वाह रे शिक्षा विभाग : मोतिहारी Deo-Dpo की कार्यशैली पर सवाल, करोड़ों की हेरा-फेरी मामला को दबाने में जुटा विभाग, स्कूलों की मरम्मती के नाम पर करीब 11 करोड़ की अवैध निकासी का है आरोप

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Live News 24x7 के लिए मोतिहारी से कैलाश गुप्ता की रिपोर्ट। 

मोतिहारी। जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी के पदस्थापन के उपरांत पुनः एक बार फिर कार्यालय एक कर्मी व पदाधिकारी व वरीय लिपिकों के बीच जहाँ आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ वही कई शिक्षकों ने भी लिपिक के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया गया था। लिपिक व अधिकारी के बीच जहां पत्रों का वार हुआ वही शिक्षकों के साथ सोशल मीडिया पर वाक युद्ध का दौर चला। दोनों तरफ से गालियों की बौछार की गई, लेकिन आजतक जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री गिरी की ओर से किसी प्रकार की कारवाई नहीं की गई, जबकि ऐसा कृत एक सरकारी कर्मी और शिक्षकों के आचरण के प्रतिकूल है। ऐसे में जिला शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा किसी प्रकार से संज्ञान नही लेना इनके कार्य कुशलता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

डीईओ राजन गिरी के बाद अब तीन लिपिकों के निलंबन की मांग एक लिपिक ने किया ACS से, ACS को लिखे पत्र को किया सार्वजनिक, कहा है मर्डर व गबन के आरोपी सहित अवैध लिपिक बने है महत्वपूर्ण पद पर

वहीं हाल ही में जिले के 260 विद्यालयों में बिना मरम्मती कार्य किये लगभग 11 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। जब मामला एक वेब न्यूज चैनल व समाचार पत्रों के माध्यम से उजागर हुआ तो मात्र चार-पांच विद्यालयों की जांच कराकर कागजी खानापूर्ति कर दी गई। वही कई संवेदकों ने आनन-फानन में प्रधानाध्यापक व अधिकारियों के मेल में मरम्मती का कार्य शुरू भी करवा दिया जो गबन का पूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।

वही उक्त मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के राज्य निदेशक के द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी से गत दिनांक 8 सितम्बर 25 को पत्र देकर संबंधित विद्यालयों में कराए जा रहे कार्यों पर रोक लगाने और चिन्हित सभी विद्यालयों की जांच कराने की मांग की गई है जो लगभग 20 दिन के बाद भी जिला शिक्षा पदाधिकारी व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना के द्वारा संज्ञान नही लिया गया और उक्त आवेदन को भी एक लिपिक के द्वारा दबाने का प्रयास किया जा रहा है जबकि जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री गिरी द्वारा आवेदन पर अति आवश्यक का मार्किंग भी किया गया है। जब इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी से कार्यालय में उपस्थित नहीं होने के कारण मोबाइल पर वार्ता करने का प्रयास किया परंतु मोबाइल रिसीव करना इन्हे उचित नहीं लगा ………

क्या है पूरा मामला-

विदित हो कि बिहार के एक नामचीन वेब चैनल (fbjh.In)  के द्वारा गबन के मामले का समाचार अपने चैनल पर प्रमुखता से बार-बार प्रसारित कर विभाग को सचेत किया जाता रहा है, प्रसारित खबर जो इस प्रकार है-👇🏿👇🏿👇🏿👇🏿

हमाम में सब नंगे हैं..? मोतिहारी के स्कूलों में चवन्नीका काम नहीं और करोड़ों की निकासी के खेल में डीपीओ-जेई-डीएमटीशामिल ! BSEIDC की भूमिका भी संदिग्ध, इन प्रखंडों में बड़ा घोटाला.

मोतिहारी में सरकारी स्कूलों की मरम्मति के नाम पर करोड़ों की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। जेई से लेकर डीएमटी, डीपीओ और BSEIDC के अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है.  

बिहार में भ्रष्टाचार के गंदे खेल में नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारी शामिल हैं. सेटिंग ऐसी तगड़ी होती है कि बिना काम के ही भुगतान हो जाता है. हद तो तब हो जाती है जब खुलासे के बाद भी अधिकारी चुप हो जाते हैं. सिर्फ जिला के ही नहीं, बल्कि राज्य मुख्यालय के अधिकारी भी मौन साध लेते हैं. मतलब साफ है….बहती गंगा में नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारी डुबकी लगाते हैं. शिक्षा विभाग में इन दिनों यही हो रहा है. जिला स्तर पर कागज पर काम करा कर करोड़ों का बिल बना, जिसका भुगतान शिक्षा विभाग के बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम से कराया गया है. मोतिहारी के तुरकौलिया व अन्य ब्लॉक के सरकारी स्कूलों की मरम्मति के नाम पर 4-5 करोड़ की अवैध निकासी के खुलासे के बाद भी न तो जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कार्रवाई की और न निगम ने. घोटाले को लेकर मोतिहारी डीईओ-डीपीओ से लेकर निगम की चुप्पी सवालों के घेरे में है. कहा जाता रहा है कि करोड़ों की निकासी के खेल में जिला स्तर पर जेई-डीएमटी-डीपीओ और राज्य स्तर पर BSEIDC के अधिकारी शामिल हैं. BSEIDC के अधिकारियों ने जांच की बात कही, जांच की बात तो दूर, खुलासे के बाद भी बिना जांच कराये ही फाइल पर भुगतान करने की खबर आ रही है.

घोटाले में जेई से लेकर डीएमटी-डीपीओ सबकी भूमिका संदिग्ध

पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) में सरकारी स्कूलों में मरम्मति के नाम पर बड़ा खेल हुआ है. कहा जा रहा है कि सर्व शिक्षा अभियान का एक जेई पूरे खेल का मास्टर माइंड है. उसी जेई ने डीएमटी से लेकर पूरे सिस्टम को सेट किया है. सूत्र बताते हैं कि उक्त जेई ने डीएमटी से लेकर डीपीओ तक को शामिल किया है. ठेकेदार से मिलीभगत पर उक्त जेई ने सरकारी स्कूलों में मरम्मति का काम कागज पर कराकर मोटी रकम की निकासी करा ली. उक्त जेई जो पूर्वी चंपारण के दो प्रखंडों के प्रभार में है, उसने दूसरे प्रखंडों के लगभग 600 फाइल पर काम कराकर राशि की निकासी कराई या कराने के प्रयास में है. सूत्र बताते हैं कि 122 फाइल पटना स्थित BSEIDC कार्यालय पहुंची है. जिस पर राशि भुगतान कराने का प्रयास जारी है, वो भी बिना जांच पड़ताल कराये ही. इस संबंध में हमने मोतिहारी के उप प्रबंधक तकनीकी (डीएमटी) पूर्वी चंपारण मुकुंद प्रसाद से सवाल पूछा. उनसे पूछा गया कि मोतिहारी में यह क्या खेल चल रहा है? आपके यहां से कैसे सरकारी स्कूलों में बिना काम के ही करोड़ों की राशि की फाइल तैयार करा कर पटना से भुगतान कराया जा रहा है ? क्या यह माना जाए कि इस पूरे खेल में आपकी भी भूमिका है?  कुछ दिन पहले जो 122 फाइल भुगतान के लिए पटना भेजी गई है,उसकी जांच करा लिए हैं? तुरकौलिया व अन्य प्रखंडों में चवन्नी का काम नहीं और करोड़ों की निकासी, इसपर आपका क्या कहना है?  खबर में आपका पक्ष चाहिए. लेकिन मुकुंद प्रसाद ने कोई जवाब नहीं दिया. मतलब साफ है हमाम में सब नंगे हैं. 16 सितंबर को हमने शिक्षा विभाग के BSEIDC के अधिकारियों से बात की थी. BSEIDC के अधिकारी मो. शहजाद ने बताया था कि 2 अगस्त के बाद जिला से डायरेक्ट फाइल नहीं भेजी जा रही है. क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक के एप्रुवल के बाद ही यहां से भुगतान होना है. व्यवस्था बदल गई है. उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के बाद अब तक तीन जिलों से फाइल आई है. उसमें मोतिहारी नहीं है. उन्होंने कहा था कि मोतिहारी में हुए खेल के बारे में जानकारी है. उनसे पूछा गया कि मोतिहारी से 120 से अधिक फाइल भुगतान के लिए BSEIDC कार्यालय पटना भेजी गई है, बैक डेट में राशि निकासी का प्रयास जारी है. इस पर उन्होंने कहा कि अब जांच के बाद भुगतान होगा. हालांकि अधिकारी भले ही जांच के बाद भुगतान करने की बात कह रहे, लेकिन जो खबर है वह यह की अब भी पुराने फार्मूले पर ही राशि निकासी की कोशिश जारी है. तुरकौलिया बालक के प्रिसिंपल भी हतप्रभ हैं. विनोद भगत ने बताया कि उनके यहां काम नहीं हुआ है. उन्हें तो पता भी नहीं है कि मरम्मति के नाम पर इतनी बड़ी राशि (लगभग 5 लाख) की निकासी हो गई है. उन्होंने सूचना देने के लिए शुक्रिया अदा किया. यूएमएस निमुइया के प्रिंसिपल श्रीलाल प्रसाद ने कहा कि संग्रामपुर में बिना काम किए राशि निकासी की खबर के बाद यहां भी काम शुरू हुआ है. पिछले हफ्ते से यहां काम कराया जा रहा है. उन्हें भी पता नहीं कि महीनों पहले बिल बन गया और राशि की भी निकासी हो गई. जानकारी मिलने के बाद वे भी आश्चर्य में पड़ गए.

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कारनामे जान लें….

पूर्वी चंपारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने 260 स्कूलों की एक लिस्ट तैयार की थी. यह लिस्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी के पत्र के आलोक में तैयार कर BSEIDC के उप प्रबंधक तकनीकी पूर्वी चंपारण को भेजी गई। लिस्ट में राशि भुगतान को लेकर विद्यालय की सूची संलग्न की गई थी. जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना ने 12 अप्रैल 2025 को उप प्रबंधक तकनीकी बीएसईडीसी को पत्र लिखा था. जिसमें कहा था कि जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 10 अप्रैल 2025 को असैनिक योजनाओं से संबंधित सूची उपलब्ध कराने का कहा था. इस आलोक में वित्तीय वर्ष 2024- 25 के वैसे सभी असैनिक योजना का भुगतान किया जाना है. इस संबंध में क्रमांक 1 से 260 तक एजेंसी वार सूची संलग्न कर भेजी जा रही है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने वैसे सरकारी स्कूल जहां मरम्मति के काम हुए थे, से संबंधित विपत्र जिनका भुगतान 25 मार्च 2025 के बाद नहीं हो सका था, उसकी सूची भेजी थी. जिन 260 स्कूलों की सूची जहां काम के बदले भुगतान करना था, लिस्ट में तुरकौलिया के 29 स्कूल हैं.

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