17कैमूर की दो सगी बहनों ने रचा सफलता का इतिहास, BAMS में सुषमा स्वराज को 10वां स्थान, अस्मिता कुमारी ने NIA में 242वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया जिले का मान
कैमूर (भभुआ)। मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर कैमूर की दो सगी बहनों ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। भभुआ शहर के हवाईअड्डा रोड स्थित गांधी आवासीय पब्लिक स्कूल के संचालक एवं प्राचार्य उमेश सिंह की दोनों बेटियों की उपलब्धि से परिवार सहित रिश्तेदारों और परिचितों में खुशी का माहौल है। बड़ी बेटी डॉ. सुषमा स्वराज ने BAMS में 10वां स्थान हासिल किया है, जबकि छोटी बेटी डॉ. अस्मिता कुमारी ने NIA में 242वीं रैंक प्राप्त की है।
नवोदय विद्यालय से शुरू हुआ सफलता का सफर
डॉ. सुषमा स्वराज ने अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा कैमूर जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय, चौरसिया, मोहनिया से प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश स्थित राजीव गांधी पोस्ट ग्रेजुएट आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल से BAMS की पढ़ाई पूरी की। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने 10वां स्थान हासिल कर परिवार को गौरवान्वित किया।
वहीं, छोटी बहन डॉ. अस्मिता कुमारी ने भी अपनी बड़ी बहन की तरह चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हासिल की। जवाहर नवोदय विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित NIA से चिकित्सा शिक्षा जारी रखी और 242वीं रैंक प्राप्त की।
बेटियों की सफलता पर भावुक हुए शिक्षक पिता
दोनों बेटियों की उपलब्धि से पिता उमेश सिंह बेहद खुश हैं। बेटियों की सफलता पर उन्होंने मिठाई खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की। एक शिक्षक पिता के लिए यह उपलब्धि खास मायने रखती है, क्योंकि उनकी दोनों बेटियों ने मेहनत और पढ़ाई के दम पर चिकित्सा शिक्षा में अपनी पहचान बनाई है।
गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करना चाहती हैं सुषमा
डॉ. सुषमा स्वराज का कहना है कि डॉक्टर बनने का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद और गरीब लोगों की सेवा करना है। वह चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़कर गरीब मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में योगदान देना चाहती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना, नियमित पढ़ाई करना और लगातार मेहनत करना जरूरी है। विद्यार्थियों को मोबाइल फोन और अन्य अनावश्यक गतिविधियों में अपना कीमती समय बर्बाद करने से बचना चाहिए।
कैमूर के विद्यार्थियों के लिए बनीं प्रेरणा
दोनों बहनों की सफलता ने यह संदेश दिया है कि सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और निरंतर मेहनत से बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। कैमूर की इन दोनों बेटियों की उपलब्धि से जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
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