महात्मा गांधी के प्रपोत्र तुषार गांधी को किया गया अपमानित, पंचायत भवन में संबोधन से रोका गया 

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अशोक वर्मा

मोतिहारी : अपने परदादा महात्मा गांधी के नक्शे कदम पर चलते हुए प्रपौत्र तुषार गांधी तीन दिवसीय चंपारण यात्रा की शुरुआत 11 जुलाई को ऐतिहासिक भितिहरवा गाँधी आश्रम पश्चिम चंपारण से किया।यात्रा के उद्देश्य पर उन्होंने बताया कि आज देश में अघोषित आपातकाल है ,सत्ताधारी तानाशाह के मार्ग पर चल रहे है, यह दौर काफी खतरनाक है। आम लोगों मे जागरूकता लानेने के उद्देश्य से  हम लोग चंपारण के दौरे पर आए हुए है। बेतिया और छपवा की सभा मे उन्होंने स्पष्ट कहा कि बदलो बिहार बनाओ नई सरकार के सिद्धांत पर बिहार वासियों को चलना चाहिए । बिहार में महात्मा गांधी की नीति और सिद्धांत सबको साथ ले चलो लागू होना चाहिए बिहार और देश में नफरत नहीं  प्यार और मोहब्बत तथा आपसी एकता होनी चाहिए ।बेतिया और छपवा  के बाद रविवार को पूर्वी चंपारण के ऐतिहासिक स्थल तुरकौलिया नीम के पेड के पास उनका आगमन हुआ। सर्वप्रथम उन्होंने गांधी की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और उस नीम के पेड़ को देखा जहां पर अंग्रेज नीलहे चंपारण के किसानों को बांधकर कोड़े से मरते थे। तुषार गांधी के साथ आई हुई टीम मे विजय प्रताप, डाक्टर  सुनील,चंद्रमाडी आदि साथ थे ।सभी उस नीम के पेड़ को देख भाउक हुए। वह पेड अंग्रेजों के क्रूर दमन के गवाह थे ।वहां से टीम के सभी लोग पंचायत भवन पहुंचे जहां पर टीम के सभी लोगो का स्वागत किया गया  लेकिन अचानक कार्यक्रम में व्यवधान हुआ ।जैसे ही दिल्ली से पधारे विजय प्रताप ने  कहा कि इस यात्रा का उपदेश तानाशाही प्रवृत्ति पर रोक लगाना है, नफरत फैलाने वालों को सत्ता से हटाना है वैसे ही स्थानीय मुखिया ने इसका जोरदार विरोध किया और बात करते-करते तू तू मैं मैं पर बात हो गई । सभा में दो पक्ष बन गया एक तुषार गांधी के पक्ष में खड़ा हुआ दूसरा पक्ष  मुखिया के पक्ष में चला गया। स्थिति ऐसी हो गई कि सभा भवन मे तुषार गांधी का संबोधन  नहीं हो सका और  टीम के साथ तमाम स्थानीय समर्थक बाहर निकल गये।तुषार गांधी ने नुक्कड पर संबोधित किया। अपने संवोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 1917 में चंपारण आ कर सफल सत्याग्रह आंदोलन चलाया था उनको भी चंपारण में ब्रिटिश हुकूमत ने 144 धारा लगाकर रोक लगा दिया था और बापू ने एक अपना बयान कोर्ट में पढ़ा था आज मैं देश की वर्तमान स्थिति से बहुत व्यथित हूं और समान विचारधारा के लोगों के साथ चंपारण दौर पर आया हूं आम लोगों को जागरूक करना हमारा उद्देश्य  है।भारतीय संस्कृति  और लोकतांत्रिक व्यवस्था में तानाशाह प्रवृत्ति नहीं चल सकती है। आज बिहार में भाजपा के हाथ कठपुतली बनी नीतीश सरकार भटकाव की शिकार है ,इसका विरोध करना हमारे इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। बिहार में चुनाव होने वाला है और यही मौका है कि जो लोग अभी सत्ता में है उन्हें फिर हम सत्ता में आने से रोके ।                   मौके पर उपस्थित गांधी स्मारक स्तंभ के सचिव अधिवक्ता विनय सिह ने कहा कि जिस तरह से तुषार गाँधी  को अपमानित किया गया वह  निंदनीय हैं ।चंपारण की संस्कृति अतिथि देवो भव की है लेकिन स्थानीय मुखिया ने जो हरकत किया है अपने आप में काफी निंदनीय है। चंपारण में गांधी के नाम से प्रसिद्ध  रंजीत गिरी जो घटना के समय वहां मौजूद थे ने जमकर विरोध  किया , बताया कि आज जिस तरह से तुषार गांधी को रोका  गया और उन्हें अपमानित किया गया हम लोग इससे काफी लज्जित है लेकिन यह अपमान निश्चित रूप से रंग लाएगा और इसका प्रतिकार हम लोग बड़े पैमाने पर करेंगे। मौके पर उपस्थित कई पत्रकार लोगों ने भी उस मुखिया के व्यवहार को रयरोकने की कोशिश  की लेकिन उसने किसी की बात को नही माना।  गांधीजी को भी लोगों ने 1917 में अपमानित किया था आज उनके पर प्रपौत्र को भी लोगों ने अपमानित किया , यह घटना कुछ ना कुछ रंग लाएगा और चंपारण की धरती से एक नया आंदोलन का शंखनाद होगा ।
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