बिहार में नीतीश युग का अंत राज्यसभा जाएंगे CM नीतीश कुमार, BJP का बड़ा मास्टरस्ट्रोक जानें कौन होगा नया मुख्यमंत्री

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बिहार की सियासत में ‘होली’ के बाद एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को पटना में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने साफ कर दिया है कि यह बदलाव भाजपा और जदयू (JDU) के बीच एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

1. भाजपा का ‘पावर गेम’ और 3 JDU नेताओं की भूमिका

सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार को सम्मानजनक विदाई (Dignified Exit) देने के लिए भाजपा ने पर्दे के पीछे से पूरी बिसात बिछाई है। इस ‘मिशन राज्यसभा’ को सफल बनाने में जदयू के तीन दिग्गज नेताओं (संजय झा, विजय कुमार चौधरी और संजय गांधी) की अहम भूमिका मानी जा रही है। इन नेताओं ने भाजपा आलाकमान और नीतीश कुमार के बीच सेतु का काम किया ताकि बिहार की सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी विवाद के हो सके।

2. नीतीश कुमार का ‘अधूरा सपना’ होगा पूरा

नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मन में लंबे समय से संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों (MLA, MLC, Lok Sabha, Rajya Sabha) का सदस्य बनने की इच्छा थी। राज्यसभा सदस्य बनकर वे अपनी इस ‘राजनीतिक चौकड़ी’ को पूरा करेंगे।

3. बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री?

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में 10 अप्रैल 2026 तक नई सरकार का गठन होने की संभावना है।

नया चेहरा: चर्चा है कि बिहार में पहली बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। इस रेस में सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नाम सबसे आगे हैं।

निशांत कुमार की एंट्री: एक चौंकाने वाली खबर यह भी है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं और उन्हें नई सरकार में उप-मुख्यमंत्री (Deputy CM) की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

4. जदयू कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश

नीतीश कुमार के इस फैसले से जदयू के जमीनी कार्यकर्ता स्तब्ध हैं। पटना स्थित पार्टी दफ्तर के बाहर कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और कुछ जगहों पर तोड़फोड़ की खबरें भी आईं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भाजपा ने बिहार में ‘महाराष्ट्र जैसा खेल’ कर दिया है और नीतीश कुमार को किनारे लगा दिया है।

5. विपक्ष का हमला: ‘जनादेश का अपमान’

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटनाक्रम को ‘जनादेश के साथ विश्वासघात’ करार दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “नीतीश जी को दूल्हा बनाकर घोड़े पर तो चढ़ाया, लेकिन फेरे किसी और के साथ डलवा दिए गए।” विपक्ष का दावा है कि भाजपा अब पूरी तरह से जदयू को निगलने की तैयारी में है।

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