अशोक वर्मा
मोतिहारी : लग रहा है कि प्रकृति पूर्वी चंपारण से पूरी तरह नाराज है ।एक तरफ जहां चारों तरफ बरसात हो रही है वहीं दूसरी तरफ पूर्वी चंपारण के किसान वारिस के लिए आकाश की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
बहुत से किसान धान के बिचड़ा भी नहीं गिरा पाये हैं। जिन्होंने निजी नलकूप के द्वारा किसी तरह पटवन करके बिया गिराये हैं उनके बीचडे सुख चुके हैं । वर्षा न होने के कारण आम के पेड़ भी तेजी से सूख रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति तो यह है कि पानी का लेवल 20 फीट नीचे चले जाने से जिले के आधे चापाकल सूख चुके हैं। किसान जब पटवन के लिए बोरिंग चालू कर रहे हैं तो उनके बोरिंग से कहीं कहीं पानी नही निकल रहा है। अजीब स्थिति बन गई है, चारों तरफ भय का माहौल है ।गर्मी से वैसे हीं सभी बेहाल है।किसान सशंकित है कि हमारा भविष्य क्या होगा ।सबसे बुरा हाल तो मध्यम और छोटे किसानों का है । यद्यपि सरकार उन्हें राशन दे रही है लेकिन खेती पर जो निर्भर है उनके समक्ष विकट समस्या उत्पन्न हो गई है।सरकार के विफलता को आम जनता देख और भूगत रही है। कहीं से भी कोई काम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है, सिर्फ कागज और अखबारों में बयानबाजी भर है। जिले में नहर के जाल बीछे हुए हैं लेकिन नहरों में पानी नहीं है। नहर की उड़ाही भी कई दशक से नहीं होने से नहर के बीचोबीच लोग घर तक बना लिए हैं। एकदम अंधेर नगरी चौपट राजा की स्थिति बनी हुई है जिसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। इस बार बरसात न होने से किसानो मे पूरी तरह से त्राहिमाम मचा हुआ है।
138