(अनूप नारायण सिंह)
पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच), जो एशिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक है, ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक महत्वपूर्ण पहल की है। स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग द्वारा आयोजित ‘गायनी दूरबीन सर्जरी’ पर आधारित यह लाइव वर्कशॉप, न केवल तकनीकी रूप से एक उल्लेखनीय आयोजन था, बल्कि यह लाखों निःसंतान महिलाओं के लिए आशा की नई किरण भी सिद्ध हुआ।
इस वर्कशॉप की खास बात यह रही कि इसका फोकस ‘फर्टिलिटी एनहांसिंग सर्जरी’ पर था, जिसमें दूरबीन विधि द्वारा ऐसे ऑपरेशन किए जाते हैं जो महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। इस अत्याधुनिक सर्जरी का संचालन प्रसिद्ध गायनी एंडोस्कोपी विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार ने किया, जिन्होंने इसे जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। डॉ. संजीव न केवल विमेंस हॉस्पिटल फर्टिलिटी रिसर्च सेंटर में चिकित्सकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं, बल्कि स्वयं अपने संसाधनों से विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में जाकर भी यह तकनीक सिखा रहे हैं। उनका स्पष्ट सपना है – “हर गाइनेकोलॉजिस्ट को एंडोस्कोपी आनी चाहिए और उसे करना भी चाहिए।”
स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष प्रो. डॉ. गीता सिंह ने इसे समय की मांग बताया। उनका मानना है कि यह तकनीक न सिर्फ बांझपन के इलाज में कारगर है, बल्कि यह महंगे आईवीएफ इलाज का विकल्प भी प्रदान कर सकती है। आज के दौर में यह सर्जरी चिकित्सा विज्ञान के लिए एक वरदान से कम नहीं है।
इस आयोजन में पटना ओब्स एंड गायनी सोसाइटी के कई सदस्य चिकित्सकों की भागीदारी से यह स्पष्ट हो गया कि बिहार के चिकित्सा क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव की लहर चल पड़ी है। कार्यक्रम में पीएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट डॉ. आई.एस. ठाकुर ने न केवल आयोजन की सराहना की, बल्कि ऐसे प्रयासों की निरंतरता पर भी बल दिया।
ऐसे आयोजनों से न केवल तकनीकी दक्षता का विकास होता है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा को एक नया आयाम मिलता है। जब सरकारी संस्थान और समर्पित चिकित्सक मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और उन्नत बनाने के लिए कार्य करें, तब ही सही मायनों में ‘स्वस्थ भारत’ का सपना साकार हो सकता है।
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