अशोक वर्मा
सोनपुर : नगर के कुमहर टोली अंग्रेजी बाजार में संचालित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र द्वारा ब्रह्माकुमारीज की यज्ञ माता मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की साठवीं स्मृति दिवस बड़े ही आत्मिक भाव से मनाया गया। सेवा केंद्र पर 12 घंटे का योग भट्ठी का आयोजन किया गया । सेवा केंद्र प्रभारी बीके रीमा बहन ने योग विधि पर विस्तार से बताया।योग के बीच बीच मे उन्होने कई विषयो पर वर्ग भी चलाया। उन्होंने कमेंट्री द्वारा योग की गहन अनुभूति भी कराया।भट्ठी समापन पर मुरली चली फिर मम्मा को भोग स्वीकार कराया गया। उपस्थित सभी भाई बहनों ने मम्मा के चित्र पर पुष्प अर्पण कर उन्हें नमन किया ,दृष्टि ली तथा मम्मा समान बनने का संकल्प लिया ।मम्मा की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए सेवा केंद्र प्रभारी बीके रीमा बहन ने कहा कि मम्मा गुणो की खान थी उन्होने हमेशा हांजी का पार्ट बजाया। कभी भी किसी भी बात में अनिश्चय नहीं हुआ। हमेशा बाबा के बातो को परमात्मा की बात माना। 17 वर्ष की राधे नामक कन्या यज्ञ में आई और आते ही यज्ञ में समर्पित होकर यज्ञ की मां बन गई। अपने गुण,व्यवहार और पालना के बदौलत राधे सबकी मां बन गई। सभी उन्हें बड़े प्यार से मम्मा कहते थे ।यहां तक की ब्रह्मा बाबा एवं उनकी युगल जसोदा माता भी उन्हें मम्मा ही कहते थे। मम्मा का पुरुषार्थ इतना तीव्र एवं उत्कृष्ट था कि बहुत कम समय में ही संपूर्णता को प्राप्त किया । 24 जून 1965 को उन्होंने इस शरीर को छोड़ बाबा की गोद में अगले पार्ट हेतु चली गई। मम्मा ने यज्ञ की पालना अपने जिस विशेष गुणो के बदौलत की उसी के ही बदौलत ब्रह्मकुमारी का ज्ञान प्रकाश आज पूरे विश्व में फैल रहा है। मम्मा आधार स्तंभ बनी ।मम्मा सभी बच्चों को बहुत प्यार करती थी,उनके अंदर कभी भी जरा भी गुस्सा नही आया। रीमा बहन ने कहा कि आज के दिन सभी ब्रह्मा वत्सो को खुद को मम्मा के दर्पण मे देखना चाहिए कि मै मम्मा समान कितना बन पाई हू? फिर अपने पुरुषार्थ के गति को तेज करना होगा ।उक्त अवसर पर काफी भाई-बहन उपस्थित थे जिसमें मुख्य रूप से बीके रविंद्र भाई ,बीके बेबी बहन ,बीके मीणा बहन ,बीके हरिंदर भाई, बीके चंद्र भूषण भाई, बीके शिवपरसन, बीके रंभा बहन,बीके शांति माता,बीके फुल मति माता, बीके कविता बहन ,बीके नीतू बहन ,बीके असुही कुमारी ,अदिती कुमारी के अलावा अन्य काफी भाई-बहन उपस्थित थे।
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