कविवर सुरेन्द्र नाथ सक्सेना की स्मृति में भव्य काव्य-संध्या और पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित

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पटना, विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर कविवर सुरेन्द्र नाथ सक्सेना की स्मृति में चित्रगुप्त सामाजिक संस्थान, पटना और श्री साहित्य कुंज, राँची के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार  को पाटलिपुत्र परिषद, चौक, पटना सिटी में एक भव्य काव्य-संध्या और पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे। कविवर सुरेन्द्र के ज्येष्ठ पुत्र तुषार कांति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कविवर सुरेन्द्र के काव्य-ग्रंथ ‘विष-बाण’, उनकी सुपुत्री मनीषा सहाय सुमन द्वारा साहित्य संवाहक पत्रिका का उन पर आधारित विशेषांक तथा उनके सुपुत्र पीयूष कांति के ग़ज़ल-संग्रह ‘तिश्नगी रह गई’ का लोकार्पण किया गया।  इस अवसर पर कविवर सुरेन्द्र के सुपौत्र सार्थक सक्सेना द्वारा उनके काव्य-ग्रंथ ‘दिव्य-लोक’ के प्रथम खंड का संगीतमय पाठ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी ने की जिसमें कमलनयन श्रीवास्तव, मधुरेश शरण, प्रेम किरण, डा. गोरख प्रसाद मस्ताना, डा. आरती, शुभ चंद्र सिन्हा, प्रभात धवन, अनुराधा प्रसाद, नसीम अख्तर,  श्वेता ग़ज़ल, सीमा रानी, डा.सुनंदा केशरी, सुनील कुमार, डा. अनीता राकेश, डा. किशोर सिन्हा एवं गणेश सिन्हा जी ….चित्रगुप्त समाज के अध्यक्ष
डा. गोलवारा ….पाटलिपुत्र परिषद के अध्यक्ष   आदी उपस्थित रहें। शायर प्रेम किरण ने बताया कि विष-बाण भारत-चीन और भारत-पाक युद्ध की पृष्ठभूमि में रचित वीर-रस की काव्य-कृति है जिसका पाठ कविवर सुरेन्द्र द्वारा 1962-67 की अवधि में बिहार के पांचवें राज्यपाल एम.ए.अयंगार के समक्ष किया गया था। विष-बाण की इन पंक्तियों को श्रोताओं द्वारा बहुत सराहा गया-
धरती का हिम-मंडित मस्तक भर गया आज चित्कारों से/ नर-मुंड रक्त की मांग आज आई है प्रबल पहाड़ों से/वीरों की जननी! सावधान! देना है शीश जवानों का/ उतरो चंडिके! महाकाली! आ गया वक्त बलिदानों का
आयोजन में काव्य  पाठ में श्रोताओं की विशेष प्रशंसा मिली पीयूष कांति के ग़ज़ल संग्रह ‘तिश्नगी रह गई’  के शेर- ‘जब सुख़नवर साथ बैठे प्यार की बातें हुईं/ दिल में जो थी नफ़रतों की आग पानी हो गई’ को श्रोताओं ने अत्यंत सराहा। कविवर सुरेन्द्र की सुपुत्री और कवयित्री मनीषा द्वारा पढ़ी गई पंक्तियां “ऐसे शब्द लिखो मेरे मन अब” ने भी श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। डा. गोरख प्रसाद  जी ,मधुरेश शरण जी कमलनयन जी की रचनाओं पर श्रोता झूम उठे। नसीम अख्तर जी  “गलियो के फूल वक्त के उपवन मेंआ गये, शुभ चंद्रा जी  ने “चऱागो को न मेरा घर बताया कर”,  सुनील कुमीर मलंग  जी ने “टूटे दिल के मेरे अहसास मंजर देखो”, सीमा रानी जी ने “जो पास अपने बुलाते ही नही” आदी
 इस अवसर पर 5 रचनाकारों को सुरेन्द्र नाथ सक्सेना साहित्य सम्मान, 2026, 10 रचनाकारों को सुरेन्द्र नाथ सक्सेना रचनाकार सम्मान, 2026 और 3 समीक्षकों को सुरेन्द्र नाथ सक्सेना साहित्य समीक्षा सम्मान, 2026 प्रदान किया गया। आयोजक तुषार कांति ने सभी कवियों, समीक्षकों और श्रोताओं को कार्यक्रम के लिए धन्यवाद दिया और भविष्य में भी इस कार्यक्रम को आयोजित किए जाने के संकल्प को दोहराया।
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