स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति सेनानी उत्तराधिकारियो के लिए समर्पित, बढी है सेनानी और शहीद परिवारों का विश्वास

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अशोक  वर्मा
मोतिहारी : समिति के राष्ट्रीय  महासचिव  जितेन्द्र  रघुवंशी का सेनानी परिवार के प्रति गहरी संवेदनशीलता आज आधार स्तंभ बनी स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवार और उत्तराधिकारी समिति के आगे बढने का। चंद वर्षो मे यह संस्था देश मे वट वृक्ष का रूप ले ली।प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को दस मिनट सेनानी और शहीदो के नाम का अनोखा कार्यक्रम की चर्चा है देश मे।                                     हरिद्वार में 13-14 अप्रैल 2018 में स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के हितों की रक्षा के लिए एक छोटी सी शुरुआत की गई थी, हमने विधिवत देश में स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के नाम से बने कई संगठन के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था, जिसमें 18 प्रान्तों के लगभग एक हजार उत्तराधिकारी तथा 57 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, वीरांगनाओं ने भागीदारी की थी। इस आयोजन में विभिन्न संगठनों की कार्य पद्धति से निराश सेनानी शहीद परिवारों ने हम पर विश्वास किया, हमारे संगठन से जुड़ते गए और कारवां बढ़ता गया। हरिद्वार में रोपित पौधे को 6-7 मई 2022 के इन्दौर राष्ट्रीय सम्मेलन में अनेकानेक बाधाओं के बावजूद खाद पानी मिला और एक विशाल वटवृक्ष बनने की दिशा में चल पड़ा। इन्दौर के कार्यक्रम में ही वहाँ उपस्थित 20 प्रान्तों के संगठन के प्रतिनिधियों में से राष्ट्रीय समन्वय समिति बनाने की घोषणा हुई और 12 जून 2022 में प्रथम 51 सदस्यीय राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक देहरादून के बीजापुर गेस्ट हाउस में आशातीत सफलताओं के साथ सम्पन्न हुई, जिसमें आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर 75 सदस्यीय राष्ट्रीय समन्वय समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया। समन्वय समिति के सदस्यों में इतना अधिक उत्साह था कि तत्काल ही दिल्ली में 75 सदस्यीय राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित करने के लिए कहा गया।
         4 अगस्त 2022 को दिल्ली के कान्स्टीट्यूशन क्लब दिल्ली में दूसरी राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित हुई। इतनी बड़ी संख्या में देश के 22 प्रान्तों के प्रतिनिधियों को देखकर पचासों सालों से स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से संगठन बनाकर सेनानी परिवारों के हितैषी बनने वालों को अच्छा नहीं लगा। कुछ लोगों के दबाव से न चाहते हुए भी कुछ ऐसे लोगों को समन्वय समिति में स्थान देना पड़ा था जो या तो किसी राष्ट्रीय संगठन से आर्थिक भ्रष्टाचार के कारण निष्कासित किए गए थे, या अपने अपने प्रान्तों में बदनामी का दंश झेल रहे थे। इन्हीं में से 2-3 महत्वाकांक्षी सदस्यों ने अपनी ढपली अपना राग अलापना शुरू कर दिया। यहीं से लेटर हेड पर बिना सदस्यों की सहमति के नाम छापकर एक संगठन संचालित होने लगा और तरह तरह के भ्रम फैलाने लगा।
        इसके बाद ही 9 अगस्त 2022 को टाउन हॉल देहरादून में उत्तराखण्ड के स्वतंत्रता सेनानी परिवारों का प्रान्तीय सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। इसके तुरंत बाद ही 10-11 अगस्त में रायपुर छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसने सेनानी परिवारों में नया जोश भर दिया। देशभर से संकल्प पत्र भरकर कैम्प कार्यालय प्रज्ञाकुंज, हरिद्वार भेजने की बाढ़ जैसी आ गई।
       अक्टूबर माह में उत्तर प्रदेश के सेनानी शहीद परिवारों ने भी हुंकार भरी और 29 अक्टूबर 2022 में सेनानी सदन में प्रदेश के कोने कोने से भाई बहनों को आमंत्रित किया गया। इस कार्यक्रम से पूर्व पचासों वर्षों से सेनानी परिवारों के मसीहा बने एक उत्तरप्रदेश के ही एक भाई ने हमसे फोन पर कहा कि उत्तरप्रदेश में कार्यक्रम रखने के लिए आपने हमसे पूछा क्यों नहीं? हम ऐसी भाषा सुनकर आश्चर्यचकित थे, कि किसी प्रदेश में यदि सेनानी परिवारों की कोई बैठक करनी है तो सेनानी परिवारों के तथाकथित मसीहा से क्या अनुमति लेनी पड़ेगी? खैर, लखनऊ की यह बैठक सेनानी परिवारों को उत्साहित करने में सफल हुई। इसके तत्काल बाद ही 12-13 नवम्बर 2022 में ही बहराइच में श्री रमेश कुमार मिश्रा जी द्वारा उस क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों शहीदों के जीवन परिचय से सम्बन्धित स्मारिका विमोचन का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें कई प्रान्तों के पदाधिकारियों की भी भागीदारी रही। यहीं पर दिसम्बर माह में जंतरमंतर नई दिल्ली में सीमित संख्या में भारत सरकार द्वारा सेनानी परिवारों की उपेक्षा के विरोध में आंशिक धरना प्रदर्शन करने का निश्चय किया गया।
         17 दिसम्बर को प्रेस क्लब नई दिल्ली में पत्रकार वार्ता की गई और विधिवत 19 दिसम्बर को जंतरमंतर नई दिल्ली में आंशिक धरना प्रदर्शन की घोषणा की गई। इसमें प्रत्येक राज्य से सीमित संख्या में ही भाई बहनों को पहुंचने का आग्रह किया गया था, लेकिन वहाँ तो अप्रत्याशित संख्या में भाई बहन पहुँच गए। अपना अधिकार पत्र भारत सरकार को सौंपा गया, जिसके कुछ बिन्दुओं अमृत महोत्सव में स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों को मोमेंटो देकर सम्मानित करने, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का इतिहास संस्कृति मंत्रालय की बेवसाइट पर अपलोड करने तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम हर तहसील, ब्लाक स्तर पर शिलापट्ट लगाने के कार्य किए भी गए, किन्तु महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया।
          इसके बाद उड़ीसा प्रवास में जनवरी 2023 में भुवनेश्वर जाने का सुअवसर मिला। 7 जनवरी 2023 को कटक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मस्थली के दर्शन का सौभाग्य मिला, यहीं पर स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों को एक सूत्र में पिरोने का *हर महीने प्रथम रविवार 10 बजे 10 मिनट स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के नाम* अभियान का संकल्प उभरा और वहीं से इस अभियान की घोषणा भी की गई। उड़ीसा के *अमर शहीद श्रुति विश्वाल* के शहीद स्थल के भी दर्शन किया।
          5 फरवरी 2023 रविवार से विधिवत अपने पदाधिकारियों ने इस अभियान को गति देना आरम्भ किया और 15 जून 2023 में गुवाहाटी असम *अमर शहीद कुशल कोंवर* के शहीदी दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन की हुंकार ने उपस्थित प्रतिनिधियों में नए जोश का संचार किया। इसी का परिणाम है कि आज देश भर के लगभग 300 जिलों में *हर महीने प्रथम रविवार 10 बजे 10 मिनट स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के नाम* अभियान के अन्तर्गत ध्वजारोहण, राष्ट्रगीत का गायन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों को पुष्पांजलि तथा किसी एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी या शहीद का जीवन परिचय सुनाने का क्रम निरन्तर चल रहा है, इस अभियान ने संगठन के महत्व को स्वीकार करते हुए संयुक्त शक्ति से अपने अधिकारों को हस्तगत करने का विश्वास जगाया है। इस अभियान की समीक्षा के लिए ही 17 सितम्बर 2023 को अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय अतिथि गृह में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के पदाधिकारियों की बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें हर महीने प्रथम रविवार के अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने वालों को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया।
           इसके बाद 21 अक्टूबर 2023 को कलबुर्गी कर्नाटक में संगठन के तत्वावधान में सम्मेलन आयोजित किया गया। तत्पश्चात विभिन्न प्रान्तों में स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों की जगह जगह बैठकों का क्रम आरम्भ हुआ, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश तथा उत्तरप्रदेश में चौरीचौरा सहित सेनानी शहीद परिवारों को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए पराक्रमी भाई बहनों ने अपना पुरुषार्थ दिखाया। अपनी संयुक्त शक्ति का एहसास कराने के लिए 3 फरवरी 2024 में डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर नई दिल्ली में हमारे संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री द्विजेन्द्र मोहन शर्मा जी, गुरुग्राम के हमारे संगठन सचिव श्री कपूर सिंह दलाल जी तथा संयुक्त सचिव श्री गणेश माधवन जी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में जिस तरह सेनानी शहीद परिवारों का सैलाब उमड़ा, उससे यह विश्वास और भी अधिक बढ़ा कि हर महीने प्रथम रविवार के अभियान को देश भर में किस रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
        8-9 अगस्त 2024 में गुवाहाटी असम में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा निर्धारित की जानी थी, संयोग से 14-15 सितम्बर 2024 में हरिद्वार में ही राष्ट्रीय सम्मेलन कराने की सहमति बनी और इस अवधि में हरिद्वार में विशाल राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ, इसमें भारत सरकार के मंत्री की भी सहभागिता रही, उनके माध्यम से भी भारत सरकार को अपना अधिकार पत्र प्रेषित किया गया। इसमें सम्मिलित 18 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को उत्तराखंड सरकार ने राजकीय अतिथि घोषित करके उनकी सम्पूर्ण व्यवस्था राज्य सरकार ने की। इस सम्मेलन में हर महीने प्रथम रविवार अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पराक्रमी भाई बहनों को सम्मानित किया गया।
        8 दिसम्बर को पुनः राष्ट्रीय कार्यकारिणी की समीक्षा बैठक श्री परमजीत सिंह टिवाना जी के माध्यम से गुरुद्वारा रकाबगंज में आयोजित की गई, जिसमें हर प्रान्त में सेनानी परिवारों की प्रान्तीय बैठक आयोजित करने का निश्चय किया गया, 29 दिसम्बर को छतरपुर मध्यप्रदेश, 23 मार्च को चौरीचौरा, 7 अप्रैल को सतना मध्यप्रदेश एवं 8 अप्रैल को सिरमौर, रीवा में आयोजित सेनानी शहीद परिवारों की बैठकें इतिहास सृजन की दिशा में सेनानी शहीद परिवारों को बढ़ाने में अतीव उपयोगी सिद्ध हुई हैं।
       अब स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की आगामी बैठक 14 सितम्बर 2025 को दिल्ली में प्रस्तावित है, जिसमें संगठन के आगामी क्रिया कलापों का निर्धारण होगा। इसी के साथ 25-26 अक्टूबर 2025 में पंजाब में आयोजित होने वाले *स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवार राष्ट्रीय सम्मेलन* की रूपरेखा का निर्धारण किया जाएगा, इस सम्मेलन में  *हर महीने प्रथम रविवार 10 बजे 10 मिनट स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के नाम* अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पराक्रमी भाई बहनों को सम्मानित भी किया जाएगा।
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