मुजफ्फरपुर एमसीएच में पीपीएच बॉक्स से थमा मौत का बहाव, मातृ मृत्यु दर में आएगी कमी

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5—10 प्रतिशत महिलाओं में होती है पीपीएच की गंभीर स्थिति
पीपीएच मे त्वरित कार्यवाई बचा सकती है जान 
मुजफ्फरपुर
जब डिलीवरी के बाद खून बहना शुरू हुआ, तो मुझे लगा कि मैं अब बचूंगी नहीं, पर नर्सें एकदम तैयार थीं। उन्होंने तुरंत एक बॉक्स का इस्तेमाल किया, जिसमें सब कुछ मौजूद था। मुझे बस इतना याद है कि कुछ ही देर में स्थिति नियंत्रण में आ गई। सदर अस्पताल ने मुझे नई जिंदगी दी।” निशा सोनी की यह बातें मुजफ्फरपुर मातृ एवं शिशु अस्पताल में मातृ सुरक्षा प्रणाली की मजबूती का प्रमाण हैं। वह पिछले ही हफ्ते पीपीएच जैसी गंभीर स्थिति से गुजरी थीं। प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव दुनिया भर में मातृ मृत्यु का एक बड़ा कारण है, और निशा सोनी की दास्तान सदर अस्पताल में एक “पीपीएच बॉक्स” की जीवन रक्षक उपयोगिता को दर्शाती है।
पीपीएच पर प्रभावी तैयारी के बारे में डॉ अभिलाषा बताती हैं कि “हमारा पीपीएच प्रबंधन प्रोटोकॉल केवल कागज़ पर लिखे नियम नहीं हैं, बल्कि हर एक मां के लिए जीवन का आश्वासन हैं। जब प्रसव के बाद अनियंत्रित रक्तस्राव की आपात स्थिति आती है, तब प्रशिक्षित स्टाफ का शांत, त्वरित निर्णय और पीपीएच बॉक्स में सजे जीवन रक्षक उपकरण — ये मिलकर एक मजबूत दीवार खड़ी करते हैं। सदर अस्पताल का यह अखंडित प्रयास दिखाता है कि प्रभावी तैयारी और हर स्तर पर सामंजस्य कितनी जल्दी एक संभावित खतरे को नियंत्रण में बदल सकता है। यह सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है, यह मातृ सुरक्षा के प्रति हमारा अटूट समर्पण है, जो हर जन्म को सुरक्षित और यादगार बनाता है।”
निर्णायक भूमिका में पीपीएच बॉक्स
लेवर रुम इंचार्ज भवानी भारती कहती हैं कि अस्पताल में होने वाली प्रसव में 5% से 10% जोखिम पीपीएच का होता है। उनकी जान बचाने में जिस टूल की निर्णायक भूमिका होती है। वह पीपीएच बॉक्स ही होती है। यह मरीजों की जान बचाने में  “अहम रोल” निभाता है। यह किट रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों से लैस होती है, जिससे संकट की स्थिति में समय की बर्बादी शून्य हो जाती है। यह प्रणाली केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, यह पीपीएच बॉक्स जिले के सभी प्राथमिक रेफरल इकाई और डिलीवरी पॉइंट्स पर उपलब्ध है।
इस सफलता के पीछे प्रशिक्षित मानव संसाधन की बड़ी भूमिका है। अस्पताल की सभी स्टॉफ नर्स प्रशिक्षित हैं।
99 प्रतिशत मामलों का सफलतापूर्ण प्रबंधन
सदर अस्पताल के एमसीएच की डॉ अभिलाषा कहती हैं कि मई 2025 से लेकर अक्टूबर 2025 तक कुल 1848 प्रसव में से कुल 70 मामले पीपीएच के आए हैं। यह इनमें से शत प्रतिशत मामलों में पीपीएच का उचित प्रबंधन पीपीएच बॉक्स से संभव हुआ। सिर्फ फरवरी—मार्च में पीपीएच के एक मामले में उसे एसकेएमसीएच रेफर करना पड़ा था। इससे हम कह सकते हैं कि 99 प्रतिशत से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक प्रबंधन अस्पताल के भीतर ही, पीपीएच बॉक्स और प्रशिक्षित स्टाफ की मदद से, किया गया।
मल्टीपल प्रेगनेंसी भी पीपीएच का एक कारक
इस संबंध में एम्स,पटना में एडिशनल प्रोफेसर व वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ इंदिरा प्रसाद कहती हैं कि
मल्टीपल प्रेगनेंसी (जुड़वा या उससे अधिक बच्चों की गर्भावस्था) को पोस्टपार्टम हेमरेज  का एक प्रमुख और स्थापित जोखिम कारक माना जाता है। इस स्थिति में पीपीएच का खतरा बढ़ने का मुख्य कारण गर्भाशय का अत्यधिक फैल जाना या अति विस्तार है। एक से अधिक शिशुओं और प्लेसेंटा को सहारा देने के कारण, गर्भाशय की मांसपेशियाँ सामान्य से अधिक खिंच जाती हैं। इस अत्यधिक खिंचाव के परिणामस्वरूप, प्रसव के बाद गर्भाशय प्रभावी ढंग से सिकुड़ नहीं पाता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में यूट्राइन एटोनी कहा जाता है। चूंकि गर्भाशय का संकुचन ही रक्त वाहिकाओं को बंद करने का प्राकृतिक तरीका है, संकुचन की कमी के कारण अत्याधिक और खतरनाक रक्तस्राव होता है। इसके अलावा, प्लेसेंटल क्षेत्र  का बड़ा होना भी रक्त हानि में योगदान देता है, जिससे मल्टीपल प्रेगनेंसी के प्रसव के लिए सक्रिय और सतर्क प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
मातृ सुरक्षा सुनिश्चित करती पीपीटी बॉक्स
मुजफ्फरपुर एमसीएच की यह पहल प्रसवोत्तर रक्तस्राव से होने वाली मातृ मृत्यु को रोकने में अत्यंत सफल रही है। ‘पीपीएच बॉक्स’ नामक जीवन रक्षक किट और प्रशिक्षित स्टाफ आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं। इस सफलता से एमसीएच ने 99 प्रतिशत से अधिक पीपीएच मामलों का अस्पताल के भीतर ही प्रबंधन किया है। यह पहल न केवल सदर अस्पताल, बल्कि जिले के साथ राज्य के सभी डिलीवरी पॉइंट्स पर मातृ सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह दिखाता है कि प्रभावी प्रोटोकॉल और सामंजस्य से मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।
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