डिजिटल हिंसा के खिलाफ एकजुट हुई आवाज़, साइकिल रैली ने दिया सुरक्षित डिजिटल भविष्य का संदेश

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•⁠  ⁠महिला विकास निगम और सहयोगी संस्था के संयुक्त प्रयास से हुआ आयोजन 
•⁠  ⁠80 किशोरियों की भागीदारी से दिखा जागरूकता का अनूठा उदाहरण
•⁠  ⁠16 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अभियान के तहत डिजिटल सुरक्षा और लैंगिक समानता पर फोकस
पटना: महिला विकास निगम और सहयोगी संस्था के संयुक्त तत्वावधान में राजकीयकृत दुनियारी उच्च माध्यमिक विद्यालय, हथियाकांध सराय, पटना में मंगलवार को कक्षा 9 से 12वीं की 80 किशोरियों के साथ साइकिल रैली का आयोजन किया। यह रैली सराय पंचायत( मनेर, ब्लॉक) से होते हुए उसरी हथियाकाँध पंचायत (दानापुर ब्लॉक) तक लगभग 6 किलोमीटर की दूरी तय की। इन किशोरियों ने हाथों में पोस्टर और संदेश लेकर यह स्पष्ट किया कि डिजिटल सुरक्षा केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि उनकी स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य का प्रश्न है। 16 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अभियान के यह कार्यक्रम डिजिटल सुरक्षा और लैंगिक समानता पर सामुदायिक जागरूकता को बढ़ाने में कारगर प्रतीत हुई।
यह रैली “16 डेज़ ऑफ एक्टिविज़्म अगेंस्ट जेंडर-बेस्ड वायलेंस” अभियान का हिस्सा है, जो हर वर्ष 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक मनाया जाता है। इस अभियान का उद्देश्य लैंगिक हिंसा को मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में सामने लाना, जागरूकता को बढ़ाना और सामुदायिक कार्रवाई को प्रेरित करना है। इस वर्ष का खास फोकस ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर-स्टॉकिंग, डीपफेक और टेक्नोलॉजी-आधारित हिंसा के बढ़ते जोखिमों पर है।
सामूहिक जागरूकता ही समाधान
महिला एवं बाल विकास निगम के डीपीएम ब्रजेश चंद्र सुधाकर ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि
डिजिटल हिंसा रोकने के लिए सिर्फ कानून या तकनीक काफी नहीं है।सबसे जरूरी है समुदाय की जागरूकता। जब बच्चियाँ समझदार होंगी, परिवार संवेदनशील होगा और स्कूल सतर्क रहेगा, तभी हम एक सुरक्षित डिजिटल माहौल बना पाएंगे। यह रैली उसी दिशा में बेहद मजबूत कदम है।
महिला एवं बाल विकास निगम के डीएमसी  ने कहा कि टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से जोखिम भी बढ़ रहे हैं। इसलिए ऑनलाइन सुरक्षा को शिक्षा का स्थायी हिस्सा बनाना जरूरी है। हम सभी मिलकर बच्चों विशेषकर बेटियों को सुरक्षित डिजिटल जीवन देना चाहते हैं।
वहीं, मनेर ब्लॉक की एलएस हेमलता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में किशोरियों द्वारा ऐसी जागरूकता रैली निकालना बताता है कि बदलाव भीतर से शुरू हो चुका है। यह सिर्फ रैली नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा पर एक मजबूत सामुदायिक संवाद की शुरुआत है।
डिजिटल हिंसा: नई उम्र की पुरानी चुनौती
सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी ने कहा कि साइकिल रैली का उद्देश्य किशोरियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार सिखाना, समुदाय को संवेदनशील बनाना और ऑनलाइन हिंसा के खिलाफ एक सामूहिक आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करने का था। आज की तेज़ी से बदलती तकनीकी दुनिया में डिजिटल हिंसा एक बढ़ती हुई समस्या बन चुकी है। इसमें ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर-स्टॉकिंग, सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन, धमकी, निजी तस्वीरों का दुरुपयोग, फेक अकाउंट, डीपफेक वीडियो जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं, जो लड़कियों और महिलाओं की मानसिक, सामाजिक और शारीरिक सुरक्षा को प्रभावित करती हैं।
रजनी ने कहा कि हमारी कोशिश है कि कोई भी बच्ची डिजिटल दुनिया में असुरक्षित महसूस न करे। यह रैली सिर्फ जागरूकता नहीं, बल्कि एक संकल्प है कि तकनीक लड़कियों की आवाज़ को मजबूत करेगी, न कि उन्हें डराएगी। डिजिटल हिंसा के खिलाफ यह सामूहिक आवाज़ आने वाले समय में सुरक्षित और समान डिजिटल स्पेस बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
डिजिटल जागरूकता शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा
राजकीयकृत दुनियारी उच्च माध्यमिक विद्यालय हथियाकाँध के प्राचार्य  डॉ. गणेश लाल ने रैली की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल दुनिया ने हमारे बच्चों के लिए नए अवसर खोले हैं, लेकिन जोखिम भी बढ़ाए हैं। यह रैली हमारी छात्राओं के आत्मविश्वास को बढ़ाती है और उन्हें सिखाती है कि तकनीक का सही उपयोग ही सशक्तिकरण है। जागरूकता ही सुरक्षा है, और यह संदेश हर घर तक पहुंचना चाहिए।
किशोरियों की भागीदारी: उम्मीद और बदलाव का प्रतीक
रैली में शामिल 80 किशोरियों ने पोस्टरों, नारों और दृढ़ संकल्प के साथ बताया कि अगली पीढ़ी डिजिटल हिंसा को सामान्य नहीं मानेगी। उनका उत्साह इस बात का प्रमाण था कि अगर लड़कियों को सही जानकारी और सही मंच मिले, तो वे हर चुनौती के खिलाफ खड़ी हो सकती हैं। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकगण रमेश्वर प्रसाद, रंजिता कुमारी, अजय कुमार गिरी, सरिता कुमारी ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोगी संस्था की टीम में लाजवंती, शारदा, फरहान, प्रियंका, धर्मेंद्र, खुशबू कुमारी, मोनिका, खुशबू, निर्मला, मनोज और बिंदु की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने विद्यालय, किशोरियों और समुदाय के साथ मिलकर कार्यक्रम को प्रभावी और सहभागी बनाया।
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