कोयला सिंडिकेट के आर्थिक नेटवर्क पर GST का बड़ा प्रहार! भुरकुंडा में दो ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, करोड़ों की टैक्स हेराफेरी की जांच तेज

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  • कोयले के खेल में बड़े खिलाड़ियों तक पहुंचेगी जांच की आंच! GST रेड से मची खलबली, CCL के बड़का-सयाल प्रक्षेत्र से जुड़े तारों की पड़ताल
  • दो कोयला कारोबारी के ठिकानों पर रांची GST टीम की दबिश, दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच
  • जांच के दायरे में आ सकते हैं कई अन्य चेहरे
रामगढ़:रामगढ़ और हजारीबाग जिले के कोयलांचल में सक्रिय कथित कोयला सिंडिकेट के आर्थिक नेटवर्क पर जीएसटी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। रांची से पहुंची जीएसटी अधिकारियों की टीम ने भुरकुंडा क्षेत्र में दो अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर कोयले के कारोबार से जुड़े वित्तीय लेन-देन, टैक्स भुगतान और कथित जीएसटी अनियमितताओं की जांच शुरू की है। इस कार्रवाई से कोयला कारोबार से जुड़े लोगों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये की कथित जीएसटी हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, जांच पूरी होने और विभागीय पुष्टि के बाद ही वास्तविक वित्तीय अनियमितता का खुलासा हो सकेगा।
जानकारी के अनुसार, जीएसटी रांची की टीम ने भुरकुंडा और सौंदा बस्ती के सरिया टोला पर दबिश दी। दोनों स्थानों पर अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजों को खंगाला। इसके अलावा कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों में मौजूद कारोबारी गतिविधियों एवं वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारियों की भी जांच किए जाने की सूचना है।
बड़का-सयाल से जुड़े कारोबार की पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी विभाग की यह कार्रवाई सीसीएल के बड़का-सयाल क्षेत्र से जुड़े कोयला कारोबार के संदर्भ में की गई है। जांच एजेंसी को कथित तौर पर ऐसी सूचनाएं मिली थीं कि कोयले के कारोबार में बड़े पैमाने पर टैक्स संबंधी अनियमितताएं हुई हैं। कोयले की खरीद-बिक्री, ई-ऑक्शन से जुड़े कारोबार, बिलिंग और वित्तीय लेन-देन के माध्यम से जीएसटी में हेराफेरी किए जाने की आशंका के बाद विभाग ने सूचनाओं का सत्यापन किया। इसके बाद अधिकारियों की विशेष टीम ने एक साथ दोनों ठिकानों पर कार्रवाई की।
छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेने और उनसे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल किए जाने की बात सामने आ रही है। जांच का मुख्य फोकस कोयले के कारोबार में वास्तविक लेन-देन, टैक्स भुगतान, बिलिंग और संबंधित कारोबारी संस्थाओं के बीच वित्तीय संबंधों को खंगालना बताया जा रहा है।
जांच की आंच बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की संभावना
इस कार्रवाई को केवल दो कारोबारियों के ठिकानों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान यदि वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों में बड़े स्तर पर अनियमितताओं के प्रमाण मिलते हैं, तो विभाग संबंधित कारोबारियों के अलावा उनसे जुड़े अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की भी पड़ताल कर सकता है। ऐसे में सीसीएल के बड़का-सयाल क्षेत्र में कोयला कारोबार से जुड़े बड़े नेटवर्क की जांच का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
इसी क्रम में सीसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों तक जांच की आंच पहुंचने की चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि, फिलहाल सीसीएल के सीएमडी की किसी प्रत्यक्ष भूमिका अथवा उनके खिलाफ जीएसटी विभाग की कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और वित्तीय साक्ष्य ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेंगे।
गैंगस्टर राहुल दुबे के आरोपों के बाद कार्रवाई ने बढ़ाई चर्चा
मालूम हो कि बड़का-सयाल क्षेत्र में कोयले के कारोबार को लेकर बीते दिनों गैंगस्टर राहुल दुबे की ओर से सोशल मीडिया पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। उसने कथित कोयला सिंडिकेट के सक्रिय होने और सीसीएल के सीएमडी के संरक्षण में कोयले का खेल संचालित होने का दावा किया था। इसके अलावा ई-ऑक्शन में गड़बड़ी कर चुनिंदा लोगों को ही काम दिए जाने के आरोप भी लगाए गए थे।
हालांकि, राहुल दुबे की ओर से लगाए गए इन आरोपों की  पुष्टि नहीं हुई है। अब जीएसटी विभाग की ताजा छापेमारी के बाद बड़का-सयाल क्षेत्र के कोयला कारोबार, ई-ऑक्शन व्यवस्था और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जीएसटी की मौजूदा कार्रवाई और सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध अभी आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुआ है।
आगे और खुल सकते हैं कई राज
फिलहाल जीएसटी अधिकारियों की जांच का केंद्र जब्त दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारियां हैं। इनकी जांच के बाद यदि टैक्स चोरी अथवा अन्य वित्तीय अनियमितताओं के ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है। जरूरत पड़ने पर अन्य ठिकानों पर भी जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भुरकुंडा में हुई इस छापेमारी से कोयला कारोबार के किन-किन चेहरों के नाम सामने आते हैं और क्या जांच की कड़ियां बड़का-सयाल के बड़े कारोबारी नेटवर्क तक पहुंचती हैं? फिलहाल पूरे कोयलांचल की नजर जीएसटी विभाग की अगली कार्रवाई और आधिकारिक खुलासे पर टिकी हुई है।
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