पटना: जिंदगी की भागदौड़, नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों ने सबको अपनी-अपनी राह पर आगे बढ़ा दिया, लेकिन नवोदय की दोस्ती आज भी उसी गर्मजोशी के साथ कायम है। इसका एहसास तब हुआ, जब नवोदय 1996 बैच के साथी पतरातू, झारखंड में गेट-टुगेदर के लिए एकत्र हुए। वर्षों बाद एक-दूसरे से मिलते ही जैसे समय थम गया और सभी फिर स्कूल के उन्हीं दिनों में लौट गए, जहां दोस्ती, शरारत और बेफिक्री ही जिंदगी थी।
मुलाकात की शुरुआत पुराने दोस्तों के गले मिलने और एक-दूसरे का हालचाल जानने से हुई। इसके बाद शुरू हुआ यादों का सिलसिला। हॉस्टल की बातें, क्लासरूम की शरारतें, शिक्षकों के किस्से और साथ बिताए छोटे-छोटे पल बातचीत का हिस्सा बने। पुरानी यादों को याद कर कभी ठहाके गूंजे तो कभी भावुकता ने माहौल को छू लिया।
दिव्या ने कहा, “इतने साल बाद सभी को एक साथ देखकर लगा जैसे नवोदय के दिन वापस आ गए हों। यह मिलना मेरे लिए बहुत खास है।”
ज्योति ने कहा, “हम सब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए, लेकिन नवोदय की दोस्ती आज भी वैसी ही है। साथ बैठकर पुरानी बातें करना बहुत सुकून देने वाला रहा।”
गेट-टुगेदर के दौरान सभी ने साथ बैठकर भोजन किया। खाने की मेज पर भी पुरानी यादों और दोस्तों की शरारतों का दौर चलता रहा। किसी ने पुराने साथी की कोई आदत याद दिलाई तो किसी ने हॉस्टल के किसी मजेदार वाकये का जिक्र कर सबको हंसा दिया।
मनोज ने कहा, “हम यहां सिर्फ मिलने नहीं आए थे, बल्कि अपने पुराने दिनों को फिर से जीने आए थे। कुछ घंटे में ही ऐसा लगा जैसे हम फिर विद्यार्थी बन गए हैं।”
अमित ने कहा, “नवोदय ने हमें दोस्त ही नहीं दिए, परिवार जैसा रिश्ता दिया। इतने वर्षों बाद भी वही अपनापन महसूस हुआ।”
जितेंद्र ने कहा,“जिंदगी में बहुत कुछ बदल गया, लेकिन दोस्तों के साथ बैठते ही पुरानी यादें बिल्कुल ताजा हो गईं।”
इसके बाद सभी ने पतरातू की खूबसूरत वादियों में घूमने का आनंद लिया। प्रकृति के बीच दोस्तों के साथ बिताए पलों को कैमरे में भी कैद किया गया। सामूहिक तस्वीरों के साथ-साथ पुराने दोस्तों ने खूब मस्ती की।
गेट-टुगेदर का सबसे यादगार हिस्सा रहा पूल में मस्ती का दौर। पानी में उतरते ही सभी ने उम्र और जिम्मेदारियों को जैसे कुछ देर के लिए भूल दिया। एक-दूसरे पर पानी डालने से लेकर हंसी-मजाक तक खूब हुआ।
सुनील सेठ ने कहा,“पूल में उतरते ही सारी थकान और तनाव गायब हो गया। लगा जैसे फिर वही स्कूल के दिन सामने हैं।”
सुनील खजली ने कहा, “इतनी मस्ती शायद लंबे समय बाद हुई। दोस्तों के साथ बिताया यह समय हमेशा याद रहेगा।”
कुमार गौरव ने कहा,“इस मिलन ने याद दिलाया कि सच्ची दोस्ती समय और दूरी से खत्म नहीं होती।”
रंजीत ने कहा, “हम सब अलग-अलग जगह और अलग-अलग जिंदगी में हैं, लेकिन मिलते ही पुराना अपनापन लौट आता है।”
महेंद्र ने कहा, “नवोदय के साथियों के साथ बिताया हर पल अपने आप में एक याद है। यह दिन भी हमारी यादों में जुड़ गया।”
तरुण ने कहा, “आज किसी को अपनी जिम्मेदारियों की चिंता नहीं थी। सबने बस दोस्ती और पुराने दिनों का आनंद लिया।”
हंसी-मजाक और मस्ती के बीच कई भावुक पल भी आए। स्कूल के उन साथियों को याद किया गया, जिनके साथ कभी हर दिन बीतता था। समय ने भले ही सबको अलग कर दिया, लेकिन उन दिनों की यादें आज भी सभी के दिलों में मौजूद हैं।
अनुप ने कहा, “बचपन में हमें पता नहीं था कि ये छोटे-छोटे पल आगे चलकर जिंदगी की सबसे खूबसूरत यादें बन जाएंगे। आज उन्हें फिर से जीना भावुक कर गया।”
राजेश ने कहा, “नवोदय की दोस्ती की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि वर्षों बाद मिलने पर भी लगता है जैसे कल ही साथ थे। यही रिश्ता हमें बार-बार एक साथ लाता है।”
दिनभर साथ रहने के बाद जब विदा होने का समय आया तो चेहरे पर मुस्कान के साथ अगली मुलाकात की उम्मीद भी थी। पतरातू का यह मिलन सिर्फ एक पिकनिक या गेट-टुगेदर नहीं रहा, बल्कि बचपन की उन यादों को फिर से जीने का अवसर बन गया, जो समय बीतने के साथ और भी अनमोल होती गईं।
नवोदय 1996 बैच के लिए यह दिन शायद कैलेंडर की एक तारीख भर हो, लेकिन उन सभी के लिए यह ऐसा दिन बन गया, जिसमें पुरानी दोस्ती, बचपन की शरारतें, साथ का खाना, पतरातू की खूबसूरती और पूल की मस्तीसब एक साथ यादों का हिस्सा बन गए।
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