- रागिनी रंजन की अध्यक्षता में वर्चुअल बैठक, सभी प्रदेशों में कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के विस्तार पर चर्चा
पटना : ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) की प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन की अध्यक्षता में आयोजित वर्चुअल बैठक में आगामी 20 दिसंबर को नवी मुंबई के खारघर में होने वाले विराट कायस्थ महासम्मेलन के तहत कला एवं संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
बैठक में जीकेसी के राष्ट्रीय महासचिव नवीन कुमार, कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ के ग्लोबल कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम कुमार तथा ग्लोबल महासचिव पवन सक्सेना शामिल हुए।
जीकेसी की प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने कहा कि कला और संस्कृति समाज की पहचान तथा उसकी विरासत को संरक्षित रखने का सशक्त माध्यम हैं। महासम्मेलन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए प्रतिभाओं को मंच देने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रदेशों में कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ को सक्रिय बनाने तथा साहित्य, संगीत, नृत्य और रंगमंच से जुड़े प्रतिभाशाली लोगों को संगठन से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़कर जागरूकता बढ़ाने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने की आवश्यकता भी बताई।
जीकेसी के राष्ट्रीय महासचिव नवीन कुमार ने कहा कि महासम्मेलन की सफलता के लिए सभी समितियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा समय पर तैयार कर उन्हें प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी प्रदेशों में कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष, महासचिव और अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति से संगठन को मजबूती मिलेगी तथा सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार होगा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक विषयों को भी कार्यक्रमों में शामिल करने पर जोर दिया।
कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ के ग्लोबल कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि महासम्मेलन में कायस्थ समाज की सांस्कृतिक विरासत और प्रतिभाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। प्रकोष्ठ के माध्यम से विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों को मंच देने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
प्रकोष्ठ के ग्लोबल महासचिव पवन सक्सेना ने कहा कि सभी प्रदेशों में पदाधिकारियों की नियुक्ति से संगठनात्मक गतिविधियों को गति मिलेगी। पर्यावरण संरक्षण पर आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी किया जाएगा।
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