- प्रति हजार आबादी पर 30 संभावित मरीजों की जांच अनिवार्य
- पोषण सहायता के लिए सहमति देने वाले सभी मरीजों को मिलेगा फूड बास्केट
पटना। टीबी मुक्त पंचायत के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2026 के चार संशोधित संकेतक और लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इसके तहत पंचायतों में संभावित टीबी मरीजों की पहचान से लेकर उपचार पूरा कराने और मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराने तक के मानक तय किए गए हैं। राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी ने इस संबंध में सभी सिविल सर्जनों को निर्देश जारी किया है। यह निर्देश केंद्रीय यक्ष्मा प्रभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन के आधार पर जारी किया गया है।
संभावित मरीजों की जांच और अधिसूचना पर जोर
नए मानकों के अनुसार, प्रत्येक पंचायत में प्रति एक हजार आबादी पर कम से कम 30 संभावित टीबी मरीजों की जांच नैट या माइक्रोस्कोपी के माध्यम से कराना अनिवार्य होगा। वहीं, प्रति एक हजार आबादी पर सभी प्रकार के अधिसूचित टीबी मरीजों की संख्या अधिकतम एक निर्धारित की गई है। इन मानकों का उद्देश्य बीमारी की समय पर पहचान और संक्रमण के प्रसार पर नियंत्रण सुनिश्चित करना है।
90 प्रतिशत मरीजों का उपचार सफल करना होगा
उपचार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए पिछले वर्ष अधिसूचित ड्रग सेंसिटिव टीबी (डीएस-टीबी) मरीजों में कम से कम 90 प्रतिशत का उपचार सफल होना जरूरी होगा। इसके लिए मरीजों की नियमित निगरानी, दवाओं की उपलब्धता और उपचार के प्रति जागरूकता पर जोर दिया गया है।
सहमति देने वाले सभी मरीजों को पोषण सहायता
चौथे संकेतक के तहत वर्ष 2026 में पोषण सहायता लेने के लिए सहमति देने वाले सभी टीबी मरीजों को कम से कम एक फूड बास्केट उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए शत-प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य उपचार के दौरान मरीजों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहयोग देना है।
पंचायतवार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया होगी सुनिश्चित
राज्य स्वास्थ्य समिति ने सिविल सर्जनों को संशोधित संकेतकों और लक्ष्यों की जानकारी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। साथ ही टीबी मुक्त पंचायत प्रमाणीकरण के लिए पंचायतवार दावे तैयार करने, जमा करने और निर्धारित मानकों के अनुसार मूल्यांकन की प्रक्रिया सुनिश्चित करने को कहा गया है। सीडीओ डॉ. जीएम ठाकुर ने बताया कि इन मानकों से पंचायत स्तर पर टीबी मरीजों की पहचान, उपचार की निरंतरता और पोषण सहायता की उपलब्धता को मजबूती मिलेगी।
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