- बढ़ती गर्मी के साथ जापानी इंसेफ्लाइटिस और एईएस का मंडराने लगता है खतरा
बेतिया। एईएस व जेई की रोकथाम व बचाव को लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट है। जिले के डीभीडीसीओ डॉ नवलकिशोर प्रसाद एवं उनकी टीम के द्वारा स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर एईएस/जेई की इलाज व्यवस्था, उपकरणों, दवाओं की निगरानी की गई और चिकित्सकों को ड्यूटी पर मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है।
भीडीसीओ गणेश कुमार ने बताया की गुरुवार को भीडीसीओ एवं भीबीडीएस के साथ मझौलिया सीएचसी के जेई/एईस वार्ड का निरीक्षण किया गया। इस दौरान औषधियां और उपकरण की उपलब्धता की जांच हुई। वार्ड में साफ बिस्तर और मच्छरदानी की उपलब्धता देखी गई। डीभीडीसीओ डॉ नवलकिशोर प्रसाद ने बताया कि गर्मियों में एईएस/जेई से निबटने को लेकर सभी अनुमण्डलीय अस्पताल, पीएचसी को इमरजेंसी में इलाज दवाओं की उपलब्धता होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि विभागीय स्तर पर गांव-गांव में जागरूकता को लेकर पंपलेट आदि का वितरण किया जाए, चौपाल लगाए जाए ताकि लोग जागरूक होकर बच्चों को सुरक्षित करें। उन्होंने कहा कि इसकी रोकथाम के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर बच्चों को टीकाकरण कराए जाते हैं। आवश्यक तैयारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्राउंड लेवल पर प्रचार-प्रसार किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में 30 बेड, अनुमंडलीय अस्पताल में 5 बेड का पीकू वार्ड और प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 2 बेड के वार्ड बनाए जाते हैं। मरीजों को लाने हेतु एम्बुलेंस की भी सुविधा उपलब्ध है। इसकी रोकथाम व बचाव को लेकर आशा, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, चिकित्सकों को आवश्यक ट्रेनिग दी जा चुकी है। एईएस/जेई मैनेजमेंट के लिये पूर्व में उपलब्ध कराये गये दवाओं एवं उपकरणों की उपलब्धता के साथ 24 एलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान पर ओआरएस एवं पारासिटामोल दवा की उपलब्धता आवश्यक मात्रा में सुनिश्चित किया गया है।
चमकी बुखार के लक्षण:
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया कि चमकी की बीमारी में शुरूआत में तेज बुखार आता है। इसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है। इस बीमारी में ब्लड शुगर नीचे आ जाता है। बच्चे तेज बुखार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे भी पड़ने लगते हैं। जबड़े और दांत कड़े हो जाते है। बुखार के साथ ही घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है। अगर बुखार पीड़ित को सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता है तो मृत्यु हो सकती है। ऐसे में परिजन बच्चों को तुरंत सरकारी अस्पताल लेकऱ आएँ, देरी न करें। इस मौके पर डीभीडीसीओ डॉ नवलकिशोर प्रसाद, भीडीसीओ रमेश कुमार, भीडीसीओ गणेश कुमार, भीबीडीएस सुजीत कुमार उपस्थित थे।
