प्रधानमंत्री मंत्री जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवा मानकों के अनुरूप नहीं, औषधि विभाग की जांच में हुआ खुलासा 

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मोतिहारी, नरेंद्र झा।
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर सरकारी मानकों की अनदेखी कर दवाओं की आपूर्ति की जा रही है। औषधि विभाग की जांच में यह मामला सामने आया है।इसमें पाया गया है कि जिन दवाओं की आपूर्ति की गई है, उनमें आधा दर्जन ऐसी हैं जो ड्रग्स एवं कास्मेटिक एक्ट के प्रविधानों के अनुरूप नहीं हैं।जांच की पूरी रिपोर्ट 16 नवंबर को जिला औषधि निरीक्षक ने गोपनीय पत्र के माध्यम से विभाग के सभी संबंधित अधिकारियों को भेजी है। रिपोर्ट जिला सहायक औषधि नियंत्रक और सिविल सर्जन के साथ-साथ प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को भी भेजी गई है।सितंबर 2024 में पटना में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्य सचिव ने जन औषधि केंद्रों के संचालन एवं उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता के संबंध में जांच कर प्रतिवेदन मांगा था।इसके बाद 13 नवंबर को सभी जिलों के लिए जारी अपर सचिव के निर्देश के बाद पूर्वी चंपारण में जन औषधि केंद्रों की जांच की गई।
इन दवाओं में पाई गई गड़बड़ी
दवा कोड 665 में विटामिन बी-काम्प्लेक्स के साथ विटामिन-सी साफ्टजेल्स में ड्रग इंसपेक्टर ने खामी पाई है। बताया कि इसमें विटामिन बी-12 की मात्रा मानक के न्यूनतम स्तर पर है।नियमानुसार इसकी मात्रा अधिक होनी चाहिए। इस दवा में विटामिन बी-12 की मात्रा पांच एमसीजी (माइकोग्राम) से ज्यादा व फोलिक एसिड की मात्रा हर हाल में 1000 एमसीजी से ज्यादा होनी चाहिए। इसी तरह मेडिसिन कोड (580) में जिनसेंग, मल्टीविटामिन और मल्टी मिनरल कैप्सूल पूरी तरह से थेरेप्टिक न ही प्रोफाइलैक्टिक दवा है। रिपोर्ट में दवा को अप्रूवल देने वाली नियामक संस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।कार्बोनिल आयरन, जिंक सल्फेट और फोलिक एसिड कैप्सूल के कांबिनेशन (दवा कोड 1223) पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें फोलिक एसिड मात्रा एक हजार एमसीजी होनी चाहिए।कैल्शियम कार्बोनेट, विटामिन डी-थ्री, मिथाइलकोबालमीन, एल मिथाइल फोलेट कैल्शियम और पाइरीडाक्सल-5 फास्फेट टेबलेट विटामिन डी (दवा कोड 2297) की कमी के गंभीर मामले में यह दवा दी जाती है।कारण यह कि इसमें शामिल सभी अवयव सामान्य मात्रा से अधिक मिलाए गए होते हैं, लेकिन दवा पर कहीं भी इसका उल्लेख नहीं किया गया है।दवा कोड 2054 में कोबालामीन, अल्फा लिपोइक एसिड, इनोसिटाल, फोलिक एसिड, क्रोमियम पिकोलिनेट, सेलेनियम और बेनफोटियामाइन साफ्ट जेलाटिन कैप्सूल में जो भी अवयव हैं, वे चिकित्सकीय सीमा से कम हैं।
फार्मासिस्ट से दुकान संचालन कराने का दिया प्रस्ताव
प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि जन औषधि केंद्र फार्मासिस्ट को ही दिया जाना चाहिए। इसका कारण यह है कि ये दवाएं ब्रांड नेम से नहीं आती हैं।
इनकी बिक्री कंपोजीशन के आधार पर होती है, जबकि अबतक की जांच में ऐसा पाया गया है कि अधिकतम जन औषधि केंद्रों पर फार्मासिस्ट नहीं रह रहे हैं।
इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर विकास शिरोमणि का कहना है कि रिपोर्ट की बातें गोपनीय हैं। विभाग के निर्देशानुसार जन औषधि दुकानों की जांच की जा रही है।
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