मुजफ्फरपुर में सुनीता किडनी कांड में डॉक्टर को 7 साल की सजा, गर्भाशय ऑपरेशन के नाम पर निकाली थी दोनों किडनी

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मुजफ्फरपुर में सुनीता किडनी कांड मामले में कोर्ट ने बुधवार को दोषी डॉक्टर पवन कुमार को 7 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 18 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना की राशि जमा नहीं करने पर 4 महीने अतिरिक्त सजा होगी।
आपको बता दे कि 2022 में मुजफ्फरपुर स्थित सकरा थाना क्षेत्र निवासी 35 वर्षीय सुनीता देवी की ऑपरेशन के दौरान दोनों किडनी निकाल ली गई थी। वहीं, मुख्य आरोपी डॉक्टर आरके सिंह फरार है।

पुलिस ने कोर्ट के ऑर्डर पर उसके घर की कुर्की जब्ती की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है। इधर, एसकेएमसीएच में भर्ती सुनीता की तबीयत में कोई सुधार नहीं है। हेल्थ पहले से खराब हो गया है।

आपको बता दे कि घटना की शुरुआत 11 जुलाई 2022 को हुई। जहां सकरा थाना क्षेत्र के बाजी राउत गांव की सुनीता देवी को पेट में दर्द हुआ था। इलाज के लिए उसे डॉक्टर पवन कुमार के क्लिनिक लाया गया। डॉक्टर ने उसे गर्भाशय निकलने के लिए ऑपरेशन की सलाह दी।
बरियारपुर स्थित शुभकांत क्लिनिक में 3 सितंबर 2022 सुनीता के गर्भाशय का ऑपरेशन किया गया था, जो झोलाछाप डॉक्टर पवन कुमार का था।
5 सितंबर को सुनीता की तबीयत खराब होने पर उसे श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल लाया गया। सात सितंबर 2022 को जांच के बाद पता चला कि उसकी दोनों किडनी निकाल ली गई है।

उस समय सुनीता के भाई अरुण ने बताया था कि उसकी बहन के पेट में तेज दर्द था। इसलिए उसे लेकर नर्सिंग होम में गए। वहां जांच करने के बाद यूट्रस निकालने की बात कही गई। इसके लिए हम सभी लोग तैयार हो गए। नर्सिंग होम के संचालक ने ऑपरेशन करने के लिए बाहर से बड़े डॉक्टर को बुलाने की बात कही।

3 सितंबर को डॉक्टर आए और सुनीता का ऑपरेशन हुआ। लेकिन, इसके बाद उसकी हालत और बिगड़ने लग गई। तब नर्सिंग होम के डॉक्टरों ने उसे पटना ले जाने को कहा। जांच में पता लगा कि किडनी निकाल ली गई है।

पीड़ित महिला सुनीता ने बताया कि डॉक्टर ने कहा था, पेट में गोला है, निकालना पड़ेगा। ऑपरेशन के लिए गए तो किडनी ही निकाल दी। उन्होंने इस ऑपरेशन के लिए 30 हजार रुपए भी लिए थे।

सुनीता के परिजनों ने निजी नर्सिंग होम के संचालक पवन कुमार और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों पर किडनी निकालने का आरोप लगाया था।

इस मामले को लेकर बरियारपुर थाने में शिकायत के बाद नर्सिंग होम संचालक के खिलाफ ह्यूमन पार्ट्स ट्रांसप्लांट एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।

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