माइक्रोफाइलेरिया रेट 2.5, कटरा को छोड़ सभी प्रखंडों में होगा सर्वजन दवा सेवन अभियान

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  •  एमडीए/आइडीए के पूर्व तैयारियों पर जिला टीओटी का हुआ आयोजन
  • जनप्रतिनिधि व अन्य विभागों से सहयोग लेने की अपील
  • जिले में फाइलेरिया के 17038 चिन्हित मरीज
मुजफ्फरपुर। नवंबर में हुए नाइट ब्लड सर्वे के अनुसार जिले का माइक्रोफाइलेरिया रेट 2.5 है। एक प्रतिशत से अधिक माइक्रोफाइलेरिया रेट के होने के कारण इस बार जिले के 15 प्रखंड और 4 शहरी क्षेत्र के 19 आईयू में एमडीए/आइडीए अभियान चलेगा। वहीं कटरा का माइक्रोफाइलेरिया रेट एक से कम होने के कारण इस बार वहां प्री टास एक्टिविटी होगी। ये बातें शनिवार को जिला ट्रेनिंग आफ ट्रेनर्स (टीओटी) के प्रशिक्षण में सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार ने कही।
प्रशिक्षण के दौरान जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सुधीर ने मेडिकल आफिसर, बीएचएम, बीसीएम, भीबीडीएस, डीईओ (यूपीएचसी) और सहयोगी संस्थाओं को निर्देश दिया कि प्रखंड को ट्रेनिंग मेटेरियल पहले ही मेल के द्वारा भेजा जा चुका है। प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण प्रोजेक्टर/आडियो और वीडियो माध्यम से प्रदर्शित कर प्रशिक्षित करें। एक्शन प्लान तथा माइक्रोप्लान दिए गए समय सीमा तक हर प्रखंड देना सुनिश्चित करेंगे, ताकि आईसी मेटेरियल का उठाव समय पर हो पाए। इस वर्ष कराए गए नाइट ब्लड सर्वे में बांद्रा प्रखंड में सबसे ज्यादा माइक्रोफाइलेरिया रेट 6.63 रहा। जिले में कुल 17038 फाइलेरिया के चिन्हित मरीज है जिसमें हाथ में 2376, पैर में 12146 और 2516 हाइड्रोसिल के मरीज हैं।
डीपीएम रेहान अशरफ ने बताया कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की देखरेख में स्वास्थ्य प्रबंधक, बीसीएम एवं अन्य संबंधित अपने अपने प्रखंडों का एमडीए/आइडीए पर्यवेक्षण कार्य करेंगे। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल प्रशिक्षुओं से सामाजिक जागरूकता पे चर्चा करते हुए जनप्रतिनिधि, स्कूल, जीविका समूह तथा समाज कल्याण विभाग एवं अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जागरुक करने अपील की।
ट्रिपल ड्रग थेरेपी का रखा तकनीकी पक्ष:
प्रशिक्षण के दौरान डब्लूएचओ जोनल कॉर्डिनेटर, डॉ माधुरी देवराजु ने जिले में होने वाले ट्रिपल ड्रग थेरेपी में शामिल दवा आइवर मेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल की खुराक और डोज पोल के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावे डॉ माधुरी ने दवा खाने से इंकार करने वाले रिफ्यूजल को कैसे ब्रेक किया जाए, के बारे में विस्तार से बताया। गर्भवती, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को दवा नहीं देनी है। उन्होंने दवा खिलाने के बाद लाभार्थी के घर पर मार्किंग करने के तकनीकी पक्ष को भी बताया।
मौके सिविल सर्जन, एसीएमओ, डीपीएम, डीभीबीडीसीओ, डब्ल्यूएचओ जोनल कोओर्डिनेटर डॉ माधुरी देवराजु, पिरामल डीएल इफ्तिखार अहमद खान, सीएफएआर डीसी नीतू कुमारी सहित सभी प्रखंड के एमओआईसी, बीएचएम, बीसीएम और भीबीडीएस मौजूद थे।
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