अनूप नारायण सिंह।
पटना।बिहार की राजनीति में सीटों के तालमेल को लेकर बड़े बदलाव का संकेत मिला है। सोनपुर विधानसभा सीट, जो अब तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हिस्से में थी, इस बार भाजपा ने स्वेच्छा से अपना दावा छोड़ते हुए यह सीट जनता दल (यूनाइटेड) को सौंप दी है। यह राजनीतिक घटनाक्रम न सिर्फ क्षेत्रीय समीकरण को बदलने वाला है, बल्कि गठबंधन के भीतर एक सोच-समझकर बनाई गई रणनीति का हिस्सा भी है।
जदयू की तरफ से इस सीट पर प्रदेश सचिव एवं सोनपुर विधानसभा प्रभारी, आचार्य डॉ. राहुल परमार का नाम इकलौते और सर्वसम्मत प्रबल दावेदार के रूप में उभर कर सामने आया है। डॉ. परमार लंबे समय से सोनपुर क्षेत्र में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और जनसंपर्क अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को इस सीट पर लगातार हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद गठबंधन ने सामूहिक निर्णय लेते हुए इस बार सोनपुर सीट जदयू को सौंप दी है। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की “बैकफुट पर सुरक्षित खेल” और जदयू की “फ्रंटफुट पर मजबूत दावेदारी” के रूप में देख रहे हैं।
डॉ. राहुल परमार को न केवल एक लोकप्रिय संगठनकर्ता के रूप में जाना जाता है, बल्कि वे एक सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक भी हैं। उनकी गहरी क्षेत्रीय सक्रियता, पंचायत स्तर तक संगठन की पकड़, और युवाओं से सीधे जुड़ाव ने उन्हें जनता के बीच एक भरोसेमंद चेहरे के रूप में स्थापित किया है।
जदयू के सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने डॉ. परमार के नाम को लेकर एकतरफा सहमति बना ली है और उनका टिकट लगभग तय माना जा रहा है।सोनपुर की राजनीति में यह बदलाव तय करता है कि इस बार जदयू यहां सिर्फ नामांकन नहीं, बल्कि निर्णायक लड़ाई के लिए मैदान में उतर रहा है। गठबंधन की ओर से भी यह स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्रीय लोकप्रियता और संगठनात्मक मज़बूती को प्राथमिकता दी जा रही है।
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