अशोक वर्मा
मोतिहारी : नस संबंधित बीमारियों के इलाज में विशेष शोधकर नई तकनीक से सफल इलाज कर ख्याति अर्जित करने वाले नगर के जाने-माने आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर मोबीन हाशमी के क्लीनिक में नव वर्ष एवं उनके विशेष शोधपरक इलाज करने हेतु बधाई दी।डॉक्टर हाशमी कई महानगरो मे आयोजित मेडिकल सेमिनारो मे शोधपरक प्रभावशाली व्याख्यान दिये हे। गौरतलब है कि डॉक्टर मोबिन हाशमी एक धर्म परायण व्यक्ति हैं तथा कई बार हज यात्रा कर चुके हैं। बाल्य काल से ही इनके अंदर कुछ विशेष करने का जज्बा था। व्यावसायिक क्षेत्र में आने के बाद भी इन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में बीएएमएस कर अपने विशेष शोध से नस संबंधित बीमारियों के इलाज मे अप्रत्याशित सफलता पायी।चिकित्सा सेवा के आरंभिक दौर मे रूलही मे संचालित टासफारका मे इन्होंने अपनी सेवा दी। चार दशक पूर्व नगर के बैंक रोड में इन्होंने अपना क्लीनिक खोल आम गरीबों को सुविधा देते हुए अपना चिकित्सा कार्य आरंभ किया तथा आयुर्वेद के रहस्यपूर्ण दवाओ की खोज की, गहन अध्ययन एवं शोध के बाद इन्होंने अपना कंपोजिशन बनाया जो काफी कारगर साबित हुआ। उस दौर में कई पोलियो से ग्रसित बच्चों को इन्होंने चलाकर एवं दौड़ा कर लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। वर्तमान समय उनके पुत्र न्यूरोसर्जन है और और अपनी विशेष शोध के कारण डॉक्टर मोबीन हाशमी देश-विदेश के कई सेमिनारों में अपने शोध पत्र को पढकर अर्जित ज्ञान को आम डॉक्टरो के बीच शेयर किया है। इनके क्लीनिक में सभी जाति धर्म के लोगों को नया जीवन मिला है। ये चिकित्सा सेवा के साथ-साथ आम लोगों को यह सुझाव भी देते हैं कि संयमित जीवन शैली अपनावे साथ-साथ संयमित भोजन भी करें, अगर संभव हो तो मांसाहारी भोजन से बचने की कोशिश करे। चिकित्सकीय व्यस्त सेवा देते हुए ये अपने समय पर नमाज पढ़ना कभी नहीं भूलते।मरीज की भीड रहने पर मस्जिद न जाकर थोडी देर मरीज को रोककर क्लीनिक मे ही जमीन पर नमाज पढ लेते है। यह इनकी दिन चर्चा है ।कई सम्मान से नवाजे गए डॉक्टर मोबीन हाशमी ने लोगों को नव वर्ष पर सभी को शुभकामना देते हुए कहा कि भारत की भूमि विश्व की सर्वश्रेष्ठ भूमि है, सभी धर्म के लोग यहा बसे हुये है।सभी लोग यहां प्रेम सौहार्द के साथ रहते हैं यही सौहार्द्र ही भारतीय संस्कृति है। हम सब को अपने इस संस्कृति की रक्षा करनी है तथा हमेशा ही भाईचारे का संदेश देना है। जो लोग आज आगे बढ़ गए हैं चाहे शिक्षा में या आर्थिक रूप से संपन्न हुये है उन्हें पिछड़े हुए लोगों को सहयोग कर उनके जीवन को भी संवारना चाहिए। यही सच्चा धर्म है।
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