विदेशी पिंडदानी ने अपने पूर्वजों का देवघाट पर किया पिंडदान: पिंडदान का अनुष्ठान पूरा कर विदेशी तीर्थयात्री दिखे खुश

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गया। गया में पितृपक्ष मेला के 14वें दिन विदेशी पिंडदानी ने भी अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए विष्णुपद के देव घाट पर पिंडदान किया है। यह विदेशी पिंडदानी यूक्रेन, घाना, रूस, उज्बेकिस्तान, नाईजीरिया, साउथ अफ्रीका और जर्मनी जैसे देशों से आए है जो अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए पिंडदान किया. सभी विदेशी तीर्थयात्री ईसाई हैं, लेकिन हिंदू सनातन धर्म से प्रभावित होकर वे अपने पूर्वजों का पिंडदान कर रहे हैं।विदेशों में खास कर यूरोप में सनातन धर्म के प्रसार के लिए कार्य करने वाले लोकनाथ गौड़ के मार्गदर्शन में सभी विदेशी तीर्थयात्रियों का पिंडदान कराया है।कर्मकांड के दौरान सभी विदेशी तीर्थयात्री महिलाओं ने भारतीय महिलाओं की तरह कपड़े पहने हुए थे।वहीं पुरुष तीर्थयात्रियों ने धोती को पहना हुआ था।. इसके बाद सनातन धर्म के सभी नियमों का पालन कर श्राद्ध कार्य किया है ।पिंडदान का अनुष्ठान पूरा कर विदेशी तीर्थयात्री काफी खुश दिखे. इसके पहले सभी विदेशी तीर्थयात्री भगवान बुद्ध का दर्शन कर विष्णुपद पहुंचे हैं सभी ने  देव घाट सहित मेला क्षेत्र का भ्रमण किया है। इस संबंध में आचार्य लोकनाथ गौड़ ने बताया कि यह सभी तीर्थयात्री ईसाई धर्म को मानने वाले हैं। सनातन धर्म से प्रभावित होकर इन लोगों ने अपना नाम तक बदल लिया है। इसके बाद यहां किसी ने अपने पति का तो किसी ने पिता, भाई, बहन, पत्नी आदि का पिंडदान व तर्पण किया है साउथ अफ्रीका से आए एक विदेशी तीर्थयात्री ने बताया कि उन्होंने सनातन धर्म के बारे में जाना है ।इसमें पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना भी है. यही कारण है कि वह वृंदावन से गया पहुंचे और फिर उन्होंने अपनी बहन और अन्य पूर्वजों का पिंडदान किया है.
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