अशोक वर्मा।
मोतिहारी : केंद्र सरकार हर साल छठ दीपावली के अवसर पर दिल्ली एवं अन्य महानगरों से अपने घर बिहार आने वाले मजदूरों का कष्टदायक यात्रा का दृश्य देखती हैं लेकिन देखते हुए भी अनदेखा करती है ,अंधा बन जाती है। महानगरों से बिहार के मजदूर दीपावली छठ के मौके पर भेड़ बकरियों की तरह ट्रेन के डब्बे में घुटन भरी कष्टदायक यात्रा कर अपने घर आते है यह दृश्य काफी कारूणिक होता है उक्त बातें प्रोफेसर जगदीश विद्रोही ने बड़े ही आक्रोश भर लहजे में कहा।इस वर्ष छठ दिपावली पर महानगर से विहार मजदूरो के आने का सिलसिला आरंभ हो चुकी है।उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से ही इस तरह का नजारा देखने को मिल रहा है। कहने के लिए तो भारत विश्व गुरु के मार्ग पर है लेकिन सच्चाई आज भी देश आदम युग मे ही है।वर्तमान केंद्र सरकार की तारीफ विश्व स्तर पर हो रही है लेकिन देश में प्रतिवर्ष बिहार के महत्वपूर्ण और सबसे बड़े पर्व छठ दिवाली के मौके पर मजदूरों का लौटने का दर्द भरा दृश्य आज भी यथावत है। कहने के लिए तो देश को आजाद हुए 77 वर्ष हो गये लेकिन इस मामले में कहीं से भी कोई परिवर्तन नहीं दिख रहा है। स्पेशल ट्रेन की घोषणाएं तो खूब होती है लेकिन मजदूरों का इस तरह आने-जाने का सिलसिला देश के लिए अति शर्मसार करने वाली है। इस बाबत रेल के अवकाश प्राप्त कर्मी अच्युतानंद पटेल ने बताया कि मैं भी जब नौकरी में था तो इस तरह का दृश्य देखता था और मुझे बिहार के मजदूरो की दशा देखकर शर्म आती थी। पुरा देश जानता है कि विहार के मजदूरो ने देश को विकसित करने में अपना श्रम दिया हैं फिर उनकी सूधी सरकार को क्यो नही?उनके साथ ही ऐसा क्यों होता है ।यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है आज देश की छवि ऐसी है कि बड़े-बड़े विकसित राष्ट्र भारत से डर रहे हैं। देश के आतंकवाद प्रभाव वाले कई प्रदेशों में कश्मीर से लेकर असम तक सरकार चुनाव करा लेती है लेकिन बिहार के जिन मजदूरों के द्वारा पूरे देश को आधुनिक स्वरूप दिया गया चाहे वह निर्माण का क्षेत्र हो या अन्य क्षेत्र हो ,सभी में बिहारियो ने देश को आगे बढ़ाया है लेकिन बिहार से जो लोग भी बाहर कमाने जाते हैं हर हालत में वे छठ के मौके पर अपने घर जरूर आते हैं । छठ पर घर खींचता है। ट्रेन में जानवरों की तरह ठूस ठूस करके वे जरूर आते हैं ।
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