पटना : ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) के ग्लोबल उपाध्यक्ष सह बिहार प्रदेश अध्यक्ष दीपक कुमार अभिषेक ने कहा है कि कायस्थ समाज के सर्वांगीण विकास और उत्थान के लिए सामाजिक एकजुटता, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
श्री अभिषेक ने कहा कि समाज की प्रगति केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों, परस्पर सहयोग और जरूरतमंद लोगों को आगे बढ़ाने की भावना से संभव है।उन्होंने कहा कि कायस्थ समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। शिक्षा, प्रशासन, साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता, विज्ञान और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में समाज की विभूतियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज आवश्यकता इस बात की है कि इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए और युवाओं को अपनी प्रतिभा एवं क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए।
दीपक अभिषेक ने कहा कि ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के नेतृत्व और प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन के मार्गदर्शन एवं सहयोग से जीकेसी समाज को संगठित करने, उसकी समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए सामूहिक मंच उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। संगठन के विस्तार, सामाजिक गतिविधियों और विभिन्न प्रकोष्ठों के माध्यम से समाज के लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन का उद्देश्य केवल बैठकें और सामाजिक समारोह आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज के लोगों के बीच सहयोग, संपर्क और सहभागिता की ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे जरूरतमंद परिवारों को वास्तविक लाभ मिल सके।उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार किसी भी समाज के विकास के प्रमुख आधार हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को शिक्षा में सहयोग, युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मार्गदर्शन तथा रोजगार के अवसरों से जोड़ने की पहल की जानी चाहिए। इसके साथ ही युवाओं को स्वरोजगार, उद्यमिता और कौशल विकास के लिए प्रोत्साहित करना भी जरूरी है। छोटे एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर समाज के भीतर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
जीकेसी के ग्लोबल उपाध्यक्ष सह बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने महिला सशक्तीकरण पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता समाज के विकास के लिए अनिवार्य है। महिलाओं को स्वरोजगार, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में संगठन को निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित किए बिना सर्वांगीण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन के मार्गदर्शन में महिला सहभागिता और संगठनात्मक गतिविधियों को भी नई गति देने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि कायस्थ समाज की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व भी एक महत्वपूर्ण विषय है। समाज के लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया, सामाजिक नेतृत्व और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए शिक्षित, योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को आगे आने का अवसर देना होगा। समाज के हितों से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक विचार-विमर्श और सकारात्मक पहल की आवश्यकता है।
दीपक अभिषेक ने कला एवं संस्कृति के संरक्षण को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कायस्थ समाज की सांस्कृतिक पहचान, साहित्यिक परंपरा, चित्रगुप्त पूजा की विरासत और महापुरुषों के विचारों को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाना चाहिए। कलाकारों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को उचित मंच एवं सम्मान मिलना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहें।उन्होंने कहा कि जीकेसी के सदस्यता अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक कायस्थ परिवारों को संगठन से जोड़ना है। संगठन की मजबूती तभी संभव है, जब समाज के हर वर्ग, हर पीढ़ी और देश-विदेश में रहने वाले लोग इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। इसके लिए जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को सक्रिय एवं प्रभावी बनाने की जरूरत है।
दीपक अभिषेक ने समाज के लोगों से आपसी मतभेद और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि समाज का विकास किसी एक व्यक्ति या संगठन के प्रयास से नहीं, बल्कि सभी की सहभागिता से संभव है। हमें अपनी ऊर्जा समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित लोगों को आगे बढ़ाने में लगानी चाहिए।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद और प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन के मार्गदर्शन में जीकेसी सामाजिक एकजुटता, शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तीकरण, कला-संस्कृति और युवा नेतृत्व के क्षेत्र में नई पहल के साथ आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एक सदस्य, एक संकल्प—मजबूत जीकेसी, सशक्त कायस्थ समाज केवल नारा नहीं, बल्कि समाज के उत्थान के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और संकल्प का प्रतीक है।
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