स्थानीय प्रभावशाली लोगों और मशहूर हस्तियों के सहयोग से जन-जागरूकता फैलाकर दवाओं के प्रति लोगों के डर को दूर किया गया।
एमडीए 2024-25 की उपलब्धियां और रणनीतिक स्तंभ 
एमडीए 2024-25 के दौरान निगरानी और प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। इस अवधि में 90% से अधिक सुपरवाइजरी विजिट सुनिश्चित की गई और आंकड़ों की सत्यता की जांच के लिए 10% से अधिक घरों की रैंडम रेंक-चेकिंग  की गई। मरीजों की सेवा के लिए 100% एमएमडीपी  किट का वितरण भी सुनिश्चित किया गया। इस पूरे अभियान को ‘सिक्स-पिलर’  रणनीति पर आधारित रखा गया, जिसमें उच्च स्तरीय राजनीतिक प्रतिबद्धता, साक्ष्य आधारित योजना, स्वास्थ्य कर्मियों का क्षमता निर्माण, सशक्त निगरानी, सामुदायिक भागीदारी और व्यापक सूचना-प्रसार  शामिल थे।
सीएचओ-पीएसपी नवाचार से आई सामाजिक क्रांति:
सिफार के तकनीकी सह्रोग से गठित सीएचओ-पीएसपी ( रोगी हितधारक मंच ) आयुष्मान आरोग्य मंदिर को माध्यम बनाकर पंचायत स्तर पर फ़ाइलेरिया उन्मूलन अभियान को जन-जागरूकता की क्रांति का रूप दे रहा है. सीएचओ के नेतृत्व में बने रोगी हितधारक मंच के सदस्य जिनमे फ़ाइलेरिया रोगी भी शामिल हैं, अपनी बीमारी के अनुभव लोगों से साझा कर उन्हें दवा खाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. रिफ्युजल को दूर कर लोगों को दवा खाने के लिए तैयार करने में रोगी हितधारक मंच के सदस्यों की सराहनीय भूमिका रही है. मसौढ़ी प्रखंड के रेवा पंचायत के मुखिया राम कृपाल प्रसाद बताते हैं कि मंच से जुड़कर उन्होंने फ़ाइलेरिया की गंभीरता को जाना और अपने पंचायत में लोगों को संचालित एमडीए अभियान के दौरान दवा खाने के लिए राजी कर रहे हैं. आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बाजिदपुर, पुनपुन के सीएचओ-पीएसपी सदस्य एवं फ़ाइलेरिया मरीज सावित्री देवी ने बताया कि फ़ाइलेरिया एक अभिशाप है जिसके साथ उन्होंने अपना जीवन गुजारा है. अब उनका प्रयास है कि अभियान के दौरान उनके पंचायत के ज्यादा से ज्यादा लोग आगे आकर दवा खाएं और इस खतरनाक बीमारी से सुरक्षित रहें.
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