- दरभंगा हाउस CCL मुख्यालय को बम से उड़ाने की धमकी से मचा हड़कंप, CMD को जान से मारने की चेतावनी
- ई-ऑक्शन में कथित गड़बड़ी और कोयला सिंडिकेट के वर्चस्व को लेकर छिड़ी जंग ने बढ़ाई सनसनी
- हजारीबाग से रांची तक गोलीबारी, कोयला कारोबारियों को धमकियां और सोशल मीडिया पर चुनौती; पुलिस की कार्रवाई के बावजूद अपराधियों के नेटवर्क पर उठ रहे सवाल
- कोयले के कारोबार पर कब्जे की जंग अब CCL मुख्यालय तक पहुंची, राहुल दुबे गैंग की धमकी से हड़कंप
रांची: झारखंड के कोयलांचल में कोयले के कारोबार पर वर्चस्व कायम करने की कथित लड़ाई अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। कोयला कारोबारियों को धमकाने, गोलीबारी कर दहशत फैलाने और कथित लेवी वसूली के आरोपों से चर्चा में आया गैंगस्टर राहुल दुबे गैंग अब देश की प्रमुख कोयला उत्पादक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के मुख्यालय और उसके शीर्ष प्रबंधन को निशाना बनाकर धमकी देने के मामले में सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में रांची के दरभंगा हाउस स्थित CCL मुख्यालय को बम से उड़ाने तथा CMD को जान से मारने की धमकी दिए जाने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम ने CCL प्रबंधन, अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ई-ऑक्शन, कोयला सिंडिकेट और वर्चस्व की लड़ाई!
पूरे विवाद के पीछे कोयला कारोबार में कथित सिंडिकेट के वर्चस्व और CCL की ई-ऑक्शन प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को अहम वजह माना जा रहा है। राहुल दुबे गैंग की ओर से सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि कोलियरियों की ई-ऑक्शन प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुई हैं और कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। गैंग ने कोयला कारोबार में सक्रिय एक कथित सिंडिकेट को CCL के CMD का संरक्षण मिलने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इन्हें प्रमाणित तथ्य माना जा सकता है। CCL की ओर से ई-ऑक्शन के माध्यम से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की बात कही जाती रही है।
न्यू बिरसा से हजारीबाग और रांची तक गोलीबारी का सिलसिला
हाल के दिनों में कोयला कारोबार से जुड़े लोगों और प्रतिष्ठानों पर लगातार हमलों की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। हजारीबाग के न्यू बिरसा कोलियरी क्षेत्र में गोलीबारी की घटना के बाद गैंग के नाम से सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने और कई लोगों को धमकी देने वाली पोस्ट सामने आई थी। इसके बाद 30 अक्टूबर को हजारीबाग के मटवारी स्थित एके इंटरनेशनल होटल के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी की गई। घटना में होटल के शीशे टूट गए और वहां तैनात सुरक्षा गार्ड बाल-बाल बचा। इसी दिन रांची के कांके इलाके में कोयला कारोबारी संजय करमाली के घर के बाहर भी फायरिंग की घटना सामने आई। इन घटनाओं के बाद पूरे कोयलांचल में दहशत का माहौल बन गया।
पुलिस की कार्रवाई, कई आरोपी गिरफ्तार
लगातार गोलीबारी और धमकियों के बाद रांची पुलिस ने कार्रवाई तेज की। पुलिस मुठभेड़ के दौरान एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जबकि अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की कार्रवाई में हथियार और कारतूस भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। बाद की कार्रवाई में हथियारों की आपूर्ति करने के आरोप में एक अन्य संदिग्ध की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई। पुलिस पूरे नेटवर्क, गोलीबारी की घटनाओं और सोशल मीडिया पर जारी धमकियों के तार जोड़कर जांच कर रही है।
बड़का सियाल में कथित सिंडिकेट का दबदबा भी जांच के घेरे में
इस पूरे घटनाक्रम में रामगढ़ जिले के बड़का सियाल कोयलांचल का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। यहां कोयला कारोबार में कुछ लोगों के प्रभाव और कथित सिंडिकेट के माध्यम से गतिविधियां संचालित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। बाहरी कारोबारियों को कारोबार में प्रवेश नहीं मिलने तथा वर्चस्व की लड़ाई को लेकर भी चर्चाएं हैं। दूसरी ओर, गैंग की ओर से इन्हीं परिस्थितियों को लेकर CCL प्रबंधन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता जांच और ठोस साक्ष्यों के बिना स्थापित नहीं की जा सकती।
अब सबसे बड़ा सवाल: सरकारी उपक्रम के मुख्यालय की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?
कोयला कारोबारियों और आउटसोर्सिंग कंपनियों से शुरू हुआ धमकी और गोलीबारी का सिलसिला यदि देश की महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनी के मुख्यालय तक पहुंच रहा है, तो यह निश्चित रूप से गंभीर चिंता का विषय है। CCL के अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवारों की सुरक्षा के साथ-साथ कोलियरियों में निर्भीक एवं पारदर्शी तरीके से कारोबार संचालित करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
अब निगाहें पुलिस की जांच और CCL प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर टिकी हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ई-ऑक्शन में कथित अनियमितताओं के आरोपों की सच्चाई क्या है? क्या कोयला कारोबार में किसी सिंडिकेट का दबदबा है? क्या आपराधिक गिरोह इन्हीं आरोपों की आड़ में अपना वर्चस्व और कथित वसूली का नेटवर्क बढ़ाना चाहते हैं? इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल, CCL मुख्यालय को मिली धमकी ने झारखंड के कोयलांचल में कानून-व्यवस्था और औद्योगिक सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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