पटना: मोकामा के जेडीयू विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में उन्हें मिली जमानत को निरस्त कर दिया है। साथ ही अदालत ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति और इस चर्चित हत्याकांड को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीवी वराले की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की ओर से अनंत सिंह को जमानत दिए जाने के आदेश पर सवाल उठाए।
शीर्ष अदालत का मानना था कि जमानत पर फैसला लेते समय हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता और आरोपी के आपराधिक इतिहास जैसे अहम पहलुओं का समुचित मूल्यांकन नहीं किया था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत संबंधी आदेश को रद्द कर दिया।
जमानत निरस्त, अब 1 दिसंबर तक करना होगा आत्मसमर्पण
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में अनंत सिंह को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे 1 दिसंबर 2026 तक संबंधित अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करें। अदालत के इस फैसले से विधायक की कानूनी परेशानियां बढ़ गई हैं।
जमानत रद्द होने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित समयसीमा के भीतर आत्मसमर्पण को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।
दुलारचंद यादव हत्याकांड फिर चर्चा में
दुलारचंद यादव हत्याकांड बिहार के चर्चित मामलों में शामिल रहा है। इस मामले में अनंत सिंह को लेकर पहले भी राजनीतिक और कानूनी स्तर पर काफी चर्चा हुई थी। पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
शीर्ष अदालत के ताजा आदेश के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे की न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है और अनंत सिंह निर्धारित तारीख तक आत्मसमर्पण करते हैं या नहीं।
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