वैशाली में 162 बच्चों को मिला जीवनदान, ‘दिल विदाउट बिल’ अभियान से संवर रहा मासूमों का कल, डीएम के सहयोग से 15 बच्चों की अहमदाबाद में होगी निशुल्क सर्जरी, 5 एम्बुलेंस से जत्था पटना रवाना

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हाजीपुर। वैशाली जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र में शनिवार का दिन महत्वपूर्ण रहा, जब मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत 15 और मासूमों के चेहरों पर मुस्कान लौटाने की मुहिम शुरू हुई। जिलाधिकारी के कुशल मार्गदर्शन और अटूट सहयोग का ही परिणाम है कि जिले में अब तक कुल 162 बच्चों को हृदय रोगों से मुक्ति दिलाकर नया जीवनदान दिया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा ‘दिल विदाउट बिल’ अभियान उन गरीब परिवारों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है, जो अपने बच्चों के दिल के छेद और अन्य जन्मजात बीमारियों का महंगा इलाज कराने में असमर्थ थे।

​प्रशासनिक तत्परता और सामूहिक प्रयास की जीत:
​इसी कड़ी में, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित 15 बच्चों के एक जत्थे को जिला स्वास्थ्य समिति, वैशाली से पूरे सम्मान के साथ रवाना किया गया। इन बच्चों को श्री सत्य साईं हृदय अस्पताल, अहमदाबाद द्वारा आयोजित 11वें विशेष शिविर में जाँच और आवश्यकतानुसार जटिल सर्जरी के लिए चुना गया है। जिलाधिकारी महोदया की व्यक्तिगत रुचि और सक्रियता ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सुगम बना दिया है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर मिलने वाली बाधाएं समाप्त हो गई हैं और गरीब परिवारों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा और भी मजबूत हुआ है।

​निशुल्क इलाज के लिए पटना से अहमदाबाद तक का सफर:
​शनिवार की सुबह जिला स्वास्थ्य समिति परिसर में उत्साह का माहौल था, जहाँ 5 विशेष एम्बुलेंस के माध्यम से बच्चों और उनके परिजनों को इंदिरा गाँधी हृदय रोग संस्थान, पटना भेजा गया। इस रवानगी के दौरान डी.ई.आई.सी प्रबंधक-सह-समन्वयक डॉ. शाइस्ता, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अंजनी मिश्रा और फार्मासिस्ट अभिषेक कुमार ने स्वयं मौजूद रहकर बच्चों का हौसला बढ़ाया। विभाग की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों और अस्पताल प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए फार्मासिस्ट राजीव कुमार और शशिकांत कुमार को भी साथ भेजा गया है।

​’दिल विदाउट बिल’ संकल्प से जगी नई उम्मीद:
डॉ शाइस्ता ने बताया ​यह योजना न केवल बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रही है, बल्कि ‘दिल विदाउट बिल’ के अपने संकल्प के साथ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को यह विश्वास दिला रही है कि आर्थिक तंगी अब उनके बच्चों के इलाज में बाधा नहीं बनेगी। अब तक 162 परिवारों के आँगन में खुशियाँ लौटाने वाली यह मुहिम वैशाली के स्वास्थ्य इतिहास में एक मिसाल पेश कर रही है, जहाँ सरकारी तंत्र और सेवा भाव का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है।

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