“जनादेश सदैव स्वीकार करने योग्य होता है” अनंत धीश अमन

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गया।जनादेश सदैव स्वीकार करने योग्य होता है क्योंकि चुनाव के वक्त पक्ष विपक्ष अपनी नीतियों के साथ जनमानस में जाते हे और चुनाव के दौरान पक्ष विपक्ष में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप भी करते जनमानस के बीच में क्योंकि आप अपनी बात रख सके जनमानस के बीच में इसका मुख्य कारण यह भी है की लोकतंत्र में जनता को अपने मताधिकार से न्याय करने का अवसर प्रदान है और यही लोकतंत्र की अद्भुत खूबसूरती है। भारत जो विश्व का सबसे बङा लोकतांत्रिक देश है और विविधता से भरा देश है यहाँ की समस्याएं भी एक नहीं अपितु अलग-अलग है उसके बाबजूद एक हीं प्रक्रिया से अपने सभी समस्याओं का हल ढूंढता है यही हमारे एकता और अखंडता का प्रतीक है। सत्ता में पहुंचने का प्रयास सभी राजनीतिक पार्टियां करती है और करना भी चाहिए किंतु जनादेश को सदैव  स्वीकार करते हुए तथा भारत की संवैधानिक व्यवस्था में आस्था रखते हुए राष्ट्र प्रथम के भाव को अंगीकार करना चाहिए।
क्योंकि सत्ता आज आपकी है कल किसी और के पास होगी यह लोकतंत्र की नियति है और लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा भी है। यदि हमारे विचार राष्ट्र सर्वोपरि और राष्ट्र उत्थान के प्रति समर्पित है तो यह राष्ट्र को मज़बूती प्रदान करेगा। सत्ता में पहुंचना हीं सिर्फ राजनीतिक पार्टियों का उद्देश्य नहीं होना चाहिए अपितु विचारों को जमीनी स्तर तक प्रभाव में लाने का उद्देश्य होना चाहिए। किसी भी तरह से कुछ खास लोगों के विकास में न सहयोग कर आम जनमानस की सुरक्षा, आर्थिक उन्नति, सांस्कृतिक उन्नति, पर्यावरण सरंक्षण, राष्ट्रीयसुरक्षा नीति, विदेश नीति और राज्यों के तनावों को कम करते हुए हर राज्यों तक विकास का कार्य करना चाहिए। यहीं जनमानस का भाव होता है और इसी कारणवश वह चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेते है दो-दो चार घंटे कङी धूप बरसात और कडाके के ठंड में भी वह नेताओं का भाषण सुनते है और उसके बाद वह अपने मताधिकार से पक्ष विपक्ष को जनादेश देने का काम करते है। इसलिए जनादेश सदैव स्वीकार करने योग्य होता है।
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