मानव सभ्यता आज इक्कीसवीं सदी के उस आधुनिक और डिजिटल दौर में सांस ले रही है, जहां विज्ञान ने अंतरिक्ष से लेकर चिकित्सा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक हर क्षेत्र में असंभव लगने वाली मंजिलों को फतह कर लिया है। लेकिन इसके बावजूद हमारे समाज के कुछ हिस्सों में अज्ञानता, अंधविश्वास, ओझा-गुणी और तंत्र-मंत्र का भूत इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है कि इंसानी खून पानी से भी सस्ता नजर आने लगा है। ऐसी ही एक अत्यंत विचलित करने वाली, रूह को कंपा देने वाली और दिल को झकझोर देने वाली खौफनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। एक तथाकथित तांत्रिक अनुष्ठान, ओझा की बहकावेबाजी और जादू-टोने के अंधविश्वास में डूबे एक सनकी भाई ने अपनी ही दो सगी बहनों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता के इस मुखौटे के पीछे आज भी समाज के भीतर कुप्रथाओं का कितना घना अंधेरा कायम है।
क्या थी पूरी खौफनाक पृष्ठभूमि और कैसे बुनी गई अंधविश्वास की यह खूनी साजिश?
घटना से जुड़े शुरुआती विवरणों और पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी युवक पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से काफी भ्रमित था और उसके घर में कुछ अजीब घटनाएं घट रही थीं। परिवार या गांव के ही किसी दंभ भरने वाले ओझा-तांत्रिको ने उसके कान में यह जहर भर दिया कि उसके घर में किसी ने कोई खतरनाक जादू-टोना या तंत्र-मंत्र करवा रखा है, और इसकी जड़ में उसकी ही घर की महिलाएं यानी उसकी अपनी बहनें हैं। ओझा ने उसे यह विश्वास दिला दिया कि जब तक वह कोई बड़ा अनुष्ठान या बलिनुमा तांत्रिक क्रिया नहीं करेगा, तब तक उसके पूरे परिवार का विनाश हो जाएगा। अंधविश्वास के इस दलदल में पूरी तरह धंस चुके उस युवक ने बिना यह सोचे कि वह अपनों का ही खून बहाने जा रहा है, एक खौफनाक साजिश की पटकथा लिख डाली। उसने रात के सन्नाटे में तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर घर के अंदर ही एक खौफनाक जाल बिछाया, जिससे किसी को भनक तक न लगे।
कुल्हाड़ी का खूनी वार और चीख-पुकार से गूंज उठा पूरा इलाका
जिस रात इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया, उस रात घर के भीतर तंत्र-मंत्र के नाम पर अजीबोगरीब पूजा-पाठ और हवन जैसी गतिविधियां चल रही थीं। दोनों नासमझ बहनें अपने भाई के इस बदले हुए और डरावने रूप से पूरी तरह अनजान थीं। अचानक ओझा के बहकावे में आकर सनकी भाई ने अपना मानसिक संतुलन पूरी तरह खो दिया और गुस्से तथा वहम में पागल होकर घर में रखी एक तेजधार कुल्हाड़ी उठा ली। इससे पहले कि दोनों बहनें कुछ समझ पातीं या अपनी जान बचाने के लिए भाग पातीं, उसने बेरहमी से एक के बाद एक कई ताबड़तोड़ वार दोनों बहनों पर कर दिए। खून से लथपथ दोनों युवतियों की चीख-पुकार सुनकर जब तक आस-पास के पड़ोसी और रिश्तेदार दौड़कर मौके पर पहुंचते, तब तक दोनों की सांसें थम चुकी थीं और आरोपी कुल्हाड़ी हाथ में लिए खून से सने कपड़ों में वहीं खड़ा था।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और समाज के नाम एक गंभीर चेतावनी
इस रूह कंपा देने वाली वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई और भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने खून से सनी कुल्हाड़ी को अपने कब्जे में लेते हुए आरोपी भाई को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और इस पूरे मामले में शामिल उस ओझा व अन्य संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है जिन्होंने उस युवक के दिमाग में यह जहर भरा था। कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और कोर्ट में सख्त सजा दिलाने की तैयारी की जा रही है। यह खौफनाक घटना समाज के माथे पर एक ऐसा कलंक है जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कब तक लोग अंधविश्वास और ओझा-प्रथा के नाम पर अपनों की बलि चढ़ाते रहेंगे। विज्ञान के इस युग में इस प्रकार की कुप्रथाओं का अंत होना बेहद जरूरी है, अन्यथा ऐसे ही कई और घर उजड़ते रहेंगे।
29