ब्रिटिश हुकूमत काल के समय का जेल और सेल,यह मोतिहारी के मुंशी सिह महाविद्यालय परिसर में अभी भी मूल स्वरूप में है 

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अशोक  वर्मा

मोतिहारी : स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को सबक सिखाने यातनाये देने के उद्देश्य से ब्रिटिश हुकूमत ने मोतिहारी स्टेशन के पश्चिम दिशा स्थल पर जेल और सेल का निर्माण किया साथ-साथ इसके बगल में फांसी घर भी बनाया। वह सब स्थल आज भी अंग्रेजों के क्रूर अत्याचार के दास्तान को  सुना रहे है।इस जेल में हमारे महान स्वतंत्रता सेनानी लंबे समय तक यातनाएं सही थी, देश के लिए अपनी जवानी और सब कुछ कुर्बान किया था। कई सेनानी इस परिसर में बने फांसी घर में फांसी के फंदे पर लटक गए थे। उनके त्याग तपस्या और बलिदान पर ही हमें आजादी मिली लेकिन आजादी को चंद लोगों ने अपने कब्जे में कर लिया और देश की बड़ी आबादी आज भी अभाव में जी रही है। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति एक बार नए सिरे से उन सेनानियों को याद कर रही है,उन्हे सम्मान देकर गौरांवित हो रही है तथा सरकार से मांग कर रही है कि सेनानी परिवार को देश का प्रथम परिवार का दर्जा दे।सभी अभावग्रस्त सेनानी परिवार को सरकार राहत दे, सभी स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारियों को पेंशन के साथ ट्रेन और बस यात्रा फ्री करे।  किसी भी सरकारी , प्रशासनिक और व्यक्तिगत समस्या को प्राथमिकता के आधार पर सरकार समाधान करें,परिवार के सदस्यो की चिकित्सा की व्यवस्था करें। यह तमाम सुविधा लेने का हक सेनानी परिवार का बनता है। सेनानियो  ने जब अपने जीवन के बहुमूल्य  समय को राष्ट्र के लिए कुर्बान कर दिया  जिसका सीधा असर  आज उनके परिवार के लोगो पर पडा और सदस्य दुख झेल रहे हैं।इन सबके बावजूद  सेनानी परिवार के लोगों को कोई भी ग्लानी नहीं है बल्कि वे गौरवान्वित महसूस करते हैं और गर्व से कहते हैं कि हम स्वतंत्र सेनानी के वंशज हैं। आज ज्यादातर सेनानी के वंशजो की उम्र60- 70 और 80 वर्ष की हो चुकी हैं, उन्हें चाहिए सरकारी सहयोग। सरकार के लोगो को सेनानी के ऋण से मुक्ति के लिए जितना  हो सके उस परिवार को सुविधा देनी चाहिए ।स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक वर्मा ने  मोतिहारी के मुंशी सिंह कॉलेज परिसर के उस जेल और सेल का अवलोकन किया जहां परिवार के महान सेनानियो ने यातनाये सही थी ।उन्होने सरकार से मांग की  कि सेनानी परिवार की शुधी देर से ही सही अब भी ले ताकि सेनानियों के कर्ज से वे  मुक्त हो सके।

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