मोतिहार
अशोक वर्मा
बिहार में अतिक्रमण उजाड़ो अभियान चलाया जा रहा है,अब सड़के चौडी हो जाएगी ,और आवागमन में आम जनता को सुविधा होगी लेकिन व्यवस्था पर एक प्रश्न है कि लंबे समय से पंचायती राज व्यवस्था है, नगर निगम, नगर परिषद,नगर पालिका, नगर पंचायत एवं जिला प्रशासन है सब रहते हुए निश्चित ही प्रशासनिक लोगों की मिली भगत से इन लोगों ने अतिक्रमण किया होगा और बसे होगे क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर जगह मिलने के बाद ही लोगों ने अपने जीवन भर की कमाई निर्माण में लगा दी होगी।इसलिए दोषी प्रशासन के लोग ही कहे जायेगे। उक्त बातें जिले के जाने-माने कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफेसर जगदीश विद्रोही ने कहीं ।उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण करने वाले लोग जितने दोषी नहीं है उससे ज्यादा दोषी प्रशासन के लोग हैं जिन्होंने अवैध कार्य करने दिया।ये लोग जायज नाजायज राशी भी दी होगी,गुमटी टैक्स दिया होगा तब इन्हें वहां पर बसने दिया होगा।इस जाड़े के मौसम में इन्हें उजाडना और इनका आशियाना छीन लेना ,ठंड में इन्हें तड़पने के लिए विवश कर देना मानवीय आधार पर यह काम ठीक नही है। गर्मी के दिन में यह ड्राइव चलना चाहिए था। जो लोग पीडित हैं सभी भारत के ही हैं ,कोई विदेशी लोग नहीं है। अतः उजाड़ने वाले लोगों के अंदर भूमिहीनों के प्रति संवेदना रखनी चाहिए और इनके लिए स्थाई तौर पर कहीं न कहीं सर ढकने की व्यवस्था होनी चाहिए। जाड़ा के दिन वैसे भी गरीबों के लिए कष्टदायक होता है। सिर्फ उजाड़ देना बहादुरी नहीं है। वैसे जो लोग भी उजड रहे हैं कोई इसकी गारंटी नहीं है कि फिर से ये लोग अतिक्रमण नही करेंगे क्योंकि अपने देश और राज्य के कानून में इतने छिद्र है कि शायद ही यह अभियान सफल हो।हर शाख पर उल्लू बैठा है।
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