फाइलेरिया मुक्त पंचायत में पंचायती राज पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण : डॉ परमेश्वर प्रसाद

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  • 13 जिलों के साढ़े तीन करोड़ लोगों को खिलाई जाएगी फाइलेरिया रोधी दवाएं
  • एमडीए के दौरान फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट की भूमिका को मिली सराहना
पटना। इस वर्ष 10 अगस्त से सर्वजन दवा सेवन के दूसरे राउंड की शुरूआत हो रही है। इसमें 13 जिलों (बक्सर, भोजपुर, दरभंगा, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, नालंदा, नवादा, पटना, पूर्णिया, रोहतास और समस्तीपुर) के चि​न्हित प्रखंडों में सर्वजन दवा सेवन अभियान चलेगा, जिसमें करीब तीन करोड़ 50 लाख लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई जाएगी। ये बातें अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, फाइलेरिया डॉ परमेश्वर प्रसाद ने शुक्रवार को जिला पंचायती राज पदाधिकारियों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि 13 जिलों में से  पांच जिलों में डीईसी, अल्वेंडाजोल एवं आइवरमेक्टिन तथा शेष जिलों में डीईसी और अल्वेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। किसी भी परिस्थिती में दवा का वितरण न हो, स्वास्थ्य कर्मी अपने सामने दवाओं को खिलाएं। जिला पंचायती राज पदाधिकारियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि अपने जिले की लक्षित आबादी को दवा सेवन सुनिश्चित कराकर फाइलेरिया मुक्त पंचायत बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। इसके अलावा हर स्तर पर एमडीए अभियान को लेकर प्रचार प्रसार करें।  डॉ प्रसाद ने कहा कि फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क की भूमिका भी एमडीए की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
पंचायती राज विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण:
पिरामल फाउंडेशन के विकास सिन्हा ने एमडीए में पंचायती राज विभाग की भूमिका पर विस्तार से चर्चा किया। उन्होंने कहा कि एमडीए में अधिकतम लोगों को दवा सेवन सुनिश्चित कराने के लिए पंचायती राज पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों  की सबसे अहम भूमिका है। उन्होंने  जिला पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी का एमडीए पर उन्मुखीकरण, जिला स्तर पर एमडीए पर होने वाले डीसीसी बैठक में शामिल होना एवं प्रखंड स्तर पर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा सभी मुखिया का फाइलेरिया और एमडीए कार्यक्रम पर उन्मुखीकरण करने पर जोर दिया। वहीं पिरामल के कार्यक्रम निदेशक के बसब रूज ने पिछले चक्र में पंचायती राज अधिकारियों के सहयोग पर विस्तार से चर्चा की।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने कहा कि फाइलेरिया नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज में एक प्रमुख रोग है। विश्व के 72 देशों में 85.9 करोड़ आबादी फाइलेरिया के खतरे में हैं। वहीं, राज्य के सभी 38 जिले इससे प्रभावित है।  इससे विश्व भर में लगभग 200 करोड़ रुपये की प्रतिवर्ष आर्थिक क्षति होती है।उन्मुखीकरण के दौरान फाइलेरिया रोग के कारण,लक्षण और निदान पर विस्तृत चर्चा की। उन्मुखीकरण के दौरान पिरामल फाउंडेशन के डॉ इंद्रजीत बनर्जी ने मंच का कुशल संचालन करते हुए पंचायती राज पदाधिकारियों का हौसला बढ़ाया। राज्य सलाहकार फाइलेरिया डॉ अनुज सिंह रावत ने बताया कि एमडीए ​अभियान में सहयोग के लिए 40 विभागों से अंतर विभागीय समन्वय स्थापित किया गया है। इस संदर्भ में विभाग द्वारा पत्र जारी किया जा चुका है। सभी उपस्थित पंचायती राज पदाधिकारियों से अपने जिले में सहयोग की अपील की।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ परमेश्वर प्रसाद ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर पीसीआई, सीफार, लेप्रा, पिरामल, जीएचएएस के प्रतिनिधि, राज्य अनुश्रवण एवं मुल्यांकन पदाधिकारी प्रभात कुमार सहित 13 जिलों से आए पंचायती राज पदाधिकारी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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