एक लाख एकड़ जमीन पर बिहार सरकार  द्वारा मालिकाना हक समाप्त करने के खिलाफ आदोलन अब शोला बनने की दिशा मे अग्रसर,  किसान मर मिट जायेगे लेकिन जमीन नही छोडेगे–सुभाष  सिंह  कुशवाहा

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अशोक  वर्मा
मोतिहारी : बेतिया राज द्वारा लगभग 100 वर्ष पूर्व चंपारण के किसानों को बंदोबस्त किया गया एक लाख एकड़ जमीन पर  10 वर्ष पूर्व रसीद काटने एवं खरीद बिक्री पर रोक के लगने के बाद नवंबर माह में बिहार विधानसभा में विधेयक पेश कर पूरी तरह से किसानों को जमीन से कागजात  बेदखल करने के खिलाफ चंपारण के किसान अब पूरी तरह से गोल बंद हो रहे हैं। हरेक  प्रखंड में लगातार धरना प्रदर्शन किया जा रहा है ,उसी कड़ी में चंपारण किसान मजदूर संघर्ष समिति ने द्वारा पिपरा कोठी में एक दिवसीय आक्रोषपूर्ण धरना का आयोजन संगठन के अध्यक्ष सुभाष सिंह कुशवाहा की अध्यक्षता में किया  । धरना में घोषणा किया गया कि नगर के गांधी  मैदान में सरकार के इस हिटलर शाही नीति के विरोध में मार्च माह में महापंचायत लगेगा जिसमें चंपारण के लाखों किसानों की भागीदारी होगी। धरना में वक्ताओं ने आक्रोषपूर्ण लहजे में कहा कि ब्रिटिश हुकूमत ने गुलामी काल में किसानों को जमीन दी और आज आजाद भारत में वह जमीन हमसे छीनी जा रही है जिसे हम कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते। कई वक्ताओं ने कहा कि बेतिया राज एवं बदोवस्ती की जमीन के खरीद बिक्री और दाखिल खारिज पर लगे रोक को हर हालत में सरकार को  वापस लेना होगा वरना बिहार एक बार फिर लाल हो जाएगा जिसका दोष  सरकार पर लगेगी  ।
_समिति  द्वारा प्रत्येक प्रखंड स्थल पर धरना का आयोजन किया जा रहा है ।धरना स्थल पर  सैकड़ो की संख्या में किसानो ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और  इस मुद्दे को लेकर संघर्ष समिति ने आगामी दस मार्च को जिला मुख्यालय मोतिहारी स्थित गांधी मैदान में किसानों की महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया है ।इसके पूर्व संघर्ष समिति जिला के सभी प्रखंडों में लगातार बैठकें कर रही है। वही चंपारण किसान मजदूर संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुभाष सिंह कुशवाहा ने कहा कि  पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के लोगों को अंग्रेजी हुकूमत के समय बेतिया राज की जमीन दी गई है. जिन लोगों को जमीन दी गई थी, उन्हें ब्रिटिश राज में रैयत घोषित किए जाने की बात बतायी जा रही है.जिस जमीन के मालिकाना हक को लेकर चंपारण के किसानों की यह लड़ाई दशकों पुरानी है. जिसे लेकर समय-समय पर किसान आंदोलन करते रहे हैं।श्री कुशवाहा ने कहा कि चंपारण की भूमि संघर्ष की रही है।साठी का  किसान आंदोलन हो या उसके पहले का  महात्मा गांधी के नेतृत्व का सफल चंपारण सत्याग्रह हो, यहा के किसानो की शक्ति को  देश ने देखा है ।चंपारण को ऊर्जा भूमि भी कहा जाता है और देश में होने वाले किसी भी आंदोलन के लिए सत्ता एवं विपक्ष के नेतागण चंपारण की मिट्टी का नमन कर शक्ति अर्जित करते हैं, आज वही चंपारण एक बार फिर गर्म हो चुका है तथा सरकार के तानाशाही रवैया के खिलाफ यहा बड़ी लड़ाई  आरंभ हो चुकी है। यह लड़ाई  जीत  तब तक जारी रहेगी । जब तक  किसानों की जमाबंदी एवं मिलकियत कायम नहीं किया जाता। हम रुकने नहीं जा रहे हैं, हमारी लड़ाई दिनों दिन बढ़ती जाएगी और मार्च में गांधी मैदान में आयोजित विशाल जनसभा में आगे की रणनीति भी बनेगी। हम लोग पूरे सरकार को घेरेगे। बिहार का चक्का जाम कर देंगे लेकिन रुकेंगे नहीं क्योंकि चंपारण के किसानों ने मन बना लिया है कि हम मर जाएंगे मिट जाएंगे लेकिन अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।
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