जिला पंचायती राज पदाधिकारियों का एमडीए पर हुआ उन्मुखीकरण

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  • एमडीए को सफ़ल बनाने में देंगे महत्वपूर्ण योगदान 
  • ⁠पंचायत प्रतिनिधि एमडीए लॉन्च में खुद दवा खाकर अन्य को दवा सेवन के लिए करेंगे प्रेरित 
  • ⁠राज्य में 10 फरवरी से 24 जिलों में चलेगा एमडीए 
पटना: फाइलेरिया एक गंभीर रोग है. विश्व भर में विकलांगता का यह दूसरा बड़ा कारण है. इस लिहाज से फाइलेरिया की रोकथाम बहुत जरुरी है. एमडीए यानी सर्वजन दवा सेवन से ही केवल फाइलेरिया को रोका जा सकता है. राज्य भर में 10 फरवरी से 24 जिलों में एमडीए अभियान चलाया जाएगा, जिसमें 10 जिलों में तीन तरह एवं शेष 14 जिलों में दो तरह की फाइलेरिया रोधी दवाएं घर-घर जाकर निःशुल्क खिलाई जाएगी. उक्त बातें अपर निदेशक सह फाइलेरिया के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. परमेश्वर प्रसाद ने जिला पंचायती राज पदाधिकारियों का एमडीए पर हुए उन्मुखीकरण कार्यशाला के दौरान कही.
डॉ. प्रसाद ने कहा कि 24 जिलों की 7.57 करोड़ की आबादी में लगभग 6 करोड़ योग्य लाभार्थियों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है. इतनी बड़ी आबादी को दवा खिलाने के लिए जिला एवं प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण साबित होगी. जिसमें समुदाय को दवा सेवन के लिए जागरूक करने के साथ एमडीए पर फैली भ्रांतियों को दूर करने में उनकी भूमिका कारगर साबित होगी.
राज्य के सभी जिले फाइलेरिया से प्रभावित 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने कहा कि कि फाइलेरिया नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज में एक प्रमुख रोग है. विश्व के 72 देशों में 85.9 करोड़ आबादी फाइलेरिया के खतरे में हैं. वहीं, राज्य के सभी 38 जिले इससे प्रभावित है.  इससे विश्व भर में लगभग 200 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होती है. डॉ. पांडेय ने इस दौरान एनबीएस की भूमिका, एमडीए कार्य-योजना सहित अन्य तकनीकी पक्ष पर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि एमडीए राउंड में 17 दिनों तक दवा खिलाई जाएगी, जिसमें 3 दिन बूथ लगाकर एवं शेष 14 दिन घर-घर पहुँचकर दवा खिलाई जाएगी.
डॉ. कैलाश कुमार, सीनियर रीजनल डायरेक्टर, रीजनल ऑफिस,स्वाथ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ने भी वर्ष 2027 तक  फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य हासिल करने की बात कही. उन्होंने कहा कि इसके लिए एमडीए राउंड में सभी लोगों को दवा खिलाना जरुरी है.
एमडीए में पंचायती राज प्रतिनिधियों की अहम भूमिका 
पिरामल फाउंडेशन के विकास सिन्हा ने एमडीए में पंचायती राज विभाग की भूमिका पर विस्तार से चर्चा किया. उन्होंने कहा कि एमडीए में अधिकतम लोगों को दवा सेवन सुनिश्चित कराने के लिए पंचायती राज पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों  की सबसे अहम भूमिका है. उन्होंने  जिला पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी का एमडीए पर उन्मुखीकरण, जिला स्तर पर एमडीए पर होने वाले डीसीसी बैठक में शामिल होना एवं प्रखंड स्तर पर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा सभी मुखिया का फाइलेरिया और एमडीए कार्यक्रम
पर उन्मुखीकरण करने पर जोर दिया बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के डॉ. अमोल पाटिल ने कहा कि एमडीए की सफलता में सामुदायिक सहभागिता सबसे जरुरी है. इसके लिए समुदाय स्तर पर पंचायती राज पदाधिकारि एवं प्रतिनिधि एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य कर सकता है.
इस दौरान पिरामल फाउंडेशन के बासब रुज ने पंचायती द्वारा प्राप्त सहयोग पर विस्तार से चर्चा की. वहीं, पिरामल फाउंडेशन के कुमार आशुतोष ने पंचायती राज विभाग की एमडीए पर भूमिका एवं उनसे अपेक्षाओं पर चर्चा भी किया. साथ ही सीफ़ार  एवं पीसीआई के राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों ने एमडीए पर उनकी संस्था द्वारा किए जा रहे सहयोग पर चर्चा की.
इस दौरान राज्य फाइलेरिया पदाधिकारी अनुज सिंह रावत के साथ जिला पंचायती राज पदाधिकारी एव  पीरामल फॉन्डेशन के जिला प्रतिनिधि उपस्थित थे.
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