पंडित राजकुमार शुक्ला की 95 वी पुण्य स्मृति दिवस बड़े ही  श्रद्धापूर्वक मनाई गई

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अशोक वर्मा

मोतिहारी : ऐतिहासिक गांधी संग्रहालय परिसर मे स्थापित पंडित राजकुमार शुक्ला की मूर्ति के नीचे  शुक्ला की 95 पुण्य स्मृति बड़े ही श्रद्धा पूर्वक बनाई गई । राय सुंदर देव शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम मे सर्वप्रथम सभी अतिथि गणों ने पंडित शुक्ला के आदम का मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया ।विचार संगोष्ठी के मुख्य वक्ता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉक्टर जुगल किशोर  ने कहा कि चंपारण की धरती काफी उर्जित है क्योंकि यहां  सफल चंपारण सत्याग्रह हुआ जिससे पुरे देश मे चल रहे स्वतंत्रता संग्राम को शक्ति मिली थी।बापू द्वारा आन्दोलन चलाने के निमित्त बने पंडित राजकुमार शुक्ला। उन्होने चंपारण की भूमि को एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जिसने गांधी को महात्मा बना दिया। गांधी के कारण चंपारण विश्व  प्रसिद्ध हुआ और इसके निमित्त बने पंडित राजकुमार शुक्ला। उन्होंने पंडित राजकुमार शुक्ला को महा मानव कहा। अपने संबोधन में  उन्होंने कहा कि बिना जिले वासियों के सहयोग के कोई बड़ा कार्य नहीं हो सकता है। गांधी के  किताबी ज्ञान तक अपने को सीमित नहीं रहना है बल्कि चंपारण के नागरिकों में गांधी दिखना चाहिए ।हम चाहते हैं कि गांधी वादियो के साथ मिलकर एक प्रशिक्षण कार्यशाला चलाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि हम चाहते हैं एक बार फिर चंपारण की धरती से पंडित राजकुमार शुक्ला और महात्मा गांधी निकले ।हम सभी मिलकर चिंतन मनन कर नया शुक्ला निकाले। उन्होंने पंडित शुक्ला के नाम पर विश्वविद्यालय में एक स्टडी कक्ष बनाने का भी प्रस्ताव रखा। अध्यक्षीय भाषण में राय सुंदर देव शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी के कारण चंपारण की पहचान विश्व स्तर पर बनी हमें गांधी के तमाम नीति सिद्धांत एवं सर्वधर्मसमभाव को अपने जीवन में उतरना चाहिए। वक्ताओं में आलोक जी ने  बड़े ही ओजपूर्ण संबोधन में कहा कि आज छद्म  गांधीवादी छद्म संस्था बनाकर देश में घूम रहे हैं, उन लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है ।उन्होंने यह भी कहा कि उपराष्ट्रपति मोतिहारी में आए और गांधी स्मारक पर  माल्यार्पण तक नहीं किया ,यह बड़ी दुखद बात है ,कहीं हम भटकाव के शिकार तो नहीं हो रहे हैं ।अपने संबोधन में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के प्रदेश महासचिव अशोक वर्मा ने कहा की गांधी एक विचार के रूप में आए और गांधी जी 32 वर्ष की उम्र में ब्रह्मचर्य को स्वीकार किया ।वे सादगी के प्रतीक थे तथा नशाखोरी के सख्त विरोधी थे। गांधी जी ने चंपारण सत्याग्रह के दौरान गरीबों के आंखों में झांक कर भगवान का दर्शन किया था ।एसडीओ कोर्ट में जब एसडीओ ने गांधी जी को चंपारण छोड़ने का प्रस्ताव दिया तो गांधी ने कहा कि मेरा बस चले तो मैं यही घर बनाकर बस जाऊं। संबोधित करने वालों में संगीता चित्रांश ,विनय सिह,संजय सत्यार्थी , अनवर आलम अमन , ललन शुक्ला ,शिक्षिका अमिता निधि, अमरिंदर सिंह एवं अन्य थे। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन गांधीवादी विनय सिंह ने किया।

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