गुलाबी शहर जयपुर में मोतिहारी  की बेटी लोक गायिका डाॅ. नीतू कुमारी नूतन की स्वर लहरियों से लोक रंग की रसधार में बहे जयपुरवासी

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  • सुर संगम कला संस्थान की स्थापना कर डाॅ.नूतन ने तैयार की है कला की नयी पीढ़ी
अशोक वर्मा
मोतिहारी  : अपनी सुमधुर स्वर लहरियों की बदौलत देश- दुनिया में विख्यात व राष्ट्रपति सम्मान से नवाजी गईं कला शख्सियत मोतिहारी की डाॅ. नीतू कुमारी नूतन ने गुलाबी शहर के नाम से मशहूर जयपुर में आयोजित कजरी महोत्सव में सुरों की रसवर्षा से दर्शक- श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
    राजस्थान की ऐतिहासिक,  पारंपरिक व प्राचीन धरोहर तथा कला- संस्कृति के उन्नयन व विकास को लेकर विश्व स्तर पर विख्यात राजस्थान इंटरनैशनल सेंटर के तत्त्वावधान में कल शाम उसके मुख्य ऑडिटोरियम में ‘गंगा किनारे कजरी महोत्सव’ का आयोजन था, जिसमें डाॅ.नूतन के अलावा देश के लब्धप्रतिष्ठ लोक कलाकारों को आमंत्रित किया गया था।
सांस्कृतिक रुप से बेहद समृद्ध राजस्थान के जयपुर के सुधी दर्शक- श्रोताओं के बीच डाॅ.नूतन ने बिहार की पारंपरिक कजरी, झूला, सोहर और बधइया गीतों को जब अपनी सुमधुर स्वर लहरियों से सजा- संवार पेश किया, तब लोकरंग की रसधार में दर्शक- श्रोता बहते चले गए और संपूर्ण वातावरण लय-स्वर-ताल से जगमग हो उठा।
     डाॅ.नूतन ने लोकप्रिय कजरी गीत ‘सावन की रिमझिम पड़त फुहार…’ से अपने गायन की शुरुआत की। फिर उन्होंने ‘मनवा ना लागे ला हमार ‘…झूला गीत  ‘झूला लगे कदम की डारी… ‘ सोहर ‘ कवना मासे गंगा जी सरबिहैं ‘…तथा बधइया गीत ‘तू का लेबू हो ललना’… सहित अन्य पारंपरिक लोकगीतों को स्वरात्मक प्रस्तुति से जीवंत बना डाला। वहीं उन्होंने अपनी कठिन कला- साधना व विलक्षण प्रतिभा से जयपुरवासियों को रु- ब- रु भी करा दिया।
    विदित हो कि अपनी कला प्रतिभा को लेकर देश- विदेश में विख्यात डाॅ. नीतू कुमारी नूतन ने ‘सुर संगम कला संस्थान’ की स्थापना की है। सुर संगम कला संस्थान के माध्यम से डाॅ.नूतन ने नयी पीढ़ी के कलाकारों को लय-स्वर-ताल के गुर सिखाए, फिर सुर संगम द्वारा राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर कई बड़े सांगीतिक समारोह आयोजित कर उदीयमान कलाकारों को इस मंच से प्रस्तुति के अवसर भी प्रदान किए। सुरसंगम की बदौलत कई नवोदित कलाकार आज कला के क्षेत्र में स्थापित नाम हो गए हैं। इतना हीं नहीं,डाॅ.नूतन ने नयी पीढ़ी के कलाकारों को प्रशिक्षित कर कला को व्यवसाय के रूप में अपनाने को लेकर उनका मार्गदर्शन किया। संगीत के क्षेत्र में बढ़ते बाजारवाद व अश्लीलता के खिलाफ इन्होंने व्यापक अभियान चलाया। वर्तमान दौर में कला- संगीत- साहित्य के माध्यम से नयी पीढ़ी को संस्कारित कर उनमें राष्ट्रीयता, एकता का मंत्र फूँक नये भारत के निर्माण को लेकर डाॅ.नूतन सदैव अग्रसर हैं।
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