वोटर आईडी में सुधार के नाम पर रिश्वतखोरी का आरोप! बरही SDO कार्यालय का वीडियो वायरल, बड़े बाबू तुलसी श्रीवास्तव पर उठे सवाल

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  •  चौपारण के युवक से पैसे लेने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से हो रहा प्रसारित, मामला सामने आने के बाद एसडीओ ने दिए जांच के आदेश
बरही : सरकारी कार्यालयों में आम जनता को पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच हजारीबाग जिले के बरही अनुमंडल कार्यालय से जुड़ा एक कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। कार्यालय में पदस्थापित बड़े बाबू तुलसी श्रीवास्तव पर वोटर आईडी कार्ड में सुधार कराने के नाम पर एक युवक से पैसे लेने का आरोप लगा है। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद अनुमंडल कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, मामला चौपारण प्रखंड के एक युवक से जुड़ा है। बताया जाता है कि युवक अपने वोटर आईडी कार्ड में सुधार कराने से संबंधित आवेदन लेकर बरही अनुमंडल कार्यालय पहुंचा था। इसी दौरान कार्यालय के बड़े बाबू तुलसी श्रीवास्तव पर काम कराने के एवज में रुपये मांगने और लेने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कथित तौर पर युवक और कार्यालय कर्मी के बीच पैसों का लेनदेन होता दिखाई दे रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो और उसमें लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। सरकारी दस्तावेजों में सुधार जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए यदि किसी कर्मचारी द्वारा अवैध रूप से पैसे की मांग की जाती है, तो यह न केवल सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ है। विशेषकर मतदाता पहचान पत्र में सुधार निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है, जिसे नियमानुसार और निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बरही के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) द्वारा जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। अब निगाहें जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच किस स्तर पर की जाती है और आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है।
स्थानीय लोगों के बीच इस मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों को अपने वैध कार्य कराने के लिए भी अतिरिक्त पैसे देने पड़ेंगे? क्या संबंधित कर्मी ने वास्तव में किसी प्रकार की अवैध राशि की मांग की थी? यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या जिम्मेदार कर्मी के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होगी?
फिलहाल, पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर दोषी के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई किया जाना आवश्यक होगा, ताकि सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे और आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा कायम रहे।
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